विदिशा भारती डेस्क
पठारी। बुंदेलखंडी सुरों की जादूगरी, ढोलक की गूंजती थाप और हजारों की तादाद में झूमते संगीत प्रेमी—विदिशा जिले के पठारी में आयोजित बुंदेली सांस्कृतिक निशा का नजारा कुछ ऐसा ही रोमांचक रहा। मौका था बड़ी माता मंदिर प्रांगण में जय अंबे नव दुर्गा उत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का। मंच पर जैसे ही बुंदेलखंड के लोकगायक जित्तू खरे बादल और उनकी टीम माइक पर पहुंची, पूरा पठारी भक्ति और सुरमयी लोकधुनों के सागर में गोते लगाने लगा।
शाम ढलते ही शुरू हुआ यह जलसा देर रात तक अपनी रंगत बिखेरता रहा। जित्तू खरे के साथ मंच साझा कर रहीं लोकगायिका रामदेवी मासूम, कौशल्या और अनीता ने अपनी सुरीली आवाज से ऐसा शमां बांधा कि मैदान में तिल रखने की जगह नहीं बची। श्रोताओं का उत्साह ऐसा था कि जो जहां खड़ा था, वहीं तालियां और सीटियां बजाकर झूमने पर मजबूर हो गया।
छतों, मुंडेरों और चौराहों पर जमा हुआ हुजूम
कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही मंदिर परिसर खचाखच भर चुका था। देखते ही देखते आयोजन स्थल दर्शकों की भीड़ के आगे बौना साबित होने लगा। मुख्य परिसर में जगह न मिलने के कारण सैकड़ों युवा और बुजुर्ग आसपास के मकानों की छतों, मुंडेरों और छज्जों पर जा चढ़े। दूर-दराज के गांवों से आए संगीत रसिक सड़क किनारे और चौराहों पर खड़े होकर मंच से आ रही आवाजों पर थिरकते रहे।
बड़ी माता मंदिर और पठार वाले हनुमान मंदिर का पूरा इलाका रोशनी और भक्ति गीतों से जगमगा रहा था। जित्तू खरे बादल ने शुरुआत पारंपरिक देवी वंदना और भजनों से की। इसके बाद जैसे ही उन्होंने बुंदेली लोकगीतों और राइयों के सुर छेड़े, पूरा पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
भजनों से लेकर बुंदेली सुरों का शानदार मुकाबला
मंच पर जित्तू खरे और रामदेवी मासूम के बीच सवालों-जवाबों वाली नोकझोंक और लोकधुनों की जुगलबंदी ने समां बांध दिया। कौशल्या और अनीता ने अपनी खनकती गायकी से लोकगीतों के ठेठ देसी अंदाज को जीवंत कर दिया।
ढोलक की तेज थाप, मंजीरे की झंकार और हारमोनियम की तान पर जब कलाकारों ने बुंदेलखंडी संस्कृति के रंग बिखेरे, तो दर्शक दीर्घा में बैठे लोग खुद को रोक नहीं सके। महिलाओं से लेकर युवाओं तक, सभी इन तरानों पर झूमते नजर आए। आधी रात बीत जाने के बाद भी लोगों की दीवानगी कम नहीं हुई और हर कोई अगली प्रस्तुति का बेसब्री से इंतजार करता दिखा।
भारी भीड़ से गलियां हुईं जाम, खाकी को करनी पड़ी कड़ी मशक्कत
जित्तू खरे की लोकप्रियता का असर कार्यक्रम स्थल के बाहर भी साफ दिखाई दिया। आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में दोपहिया और चारपहिया वाहन पठारी पहुंच गए। समिति द्वारा की गई पार्किंग व्यवस्था वाहनों की भारी संख्या के आगे कम पड़ गई।
मंदिर की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों और संपर्क गलियों में वाहनों की कतारें लग जाने से जाम की स्थिति बन गई। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस बल पूरी मुस्तैदी के साथ मैदान में उतरा। पुलिस जवानों ने भीड़ को नियंत्रित करने, वाहनों को व्यवस्थित दिशा देने और आवागमन सुचारू बनाए रखने के लिए कड़ी मशक्कत की। पुलिस की चौकसी और प्रशासनिक सूझबूझ से बिना किसी व्यवधान के कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से पूरा हुआ।
संस्कृति और परंपरा का संगम
आयोजन के दौरान जय अंबे नव दुर्गा उत्सव समिति के पदाधिकारियों ने सभी का आभार जताया। इस अवसर पर समिति अध्यक्ष व किसान कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री कप्तान सिंह यादव, हरिनेश यादव, सरपंच अखिलेश पंथी, मनोज रिछारिया सहित समिति के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि लोककला और बुंदेलखंड की माटी की खुशबू को नई पीढ़ी तक पहुंचाना ही इस तरह के आयोजनों का मुख्य उद्देश्य है। जित्तू खरे बादल के इस धमाकेदार शो ने साबित कर दिया कि आधुनिकता के दौर में भी बुंदेली संस्कृति और लोकगीतों का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोलता है।
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