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बालाजी धाम बडोह में चल रही भागवत कथा

29-09-2026  Vidisha Bharti Desk  43 views
बालाजी धाम बडोह में चल रही भागवत कथा

पठारी। बालाजी धाम बडोह में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा स्थल भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। कथा वाचक पंडित दिवाकर कृष्ण आचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन धारण प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भगवान की भक्ति, शरणागति और विश्वास का संदेश दिया। कथा के दौरान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन सुनकर बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

भगवान की शरण में आने से दूर होते हैं संकट

कथा वाचक पंडित दिवाकर कृष्ण आचार्य ने गिरिराज धारण प्रसंग की व्याख्या करते हुए कहा कि जब मनुष्य पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान की शरण में आ जाता है, तो उसके जीवन के संकटों का प्रभाव कम होने लगता है। उन्होंने कहा कि भगवान के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य प्रदान करता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि जीवन में कितनी भी विपरीत परिस्थितियां क्यों न आएं, भगवान की भक्ति और उनके प्रति विश्वास को नहीं छोड़ना चाहिए। भगवान की शरण में आने वाले भक्त के लिए कठिन से कठिन परिस्थिति भी आसान हो जाती है। कथा के इस संदेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।

श्रीकृष्ण ने कनिष्ठा अंगुली पर उठाया गोवर्धन पर्वत

पंडित दिवाकर कृष्ण आचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत धारण करने की कथा सुनाते हुए बताया कि जब ब्रजवासियों पर संकट आया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा अंगुली पर विशाल गोवर्धन पर्वत को धारण कर लिया। भगवान ने ब्रजवासियों को पर्वत के नीचे सुरक्षित स्थान प्रदान किया और सभी ब्रजवासी उनकी शरण में आ गए।

कथा वाचक ने प्रसंग को विस्तार से बताते हुए कहा कि ब्रजवासियों ने सात दिन और सात रात तक भगवान श्रीकृष्ण के सानिध्य में रहकर उनकी भक्ति की। इस दौरान उन्हें भूख, प्यास और विश्राम जैसी दैनिक आवश्यकताओं का भी भान नहीं रहा। सभी भक्त लगातार भगवान के दर्शन करते रहे और उनकी मनोहारी छवि का आनंद लेते रहे।

सात दिन तक भक्ति में डूबे रहे ब्रजवासी

गोवर्धन धारण की कथा सुनाते हुए पंडित आचार्य ने बताया कि ब्रजवासियों के लिए वह समय भगवान की भक्ति और दर्शन में पूरी तरह डूब जाने का अवसर बन गया। कथा में वर्णित इस प्रसंग ने बालाजी धाम बडोह में मौजूद श्रद्धालुओं को भी भावविभोर कर दिया।

उन्होंने बताया कि सात दिन और सात रात तक भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा की। इस दौरान न किसी को भूख-प्यास की चिंता रही और न ही अन्य सांसारिक आवश्यकताओं का ध्यान रहा। भक्तों का पूरा मन भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन और उनकी लीलाओं में रम गया।

गिरिराज पर्वत नीचे रखते ही लगा छप्पन भोग

कथा वाचक ने बताया कि आठवें दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को नीचे रख दिया। इसके बाद ब्रजवासियों ने भगवान को सात दिनों के अनुसार 56 प्रकार के भोग अर्पित किए। इसी प्रसंग को भगवान श्रीकृष्ण के छप्पन भोग से जोड़कर देखा जाता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि भगवान के प्रति प्रेम, श्रद्धा और कृतज्ञता की भावना से जुड़ी यह परंपरा आज भी धार्मिक आयोजनों में विशेष महत्व रखती है। छप्पन भोग केवल विभिन्न व्यंजनों का भोग नहीं, बल्कि भगवान के प्रति भक्तों की श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

कथा स्थल पर बना भक्तिमय माहौल

गिरिराज धारण प्रसंग के दौरान कथा स्थल पर भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन सुनते हुए श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा।

कथा वाचक ने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि मनुष्य को अपने जीवन में अहंकार छोड़कर भगवान की शरण और भक्ति को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान की कथा केवल सुनने का विषय नहीं है, बल्कि उसके संदेश को अपने जीवन में उतारना भी आवश्यक है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं मनुष्य को प्रेम, विश्वास, समर्पण और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।

श्रद्धालुओं की रही बड़ी मौजूदगी

सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा को लेकर बालाजी धाम बडोह में श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है। चौथे दिन भी कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और पूरे मनोयोग से कथा का श्रवण किया। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का आनंद लिया और धार्मिक वातावरण में भक्ति भाव के साथ समय बिताया।

कार्यक्रम में बालाजी धाम के समस्त सेवक एवं श्रद्धालु मौजूद रहे। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए और कथा वाचक पंडित दिवाकर कृष्ण आचार्य के मुखारविंद से भागवत कथा का श्रवण किया।

बालाजी धाम बडोह में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के आगामी दिनों में भी भगवान की विभिन्न लीलाओं और धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। कथा को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग कथा स्थल पहुंचकर धार्मिक आयोजन का लाभ ले रहे हैं।


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