रतलाम/बड़ावदा: मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के बड़ावदा नगर परिषद से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली राजनीतिक खबर सामने आ रही है। नगर परिषद की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब वार्ड क्रमांक 8 की तेज-तर्रार भाजपा पार्षद और पीआईसी (PIC) समिति की सभापति विनीता शैलेन्द्र व्यास ने अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। उनके इस तीखे और धमाकेदार इस्तीफे से स्थानीय सियासी गलियारों में भूचाल आ गया है और भाजपा संगठन के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब खुलकर सड़क पर आ गई है।
सीएमओ को सौंपा सनसनीखेज इस्तीफा पत्र
विनीता शैलेन्द्र व्यास ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) को एक विस्तृत और सनसनीखेज पत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे के तीखे कारणों का पर्दाफाश किया है। पत्र सामने आते ही नगर की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है और हर तरफ इसी की चर्चा हो रही है। सभापति ने सीधे तौर पर नगर परिषद अध्यक्ष और उनके पति पर प्रशासनिक कार्यों में दखलअंदाजी और गैर-संवैधानिक दबाव बनाने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
इस्तीफे में लगाए गए मुख्य और गंभीर आरोप
विनीता व्यास द्वारा सौंपे गए इस्तीफे के पत्र में कई बड़े खुलासे किए गए हैं, जो निम्नलिखित हैं:
गैर-संवैधानिक और अनैतिक दबाव: अध्यक्ष और उनके पति द्वारा लगातार नियमों के विरुद्ध और अनैतिक कार्यों को अंजाम देने का दबाव बनाया जा रहा था।
तानाशाही रवैया: आम नागरिकों और पार्षदों के प्रति परिषद में तानाशाही पूर्ण रवैया अपनाया जा रहा था, जिससे जनहित के कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे थे।
पीआईसी बैठकों में खेल: आरोप है कि पीआईसी की बैठकें संपन्न होने के बाद चुपचाप नए विषय एजेंडे में जोड़ दिए जाते थे, जो नियमों के पूरी तरह खिलाफ है।
कर्मचारियों का उत्पीड़न: नगर परिषद के कर्मचारियों पर नियम विरुद्ध कार्य करने का दबाव डाला जाता था और उनके हितों से जुड़े मामलों की लगातार अनदेखी की जा रही थी।
मनमानी नियुक्तियां और निष्कासन: विभिन्न विभागों में बेवजह नियम विरुद्ध हस्तक्षेप किया जा रहा था, साथ ही कर्मचारियों की नियुक्ति और निष्कासन को लेकर भी भारी मनमानी चल रही थी।
भाजपा संगठन में मचा हड़कंप, विपक्ष को मिला बड़ा हथियार
एक महिला भाजपा पार्षद और सभापति का इस तरह बगावती तेवर दिखाते हुए इस्तीफा देना पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। निकाय चुनाव और स्थानीय प्रबंधन के बीच इस तरह के गंभीर आरोप सामने आने से सत्ताधारी दल की खासी फजीहत हो रही है।
दूसरी ओर, स्थानीय विपक्ष को इस मुद्दे पर सरकार और परिषद को घेरने का एक बड़ा हथियार मिल गया है। जनता के बीच भी यह चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है कि आखिर अंदरखाने ऐसा क्या पक रहा था कि सभापति को अपनी ही परिषद के खिलाफ मोर्चा खोलना पड़ा। नगर की जनता अब इस बात का बेसब्री से इंतजार कर रही है कि क्या जिला प्रशासन इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच करवाएगा या नहीं।
आगे क्या होगा?
बड़ावदा नगर परिषद के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला और सबसे बड़ा मामला है जहां किसी सत्ताधारी दल के जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति ने अपनी ही कार्यशैली के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद किया है। इस सियासी उठापटक के बाद से ही शहर की राजनीतिक चौपालों पर सिर्फ और सिर्फ इसी इस्तीफे की चर्चा गूंज रही है। क्या संगठन इस मामले को सुलझाने में कामयाब होगा या बड़ावदा की राजनीति में और भी बड़े खुलासे देखने को मिलेंगे? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
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