नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। विजय माल्या, नीरव मोदी और महादेव सट्टा ऐप जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों में भ्रष्टाचारियों की नींद उड़ाने वाले तेज-तर्रार अधिकारी सत्यब्रत कुमार ने सरकारी सेवा को अलविदा कह दिया है। 2004 बैच के IRS अधिकारी सत्यब्रत कुमार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है, जिसे केंद्र सरकार ने हरी झंडी दे दी है।
हैरानी की बात यह है कि अभी उनकी सरकारी सेवा के 11 साल बाकी थे, लेकिन उन्होंने पावर और रसूख वाली कुर्सी छोड़कर व्यक्तिगत रास्तों पर चलने का फैसला किया है।
भ्रष्टाचारियों के लिए 'काल' बने थे सत्यब्रत
सत्यब्रत कुमार का नाम सुनते ही बड़े-बड़े भगोड़ों के पसीने छूट जाते थे। ED में करीब 12 साल का लंबा कार्यकाल बिताने वाले कुमार ने एजेंसी में प्रतिनियुक्ति (Deputation) के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। उनके कार्यकाल की कुछ बड़ी उपलब्धियां इस प्रकार हैं:
नीरव मोदी-मेहुल चोकसी केस: PNB घोटाले में 2 बिलियन डॉलर की धोखाधड़ी मामले में उन्होंने विदेशों में छिपी संपत्तियों को कुर्क करने में मुख्य भूमिका निभाई।
विजय माल्या केस: किंगफिशर के मालिक को कानून के शिकंजे में कसने के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया था।
महादेव बेटिंग ऐप: छत्तीसगढ़ के बड़े राजनेताओं और व्यापारियों के सिंडिकेट का पर्दाफाश करने वाली जांच टीम का नेतृत्व सत्यब्रत कुमार ने ही किया था।
क्यों चौंका रहा है यह इस्तीफा?
सरकारी महकमे में चर्चा है कि आखिर एक साल के भीतर ED से जुड़े दूसरे बड़े अधिकारी ने इस्तीफा क्यों दिया? जुलाई 2025 में पूर्व संयुक्त निदेशक कपिल राज ने भी अपनी रिटायरमेंट से 15 साल पहले इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था। कपिल राज वही अफसर थे जिन्होंने हेमंत सोरेन और अरविंद केजरीवाल जैसे दिग्गजों से जुड़े मामलों की जांच की थी।
अब सत्यब्रत कुमार का जाना, जो वर्तमान में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में कमिश्नर (अपील) के पद पर तैनात थे, कई सवाल खड़े कर रहा है।
“48 साल की उम्र, 2037 तक का कार्यकाल और हाथ में पावर... फिर भी VRS? यह फैसला ब्यूरोक्रेसी में चर्चा का विषय बना हुआ है।”
2037 में होना था रिटायरमेंट
सत्यब्रत कुमार अगर सेवा में बने रहते तो वे साल 2037 में 60 वर्ष की आयु पूरी कर रिटायर होते। सूत्रों का कहना है कि उन्होंने अप्रैल में ही VRS के लिए आवेदन दे दिया था। उनके इस कदम के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या वे भी कपिल राज की तरह किसी प्राइवेट सेक्टर या बड़े लीगल कंसल्टेंसी रोल में नजर आएंगे?
जांच एजेंसियों पर असर?
लगातार दो बड़े और अनुभवी जांच अधिकारियों का सिस्टम से बाहर जाना ED जैसी महत्वपूर्ण एजेंसी के लिए एक बड़ा बदलाव है। सत्यब्रत कुमार ने न केवल केस सुलझाए, बल्कि डिजिटल और इंटरनेशनल मनी लॉन्ड्रिंग ट्रेल को पकड़ने की एक नई कार्यशैली भी विकसित की थी।
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