वसीम कुरेशी रायसेन मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से एक ऐसी सनसनीखेज और खौफनाक वारदात सामने आई है, जिसे जानकर हर कोई सन्न रह गया है। एकतरफा प्यार का पागलपन इंसान को किस हद तक अंधा बना सकता है, इसकी बानगी सांची थाना क्षेत्र में देखने को मिली। जहाँ प्यार में पागल एक आशिक ने अपनी माशूक के पति को रास्ते से हटाने की साजिश रची, लेकिन किस्मत और अंधेरे के खेल में निशाना चुक गया और मौत किसी और के हिस्से आ गई। सांची पुलिस ने मात्र 48 घंटे के भीतर इस अंधे कत्ल का ऐसा पर्दाफाश किया है कि अपराधियों के होश उड़ गए हैं।
क्या है खौफनाक वारदात की पूरी कहानी?
घटना 25 जुलाई 2026 की रात लगभग 09:40 बजे की है। सलामतपुर चौराहा स्थित अपनी हार्डवेयर दुकान को बंद कर व्यापारी राकेश लोधी अपने भाई बबलेश लोधी के साथ मोटरसाइकिल से अपने पैतृक गांव मेड़की लौट रहे थे। रास्ते में घात लगाए बैठे अज्ञात हमलावरों ने अचानक उनकी मोटरसाइकिल को रोका और बिना कुछ कहे धारदार तलवार से राकेश लोधी पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। इस खौफनाक हमले में राकेश गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े और मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई, जबकि हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। इस सनसनीखेज वारदात से पूरे इलाके में दहशत का माहौल फैल गया। थाना सांची में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर पुलिस ने युद्धस्तर पर जांच शुरू की।
पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई और खुलासे का राज
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपक नायक के मार्गदर्शन और एसडीओपी प्रतिभा शर्मा के नेतृत्व में तत्काल तीन थाना क्षेत्रों की एक संयुक्त विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने घटनास्थल का कोना-कोना खंगाला, मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया और तकनीकी साक्ष्यों तथा सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच की। तकनीकी इनपुट और पुख्ता मुखबिर सूचना के आधार पर पुलिस ने संदेहियों—गोलू उर्फ धीरेंद्र पाल (निवासी करोद, भोपाल), बाबू उर्फ प्रिंसराज (निवासी करोद, भोपाल) तथा एक विधि विरुद्ध बालक को अपनी गिरफ्त में ले लिया।
एकतरफा प्यार और पहचान की जानलेवा भूल
जब पुलिस ने आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की, तो परत-दर-परत एक बेहद चौंकाने वाला और फिल्मी कहानी से भी खतरनाक सच सामने आया। मुख्य आरोपी गोलू उर्फ धीरेंद्र पाल मृतक के दूसरे भाई भगवानदास लोधी की पत्नी के प्रति एकतरफा आकर्षण और जुनून की हद तक पागल था। महिला का विवाह भगवानदास लोधी से होने के बाद आरोपी के मन में भगवानदास के प्रति गहरी रंजिश सुलगने लगी। उसने भगवानदास को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रची।
लेकिन वारदात की रात किस्मत ने एक खौफनाक खेल खेला। आरोपियों ने अंधेरे में पहचान की गंभीर भूल कर दी। वे निशाना भगवानदास को बनाने आए थे, लेकिन गफलत और अंधेरे के कारण उन्होंने भगवानदास की जगह उसके भाई राकेश लोधी पर तलवार से हमला कर दिया। इस तरह एकतरफा प्यार के जुनून और गलत पहचान के फेर में एक निर्दोष हार्डवेयर व्यापारी की जान चली गई। पुलिस की इस तत्परता ने साबित कर दिया कि शातिर से शातिर अपराधी भी कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकते।
गिरफ्तार आरोपी और पुलिस टीम की पीठ थपथपाने वाली भूमिका
पुलिस ने इस ब्लाइंड मर्डर केस में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी गोलू उर्फ धीरेंद्र पाल (पिता नारायण पाल, उम्र 25 वर्ष, निवासी बृज कॉलोनी करोद, थाना निशातपुरा, भोपाल), बाबू उर्फ प्रिंसराज (पिता राम नगीना गौड़, उम्र 25 वर्ष, निवासी बृज कॉलोनी करोद, थाना निशातपुरा, भोपाल) और एक विधि विरुद्ध बालक को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में शामिल अन्य फरार आरोपियों की तलाश सरगर्मी से जारी है।
इस अंधे कत्ल के सफल खुलासे में एसडीओपी प्रतिभा शर्मा, थाना प्रभारी सांची निरीक्षक राम बिलोचना शर्मा, थाना प्रभारी सलामतपुर निरीक्षक श्यामराज सिंह, उपनिरीक्षक आनंदीलाल सूर्यवंशी, सहायक उपनिरीक्षक सुरेंद्र सिंह (साइबर सेल), तथा थाना प्रभारी उमरावगंज उपनिरीक्षक वीरेंद्र विश्वकर्मा, उपनिरीक्षक शैलेंद्र दायमा, उपनिरीक्षक सुनील शर्मा, सहायक उपनिरीक्षक चंद्रपाल सिंह, सहायक उपनिरीक्षक सतीश जालवान सहित पूरी पुलिस टीम की भूमिका बेहद सराहनीय और काबिले तारीफ रही।
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