गंजबासौदा/विदिशा: क्या ₹30 लाख की मोटी रकम भी किसी मासूम की जिंदगी से बड़ी हो सकती है? क्या चंद रुपयों की हवस एक हंसती-खेलती बेटी के अरमानों का गला घोंट सकती है? मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के गंजबासौदा से एक ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया था, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया था। लेकिन आज, कानून के हथौड़े की वो गूँज सुनाई दी है जिससे दहेज के लोभियों की रूह कांप उठी है।
खूनी लालच की दास्ताँ: ₹30 लाख भी नहीं बुझा पाए रुपयों की प्यास
तारीख 22 फरवरी 2023 को प्रियंका यादव बड़े सपनों के साथ ग्राम धोबीखेड़ा के विजयपाल यादव के घर वधू बनकर आई थी। प्रियंका के परिवार ने अपनी हैसियत से बढ़कर ₹15 लाख नगद और ₹15 लाख का कीमती सामान (कुल ₹30 लाख) दहेज में दिया था। माता-पिता ने सोचा था कि उनकी लाड़ली राज करेगी, पर उन्हें क्या पता था कि उन्होंने अपनी बेटी को भेड़ियों के बाड़े में धकेल दिया है।
शादी के कुछ ही दिन बाद ससुराल वालों की असली नीयत सामने आ गई। पति विजयपाल, जेठ अजय उर्फ भोला और सास राजकुमारी यादव ने ₹15 लाख की अतिरिक्त मांग शुरू कर दी। मांग पूरी न होने पर प्रियंका को जानवरों की तरह पीटा जाता और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
खौफनाक वारदात: जब प्रताड़ना की सारी हदें पार हो गईं, तो हैवान पति विजयपाल यादव ने प्रियंका को जहर देकर मौत की नींद सुला दिया और एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां उजाड़ दीं।
अदालत का महाफैसला: दोषियों को मिली उनके पापों की सजा
गंजबासौदा के द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि समाज में बेटियों की बलि चढ़ाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। शासकीय अभिभाषक डॉ. अखिलेश लाहौरी की दलीलों और पुख्ता सबूतों के आधार पर कोर्ट ने निम्नलिखित सजा सुनाई:
पति विजयपाल यादव: हत्या का मुख्य दोषी पाते हुए कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अब यह कातिल पूरी जिंदगी जेल की चक्की पीसेगा।
जेठ अजय उर्फ भोला और सास राजकुमारी यादव: दहेज प्रताड़ना और साक्ष्य मिटाने के जुर्म में दोनों को 3-3 साल के सश्रम कारावास (कठिन जेल) की सजा दी गई है।
यह फैसला उन सभी के लिए करारा तमाचा है जो बहू को लक्ष्मी नहीं, बल्कि कमाई का जरिया समझते हैं। आज प्रियंका की आत्मा को शांति और उसके परिवार के आंसुओं को सच्चा इंसाफ मिला है।
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