नई दिल्ली/बर्लिन: अगर आप सोने (Gold) को केवल गहनों तक सीमित समझते हैं, तो अपनी सोच बदल लीजिए। आने वाले कुछ साल निवेश की दुनिया में एक बड़ा भूचाल लाने वाले हैं। जर्मनी के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित डॉयचे बैंक (Deutsche Bank) की एक हालिया रिपोर्ट ने पूरी दुनिया के वित्तीय बाजारों में खलबली मचा दी है। बैंक के ताजा विश्लेषण की मानें तो सोना अब सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी 'आर्थिक महाशक्ति' बनने की राह पर है।
8,000 डॉलर के पार जाएगा सोना!
डॉयचे बैंक के विश्लेषणात्मक सिमुलेशन (Analytical Simulation) ने एक ऐसी तस्वीर पेश की है, जिसे सुनकर निवेशकों के कान खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 5 वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें 8,000 डॉलर प्रति औंस के अविश्वसनीय स्तर को छू सकती हैं।
यदि आज की कीमतों से तुलना करें, तो यह लगभग 80 प्रतिशत की भारी उछाल होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जिस रफ्तार से दुनिया के हालात बदल रहे हैं, सोना जल्द ही सुरक्षित निवेश (Safe Haven) का सबसे बड़ा कवच साबित होगा।
क्यों आ रही है सोने में यह 'सुनामी'?
सोने की कीमतों में इस संभावित विस्फोट के पीछे कोई एक कारण नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थशास्त्र का एक बड़ा चक्र है:
डी-डॉलराइजेशन (De-dollarization): दुनिया भर के देश अब अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं। पश्चिमी देशों द्वारा लगाए जाने वाले प्रतिबंधों के डर से अब केंद्रीय बैंक डॉलर के बजाय सोने पर भरोसा जता रहे हैं।
डॉलर की घटती साख: साल 2000 में वैश्विक रिजर्व में डॉलर की हिस्सेदारी 60% से ज्यादा थी, जो अब सिमटकर मात्र 40% रह गई है।
केंद्रीय बैंकों की 'सोना भूख': 2008 के वित्तीय संकट के बाद से दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने अपने पोर्टफोलियो में 22.5 करोड़ औंस से अधिक सोना जोड़ा है। डॉयचे बैंक का अनुमान है कि भविष्य में वैश्विक रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी 30% से बढ़कर 40% तक पहुँच सकती है।
अब सिर्फ भारत-चीन ही नहीं, ये देश भी हैं रेस में शामिल
एक समय था जब सोने की खरीदारी में भारत और चीन का दबदबा था। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। कतर, सऊदी अरब, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे खाड़ी देश भी अब अपने खजाने को सोने से भर रहे हैं। ये देश अपनी अर्थव्यवस्था को केवल तेल और डॉलर के भरोसे नहीं छोड़ना चाहते, इसलिए वे आक्रामक तरीके से सोने की जमाखोरी कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय: "वैश्विक वित्तीय ढांचा इस समय बिखराव के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में 'पीली धातु' (Yellow Metal) सबसे बड़े लाभार्थी के रूप में उभर रही है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का सर्वे भी इसकी पुष्टि करता है।"
क्या यह निवेश का सही समय है?
हालांकि डॉयचे बैंक ने इसे एक 'वैचारिक विश्लेषण' (Conceptual Analysis) बताया है और इसे आधिकारिक पूर्वानुमान नहीं माना है, लेकिन बाजार के संकेत साफ हैं। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अस्थिरता के बीच सोना एक ऐसी संपत्ति है जो कभी शून्य नहीं होती।
अगर आप भी निवेश की योजना बना रहे हैं, तो यह रिपोर्ट आपके लिए एक 'वेक-अप कॉल' हो सकती है। क्योंकि अगर डॉयचे बैंक का यह सिमुलेशन हकीकत में बदला, तो सोना खरीदना आम आदमी के लिए एक सपना बन सकता है।
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