सांची। रायसेन जिले के सांची क्षेत्र में शासकीय प्राथमिक विद्यालय के मर्जर को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों ने विरोध जताया है। कमापार सांची स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय को सांची के सांदीपनि विद्यालय में मर्ज किए जाने के आदेश के बाद ग्रामीणों ने मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। ग्रामीणों ने अपर कलेक्टर मनोज उपाध्याय को आवेदन सौंपते हुए स्कूल को गांव में ही यथावत संचालित रखने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि कमापार में प्राथमिक स्कूल संचालित होने से छोटे बच्चों को गांव से बाहर नहीं जाना पड़ता। स्कूल मर्ज होने के बाद बच्चों को करीब तीन किलोमीटर दूर सांदीपनि विद्यालय जाना पड़ेगा। ग्रामीणों ने रास्ते में रेलवे लाइन, रेलवे क्रॉसिंग और मुख्य मार्ग होने का हवाला देते हुए छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
गांव में स्कूल होने से छोटे बच्चों को सुविधा
ग्रामीणों विनोद पाल, संजू पाल, फूल सिंह और संजय पटेल सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने प्रशासन को दिए आवेदन में अपनी परेशानी बताई। ग्रामीणों के अनुसार गांव में ही प्राथमिक विद्यालय होने से छोटे बच्चों को आसानी से शिक्षा मिल रही है।
अभिभावकों का कहना है कि प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चे कम उम्र के होते हैं। ऐसे बच्चों को रोजाना कई किलोमीटर दूर स्कूल भेजना आसान नहीं है। यदि विद्यालय को सांची के सांदीपनि विद्यालय में मर्ज कर दिया जाता है तो बच्चों को रोज घर से स्कूल और स्कूल से घर तक आने-जाने की समस्या का सामना करना पड़ेगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि स्कूल मर्जर का निर्णय लेने से पहले बच्चों की उम्र, स्कूल की दूरी और आवागमन की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए।
तीन किलोमीटर दूर है सांदीपनि विद्यालय
ग्रामीणों के मुताबिक सांदीपनि विद्यालय कमापार गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर प्रमुख सांची-विदिशा मार्ग पर स्थित है। यह मार्ग आगे विदिशा-भोपाल मुख्य मार्ग से जुड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि मुख्य मार्ग पर स्थित विद्यालय तक छोटे बच्चों को अकेले भेजना अभिभावकों के लिए चिंता का विषय है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें रोजाना स्कूल छोड़ने और छुट्टी के बाद वापस लाने की जिम्मेदारी अभिभावकों को उठानी पड़ेगी।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में स्कूल रहने पर बच्चे स्थानीय स्तर पर पढ़ाई कर सकते हैं, जबकि स्कूल दूर होने की स्थिति में परिवारों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ जाएगी।
रेलवे लाइन और क्रॉसिंग को लेकर चिंता
जनसुनवाई में दिए आवेदन में ग्रामीणों ने कमापार से विदिशा और भोपाल की ओर जाने वाली रेलवे लाइनों का भी उल्लेख किया है। ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में रेलवे की तीन पटरियां हैं और स्कूल जाने वाले रास्ते में रेलवे क्रॉसिंग भी पड़ती है।
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि छोटे बच्चों के रोजाना इस मार्ग से आने-जाने पर उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहेगी। उन्होंने तेज गति से गुजरने वाली ट्रेनों का भी उल्लेख किया और प्रशासन से बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की।
ग्रामीणों द्वारा रेलवे लाइन और संभावित हादसों को लेकर जताई गई आशंकाओं का स्वतंत्र सत्यापन इस आवेदन में उपलब्ध नहीं है, लेकिन अभिभावकों ने इसे स्कूल मर्जर के विरोध का प्रमुख कारण बताया है।
मजदूर अभिभावकों के सामने बड़ी परेशानी
ग्रामीणों ने स्कूल की दूरी के साथ-साथ परिवारों की आर्थिक स्थिति का मुद्दा भी उठाया है। आवेदन में बताया गया है कि कमापार गांव के अधिकांश अभिभावक मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं।
कई मजदूर सुबह जल्दी काम की तलाश में घर से निकल जाते हैं और शाम को वापस लौटते हैं। ऐसे में यदि बच्चों को तीन किलोमीटर दूर स्कूल जाना पड़ेगा तो अभिभावकों को रोजाना बच्चों को स्कूल छोड़ने और छुट्टी के बाद वापस लाने के लिए समय निकालना पड़ेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि मजदूरी करने वाले परिवारों के लिए यह अतिरिक्त जिम्मेदारी मुश्किल पैदा कर सकती है। यदि अभिभावक बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेने जाएं तो उनके काम पर असर पड़ सकता है और इससे परिवार की रोजाना की आय भी प्रभावित होने की आशंका है।
जनसुनवाई में ग्रामीणों ने सौंपा आवेदन
स्कूल मर्जर के विरोध में ग्रामीण मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचे। उन्होंने अपर कलेक्टर मनोज उपाध्याय को आवेदन देकर अपनी मांग रखी। ग्रामीणों ने प्रशासन से स्कूल को कमापार में ही संचालित रखने का आग्रह किया।
ग्रामीणों के अनुसार उनकी मांग किसी राजनीतिक विवाद से जुड़ी नहीं है, बल्कि छोटे बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा तथा मजदूर परिवारों की व्यावहारिक कठिनाइयों से संबंधित है। उनका कहना है कि गांव में प्राथमिक स्कूल रहने से बच्चों की पढ़ाई जारी रहेगी और अभिभावक अपने रोजगार के लिए नियमित रूप से मजदूरी पर जा सकेंगे।
ग्रामीण बोले- गांव में ही हो बच्चों की पढ़ाई
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि कमापार के शासकीय प्राथमिक विद्यालय को सांदीपनि विद्यालय में मर्ज करने की प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि गांव में ही स्कूल संचालित रहने से बच्चों को स्थानीय स्तर पर शिक्षा मिलती रहेगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने यह भी कहा कि स्कूल को दूर स्थान पर स्थानांतरित करने से पहले बच्चों के आवागमन की सुरक्षित व्यवस्था और अभिभावकों की आर्थिक परिस्थितियों पर विचार किया जाना चाहिए।
अब ग्रामीणों की मांग पर जिला प्रशासन क्या निर्णय लेता है, इस पर उनकी नजर है। फिलहाल ग्रामीणों ने स्कूल को यथावत रखने की मांग करते हुए जनसुनवाई में अपना आवेदन सौंप दिया है। स्कूल मर्जर का मामला अब प्रशासन के विचाराधीन है और ग्रामीणों को उम्मीद है कि बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा की सुविधा और मजदूर परिवारों की परिस्थितियों को देखते हुए इस पर पुनर्विचार किया जाएगा।
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