MP Wheat Export: मध्य प्रदेश के खेतों में उगने वाला सोना यानी यहाँ का गेहूं अब दुनिया भर की थालियों की शान बन रहा है। ओमान, यमन, यूएई, कतर और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों से लेकर अमेरिका-इटली तक मध्य प्रदेश के गेहूं की साख तेजी से बढ़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की किसान हितैषी नीतियों का ही असर है कि इस साल राज्य का गेहूं उत्पादन रिकॉर्ड 365.11 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, और उत्पादकता बढ़कर 3780 किलो प्रति हेक्टेयर हो गई है। यही वजह है कि अब मध्य प्रदेश को देश का नया “गेहूं प्रदेश” कहा जाने लगा है।
🌍 देश के कुल गेहूं निर्यात में MP का 40% दबदबा
भारत से विदेशों में निर्यात होने वाले कुल गेहूं में मध्य प्रदेश अकेले 35 से 40 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है। इसके अलावा देश के कुल गेहूं उत्पादन में भी राज्य का योगदान 18% है।
अपनी प्राकृतिक मिठास के लिए मशहूर यहाँ के 'शरबती' और 'ड्यूरम' (कठिया) गेहूं की डिमांड जर्मनी, अमेरिका, इटली, यूके, दुबई और साउथ अफ्रीका में सबसे ज्यादा है। ब्रेड, बिस्किट और पास्ता बनाने के लिए मध्य प्रदेश के गेहूं को दुनिया में सबसे बेस्ट माना गया है।
📈 20 साल में बदला इतिहास
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सटीक रणनीति और किसानों को समय पर मिली मदद से मध्य प्रदेश ने पारंपरिक गेहूं उत्पादक राज्यों को पछाड़ दिया है।
वर्ष 2004–05: सिर्फ 42 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुआई होती थी।
वर्ष 2026: यह रकबा बढ़कर 96.58 लाख हेक्टेयर हो चुका है।
🔬 क्या है MP के गेहूं में ऐसा खास? (लैब टेस्ट में खुलासा)
भारत सरकार के गेहूं अनुसंधान निदेशालय ने जब MP के गेहूं के 2000 सैंपल्स का टेस्ट किया, तो नतीजे चौंकाने वाले थे। यहाँ के सामान्य गेहूं में भी भरपूर पोषण मिला:
पोषक तत्व मात्रा
औसत प्रोटीन 12.6 प्रतिशत
आयरन (लोहा) 43.6 PPM (पार्ट्स पर मिलियन)
जिंक (जस्ता) 38.2 PPM
कठिया प्रजाति का कमाल: इस गेहूं में प्रोटीन, आयरन, मैंगनीज और जिंक की मात्रा कूट-कूट कर भरी है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसानों को इसके बेहद शानदार दाम मिलते हैं।
🌾 कम पानी में बम्पर पैदावार देने वाली टॉप किस्में:
कम सिंचाई वाली किस्में: जे.डब्ल्यू.एस.17, जे.डब्ल्यू. 3020 और जे.डब्ल्यू. 321 (सिर्फ एक सिंचाई में 35 क्विंटल तक उत्पादन)।
गर्मी झेलने वाली किस्में: जे.डब्ल्यू. 1142, जे.डब्ल्यू. 3288 और जे.डब्ल्यू. 1203 (ज्यादा तापमान में भी बम्पर फसल)।
हाई प्रोटीन किस्में: जे.डब्ल्यू. 1202, जे.डब्ल्यू. 3288 और जे.डब्ल्यू. 1106।
एक्सपोर्ट क्वालिटी किस्में: एमपीआर 1215 और जे.डब्ल्यू. 3211।
🧪 51 स्वदेशी किस्मों का विकास
पौष्टिक आहार बनाने के लिए देश में इस समय जिन 5 मुख्य किस्मों का उपयोग किया जा रहा है, उनमें से 4 अकेले मध्य प्रदेश में विकसित हुई हैं। इनमें एम.पी.ओ. 1215, एम.पी. 3211, एम.पी. 1202 और एम.पी. 4010 शामिल हैं। राज्य में अब तक गेहूं की 51 किस्में विकसित की जा चुकी हैं, जिनमें से 12 किस्में पिछले महज एक दशक में तैयार हुई हैं।
💰 100 लाख मीट्रिक टन खरीदी का लक्ष्य, बोनस भी!
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से इस बार गेहूं खरीदी का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है।
अंतिम तारीख: गेहूं उपार्जन का यह काम 23 मई तक चलेगा।
कीमत: किसानों को ₹2585 प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और राज्य सरकार की तरफ से ₹40 प्रति क्विंटल बोनस मिलाकर कुल ₹2625 प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है।
बीज उत्पादन में भी आत्मनिर्भर हुआ मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश आज देश का सबसे बड़ा प्रामाणिक बीज उत्पादक राज्य बन चुका है। सहकारी क्षेत्र के माध्यम से राज्य बीज उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर है। इस मुहिम से 3 लाख से ज्यादा किसान जुड़े हैं। अब ये किसान कंपनियां सिर्फ बीज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भंडारण, मार्केटिंग और फूड प्रोसेसिंग (खाद्य प्रसंस्करण) के क्षेत्र में भी कदम बढ़ा रही हैं, जिससे किसानों की आय दोगुनी हो रही है।
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