सारंगपुर। धरती को बचाने और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ-सुरक्षित वातावरण देने की दिशा में सारंगपुर का शासकीय मॉडल स्कूल इन दिनों एक मिसाल बनकर उभरा है। बुधवार को यहाँ आयोजित 'स्वच्छ गांव–सुरक्षित जलवायु अभियान' केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति एक सामूहिक जज्बा बनकर सामने आया। इस अनूठे आयोजन में समाज के हर वर्ग—पत्रकारों से लेकर शिक्षाविदों और नन्हे विद्यार्थियों—ने कंधे से कंधा मिलाकर हरियाली का संकल्प लिया। 
वृक्षारोपण बना पर्यावरण सुरक्षा का ढाल
बढ़ते प्रदूषण और अनियंत्रित होते जलवायु परिवर्तन (Climate Change) ने आज पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इसी चुनौती का सामना करने के लिए सारंगपुर के मॉडल स्कूल परिसर में आयोजित कार्यक्रम में प्रमुख अतिथियों के रूप में साधना न्यूज़ चैनल के हेड एवं जर्नलिस्ट्स यूनियन ऑफ मध्यप्रदेश (JUMP) के प्रांताध्यक्ष डॉ. अरुण सक्सेना, सरदार पटेल पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल के डायरेक्टर डॉ. कमल आलोक प्रसाद और वरिष्ठ पत्रकार श्याम निगम ने शिरकत की।
अतिथियों ने विद्यालय परिसर में विधिवत पौधरोपण कर एक संदेश दिया कि 'एक पौधा—एक संकल्प' ही इस धरती को फिर से हरा-भरा बना सकता है। वृक्षारोपण के बाद उपस्थित सभी लोगों ने स्वयं झाड़ू उठाकर विद्यालय परिसर की साफ-सफाई की और 'स्वच्छता ही सेवा' को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
विचारों का मंथन: क्यों जरूरी है हरियाली?
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि, "स्वच्छता और वृक्षारोपण केवल अभियान नहीं हैं, ये तो हमारे भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला हैं।" डॉ. अरुण सक्सेना ने जोर देकर कहा कि यदि आज हम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प लेते हैं, तो आने वाले समय में यही पौधे पर्यावरण की ढाल बनकर हमें भीषण गर्मी और जलवायु असंतुलन से बचाएंगे।
शिक्षाविदों ने माना कि स्कूल ही वह जगह है जहाँ से स्वच्छता और पर्यावरण प्रेम की नींव तैयार होती है। विद्यार्थियों में इस अभियान को लेकर गजब का उत्साह देखा गया। उन्होंने भी संकल्प लिया कि वे न केवल अपने विद्यालय, बल्कि अपने घर के आसपास भी स्वच्छता बनाए रखेंगे और समय-समय पर पौधों की देखभाल करेंगे।
संकल्प लेने वालों में रहे ये दिग्गज
इस प्रेरक अभियान में विद्यालय की प्राचार्य सुश्री बबीता मिश्रा की विशेष भूमिका रही। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए विद्यालय परिवार का आभार व्यक्त किया। इस दौरान सुनील सक्सेना, कमल राठौर, ममता चौहान, अर्जुन वर्मा, सुखराम बघेल, रौनक खत्री, पुरुषोत्तम पाटीदार, अनुराधा त्रिपाठी, पवन चौधरी और प्रबल सर समेत विद्यालय परिवार के सभी सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
क्या है 'स्वच्छ गांव-सुरक्षित जलवायु' का मूल मंत्र?
यह अभियान मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि हम कैसे स्थानीय स्तर पर पर्यावरण सुधार कर सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि छोटे-छोटे प्रयास—जैसे कि समय पर कचरा निस्तारण, प्लास्टिक का कम उपयोग और सघन वृक्षारोपण—ही बड़े बदलाव ला सकते हैं। सारंगपुर के मॉडल स्कूल का यह कदम न केवल स्थानीय निवासियों के लिए प्रेरणा है, बल्कि अन्य संस्थानों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण है।
अंत में, सभी ने इस बात को दोहराया कि पर्यावरण संरक्षण का कोई विकल्प नहीं है। जब तक समाज का हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा, तब तक जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से लड़ना मुश्किल होगा। लेकिन सारंगपुर की इस पहल ने एक नई उम्मीद जगा दी है कि आने वाला कल हरा-भरा और स्वच्छ होगा।
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