इंदौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को इंदौर की रेसीडेंसी कोठी में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन और शहर के विधायकों के साथ वन-टू-वन बैठक की। मुलाकात के दौरान जनप्रतिनिधियों ने अपने विधानसभा क्षेत्रों के विकास, शहर की समस्याओं और लंबित परियोजनाओं से जुड़े मुद्दे मुख्यमंत्री के सामने रखे। बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा स्कीम-171 को इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) से मुक्त करने, कला संकुल के अधूरे काम और अहिल्या स्मारक की बाधाओं को लेकर रही। विधायक मालिनी गौड़ के साथ मुख्यमंत्री की सबसे लंबी चर्चा होने की बात भी सामने आई।
मुख्यमंत्री लंबे समय बाद इंदौर में रात्रि विश्राम के लिए पहुंचे थे। शुक्रवार रात शहर पहुंचने के बाद उन्होंने विभिन्न गरबा आयोजनों में भाग लिया और कन्या पूजन किया। शनिवार सुबह रेसीडेंसी कोठी में उन्होंने एक-एक कर जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की। इन बैठकों में पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन, विधायक मधु वर्मा, महेंद्र हार्डिया, रमेश मेंदोला और मालिनी गौड़ सहित भाजपा नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा और अन्य नेता मौजूद रहे।
स्कीम-171 पर सीएम का संकेत, दशहरे तक व्यस्तता का दिया हवाला
बैठक में विधायक महेंद्र हार्डिया ने स्कीम-171 को आईडीए से मुक्त करने का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। इस मामले को लेकर लंबे समय से मांग की जा रही है। चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वह दशहरे तक व्यस्त हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे के कारण सरकार की काफी बदनामी हुई है और इंदौर में एक बड़े आयोजन के दौरान इसकी सार्वजनिक घोषणा की जाएगी।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद स्कीम-171 से जुड़े लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। माना जा रहा है कि इसी महीने इस विषय पर आयोजन के लिए समय निर्धारित किया जा सकता है। हालांकि, स्कीम को मुक्त करने के संबंध में अंतिम निर्णय और उसकी औपचारिक घोषणा का इंतजार है।
स्कीम-171 को लेकर करीब 33 वर्षों से चली आ रही लड़ाई का उल्लेख भी चर्चा में रहा। यदि इस संबंध में निर्णय होता है, तो यह प्रभावित लोगों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम साबित हो सकता है।
मालिनी गौड़ से लंबी चर्चा, विकास के मुद्दों पर हुई बात
मुख्यमंत्री की विधायक मालिनी गौड़ के साथ सबसे लंबी चर्चा हुई। बताया गया कि इस दौरान अन्य नेता मौजूद नहीं थे और अधिकारी भी बाहर रहे। बैठक की विषयवस्तु को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा रही।
हाल ही में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की जलसंकट को लेकर आयोजित बैठक में मालिनी गौड़ के शामिल नहीं होने का मुद्दा उठा था। उस समय विजयवर्गीय ने टिप्पणी की थी कि जो विधायक बैठक में नहीं आए, शायद उनके क्षेत्र में जलसंकट नहीं होगा।
इसके अगले दिन मालिनी गौड़ ने कहा था कि बैठकों में जाने से कुछ नहीं होता और समस्याओं की सुनवाई नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा था कि इस स्थिति से सभी को मिलकर मुख्यमंत्री को अवगत कराना चाहिए।
इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री के साथ उनकी लंबी बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, मालिनी गौड़ ने मीडिया से कहा कि सभी लोगों ने मुख्यमंत्री से चर्चा की और विकास से जुड़े मुद्दे रखे। बातचीत में किन विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।
ताई सुमित्रा महाजन बोलीं—मैं नौकरी मांगने आई थी
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन का बैठक के बाद दिया गया हल्के-फुल्के अंदाज वाला बयान भी चर्चा में रहा। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “मैं नौकरी मांगने आई थी।” इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात के वास्तविक उद्देश्य और शहर से जुड़े मुद्दों की जानकारी दी।
सुमित्रा महाजन ने बताया कि इंदौर में कला संकुल का काम रुका हुआ है। स्मार्ट सिटी के पास राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि सरकार इस काम को पूरा कराने की दिशा में कदम उठाए।
उन्होंने अहिल्या स्मारक का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, स्मारक के निर्माण में कुछ अड़चनें आ रही थीं, जिनकी जानकारी मुख्यमंत्री को देने के लिए वह पहुंची थीं। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री को आमंत्रित करने की बात भी कही। इंदौर की राजनीति को लेकर पूछे गए सवाल पर ताई ने कहा कि वह अब राजनीति नहीं करती हैं।
आर्थिक कॉरिडोर और निवेश पर मुख्यमंत्री ने रखी बात
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में निवेश और विकास से जुड़े विषयों पर भी बात की। उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने आर्थिक कॉरिडोर को मंजूरी दी है। इससे नए निवेश आने और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने करीब तीन लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिलने की बात भी कही।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में तीन नए मेट्रोपॉलिटन रीजन विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। सरकार ने रीजनल कॉन्क्लेव की शुरुआत की है और इस मॉडल को दूसरे राज्य भी अपना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आईटी सेक्टर में चल रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित सनातन यात्रा को लेकर सवाल पूछे जाने पर डॉ. मोहन यादव ने कहा, “भगवान सभी का भला करे।”
शहर के लंबित कामों पर टिकी निगाहें
रेसीडेंसी कोठी में हुई इन मुलाकातों में इंदौर के विकास, लंबित परियोजनाओं और स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता मिली। स्कीम-171 को लेकर मुख्यमंत्री के बयान, कला संकुल के काम को पूरा कराने की मांग और अहिल्या स्मारक से जुड़ी बाधाओं पर चर्चा ने बैठक को महत्वपूर्ण बना दिया है।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि स्कीम-171 के संबंध में सरकार कब औपचारिक घोषणा करती है और कला संकुल तथा अहिल्या स्मारक के काम को आगे बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। जनप्रतिनिधियों के साथ हुई इस बैठक से शहर की लंबित परियोजनाओं के समाधान को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं।
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