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जैन साध्वियों की सड़क हादसे में मौत या कोई बड़ी साजिश

25-05-2026  Waseem Qureshi  14 views
जैन साध्वियों की सड़क हादसे में मौत या कोई बड़ी साजिश

सांची। मध्यप्रदेश के रीवा में 20 मई 2026 को घटी हृदयविदारक घटना ने संपूर्ण जैन समाज को झकझोर कर रख दिया है। राष्ट्र संत आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका श्री 105 सातमती माताजी के असामयिक निधन और आर्यिका श्री 105 उपवास मति माताजी के साथ हुई इस दुखद दुर्घटना ने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है।

सांची में सकल जैन समाज ने एकजुट होकर इस मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। समाज का कहना है कि यह केवल एक 'सड़क दुर्घटना' नहीं, बल्कि एक गंभीर साजिश का हिस्सा हो सकती है।

सीसीटीवी फुटेज ने बढ़ाई आशंका: क्या यह सोची-समझी साजिश है?

ज्ञापन सौंपने आए समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध वीडियो क्लिप और तथ्यों के आधार पर इस घटना के पीछे गहरी आशंकाएं जन्म ले रही हैं। रीवा कलेक्टरेट भवन जैसी सुरक्षित जगह के सामने ऐसी घटना होना कई सवाल खड़े करता है।

जैन समाज की प्रमुख मांगें:

SIT या न्यायिक जांच: इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।

डिजिटल साक्ष्यों का संरक्षण: घटना स्थल के आसपास के सभी सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित किया जाए।

कठोर धाराएं: यदि जांच में यह कोई सुनियोजित षड्यंत्र पाया जाता है, तो दोषियों पर हत्या जैसी कठोर धाराओं के तहत कार्रवाई हो।

‘निशस्त्र संतों पर हमला, मानवता पर हमला’

जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी और भाजपा नेता सुनील जैन एवं हिंदू जागरण मंच के जिलाध्यक्ष राजमल जैन ने कहा कि जैन साधु-संत पूर्णतः निहत्थे, अहिंसक और पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं। वे किसी वाहन या सुरक्षा का उपयोग नहीं करते। ऐसे में उन पर लगातार होते हमले और सड़क दुर्घटनाएं शासन-प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती हैं।

राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति की उठी मांग

समाज ने भारत सरकार और राज्य सरकार से 'राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति' बनाने की पुरजोर वकालत की है। ज्ञापन में मांग की गई है कि:

पैदल विहार करने वाले संतों के लिए विशेष SOP (Standard Operating Procedure) बनाई जाए।

संवेदनशील मार्गों और हाईवे पर पुलिस सहयोग व ट्रैफिक नियंत्रण सुनिश्चित हो।

संतों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को 'विशेष संवेदनशील' श्रेणी में रखा जाए, क्योंकि वे अपनी आत्मरक्षा स्वयं नहीं करते।

प्रदर्शन में उमड़ा जनसैलाब

सांची में ज्ञापन सौंपने के दौरान भारी संख्या में लोग मौजूद रहे। इनमें वरिष्ठ बीजेपी शक्ति केंद्र प्रभारी श्री गौरी शंकर जैन, विजय जैन गुड्डू, पदम जैन, कपिल जैन, पार्थ जैन, और शिवसेना जिलाध्यक्ष सूरजमल जैन सहित सैकड़ों युवा शामिल थे। महिला मंडल से रश्मि जैन, निर्मल जैन, रचना जैन और अन्य महिलाओं ने भी अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए इंसाफ की मांग की। वरिष्ठ समाजसेवी अरुण कुमार मिश्रा और भूरा पटेल ने भी समाज की इस जायज मांग का समर्थन किया।

जैन समाज ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे शांति और संवैधानिक मर्यादाओं में विश्वास रखते हैं, लेकिन अपने संतों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर कितनी तेजी से कदम उठाता है।


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