पठारी। बालाजी धाम बड़ोह में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन बुधवार को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। जैसे ही कथा वाचक पंडित दिवाकर कृष्ण आचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग सुनाया, कथा स्थल का वातावरण भक्तिमय हो गया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की घोषणा होते ही श्रद्धालुओं में उत्साह की लहर दौड़ गई और पूरा पंडाल नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की जैसे जयकारों से गूंज उठा।
कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर कथा स्थल को आकर्षक रूप से फूलों से सजाया गया था। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा के दौरान पुष्प वर्षा की गई। श्रद्धालु भक्ति में झूमते और नाचते नजर आए। महिलाओं ने वृंदावन से आए संगीतकारों के भजनों पर भक्तिभाव से नृत्य किया। कथा स्थल पर बनाए गए कृष्ण जन्म से जुड़े दृश्य और झांकी ने श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
कन्हैया को पालकी में लेकर गोकुल जाने की झांकी ने मोहा मन
कृष्ण जन्म प्रसंग के दौरान भगवान श्रीकृष्ण को पालकी में लेकर गोकुल की ओर जाने की जीवंत झांकी प्रस्तुत की गई। झांकी के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। पंडाल में मौजूद भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए और जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं। आयोजन के दौरान बाल स्वरूप में सजे कन्हैया ने भी श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
इच्छा ही दुखों का प्रमुख कारण : पंडित दिवाकर कृष्ण आचार्य
कथा वाचक पंडित दिवाकर कृष्ण आचार्य ने कथा के दौरान भगवान शिव के त्याग और वैराग्य स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा कि त्याग और वैराग्य के आचरण से मनुष्य को संतोष की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य की इच्छाएं ही उसके दुखों का प्रमुख कारण बनती हैं। जीवन में संतोष और धार्मिक आचरण अपनाकर व्यक्ति मानसिक शांति प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने कहा कि देश और समाज में बढ़ रही अशांति, अधर्म और असंतोष का समाधान धार्मिक ग्रंथों में बताए गए मार्ग पर चलने से संभव है। मानव जीवन का उद्देश्य भगवान के चरणों में प्रेम, संत-महात्माओं की सेवा, गौ सेवा, अतिथि सेवा और सत्कर्मों को अपने जीवन का हिस्सा बनाना होना चाहिए।
भगवान के अवतारों का किया वर्णन
पंडित दिवाकर कृष्ण आचार्य ने श्रीमद्भागवत कथा के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से भगवान के अवतारों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब धरती पर पाप और अधर्म बढ़ जाता है, तब भगवान धर्म और पृथ्वी की रक्षा के लिए विभिन्न रूपों में अवतार लेते हैं।
उन्होंने भगवान विष्णु के वामन अवतार का प्रसंग सुनाते हुए राजा बलि पर भगवान की कृपा का वर्णन किया। इसके साथ ही श्रीराम अवतार का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने जीवन के माध्यम से समाज को मर्यादा, कर्तव्य और आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा दी। उन्होंने रावण के उद्धार और भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा की कारागार में जन्म लेने के प्रसंग को भी विस्तार से बताया।
शरण में आए शत्रु को क्षमा करना चाहिए
कथा के दौरान पंडित दिवाकर कृष्ण आचार्य ने कहा कि यदि कोई शत्रु भी शरण में आ जाए तो उसे क्षमा कर देना चाहिए। उन्होंने क्षमा को भारतीय संस्कृति और धर्म की महत्वपूर्ण भावना बताते हुए कहा कि मनुष्य को वैर की भावना से ऊपर उठकर धर्म और मानवता के मार्ग पर चलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राजनीति में भी सेवा भाव होना चाहिए। समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना के साथ कार्य करना ही सार्वजनिक जीवन की सार्थकता है।
श्रीमद्भागवत में वेद-उपनिषदों का सार
पंडित आचार्य ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा में वेदों और उपनिषदों का सार समाहित है। उन्होंने राजा परीक्षित और सुखदेव महाराज के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि सुखदेव महाराज ने राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत कथा सुनाई थी। भागवत कथा केवल धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक मार्गदर्शन भी है।
फूल मालाओं से हुआ कथा वाचक का स्वागत
कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर बालाजी धाम के महंत विष्णु दास महाराज, बालाजी धाम के युवराज रसिक जी महाराज, कथा के मुख्य यजमान किरण चंद्र मोहन पटसरिया, उप यजमान कुसुम सुमेर सिंह यादव सहित जितेंद्र सिंह ठाकुर, कार्तिक शर्मा, गुमान सिंह कुशवाहा, बृजेश केवट एवं बालाजी धाम के सेवकों ने कथा वाचक पंडित दिवाकर कृष्ण आचार्य का फूल मालाओं से स्वागत किया।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के साथ पूरा कथा पंडाल देर तक भक्ति, भजनों और जयकारों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने कृष्ण जन्मोत्सव के इस धार्मिक आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
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