राजगढ़: आखिरकार राजगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचाने वाली पत्रकारों की भूख हड़ताल का सुखद अंत हो गया है। नरसिंहगढ़ नगर पालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार और फर्जी कर्मचारियों की नियुक्ति के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले पत्रकार मुकेश अहिरवार और उनके साथी पत्रकारों ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। यह फैसला कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में आए संयुक्त कलेक्टर वीरेंद्र दांगी द्वारा दिए गए ठोस आश्वासन के बाद लिया गया।
क्या है पूरा मामला?
पिछले कई दिनों से राजगढ़ कलेक्टर कार्यालय के सामने पत्रकार मुकेश अहिरवार के नेतृत्व में एक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल चल रही थी। मांग स्पष्ट थी—नरसिंहगढ़ नगर पालिका में फैले भ्रष्टाचार की परतें खोलना। आरोप है कि नगर पालिका में न केवल फर्जी तरीके से कर्मचारी भर्ती किए गए हैं, बल्कि कई ऐसे लोग भी सरकारी खजाने से वेतन उठा रहे हैं, जो कभी दफ्तर का मुंह तक नहीं देखते।
इन 'घर बैठे वेतनभोगी' कर्मचारियों और उनकी नियुक्ति करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पत्रकार सड़क पर उतर आए थे।
प्रशासन का 'बैकफुट' पर आना
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजगढ़ कलेक्टर ने संयुक्त कलेक्टर वीरेंद्र दांगी को वार्ता के लिए भेजा। लंबी चर्चा के बाद, प्रशासन ने पत्रकारों की मांगों को जायज ठहराते हुए एक महत्वपूर्ण आश्वासन दिया है।
संयुक्त कलेक्टर वीरेंद्र दांगी ने स्पष्ट किया कि संभागीय कमिश्नर के आदेशों को सर्वोपरि रखते हुए, नरसिंहगढ़ नगर पालिका में हुई अनियमितताओं की जांच की जाएगी। उन्होंने वादा किया है कि:
फर्जी तरीके से भर्ती किए गए कर्मचारियों की सूची की गहन जांच होगी।
घर बैठे वेतन लेने वालों पर नकेल कसी जाएगी।
भ्रष्टाचार में लिप्त जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
'चेतावनी' के साथ खत्म हुआ अनशन
प्रशासन के आश्वासन पर भूख हड़ताल भले ही समाप्त कर दी गई हो, लेकिन पत्रकार मुकेश अहिरवार ने सख्त लहजे में स्पष्ट कर दिया है कि यह 'पूर्ण विराम' नहीं, बल्कि 'अल्पविराम' है। उन्होंने कहा, “हमने प्रशासन पर भरोसा जताते हुए अपना अनशन समाप्त किया है। यदि तय समय सीमा के भीतर दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो हम फिर से कलेक्टर कार्यालय के सामने उसी तेवर के साथ भूख हड़ताल करने के लिए स्वतंत्र होंगे। भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी कलम और हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक न्याय नहीं मिल जाता।”
भ्रष्टाचार पर करारी चोट की तैयारी
राजगढ़ के जागरूक पत्रकारों द्वारा छेड़ा गया यह आंदोलन इस बात का प्रमाण है कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ अभी भी पूरी मजबूती से खड़ा है। अब सबकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या वाकई भ्रष्ट अधिकारियों पर गाज गिरेगी या यह आश्वासन केवल खानापूर्ति बनकर रह जाएगा?
राजगढ़ की जनता अब इस पूरे मामले में प्रशासन के अगले कदम का बेसब्री से इंतजार कर रही है।
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