मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। भोपाल, विदिशा और आसपास के जिलों में पिछले कई हफ्तों से झमाझम बारिश नहीं हुई है। वर्षा की लंबी खेंच के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात पैदा हो चुके हैं। किसानों को सोयाबीन और धान की फसलों की सुरक्षा की चिंता सता रही है। जल स्रोतों का जलस्तर लगातार नीचे गिर रहा है। इस बीच मौसम विभाग ने एक बड़ी चेतावनी जारी की है। नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो गया है। इस सक्रिय मौसमी तंत्र के प्रभाव से प्रदेशभर में बारिश का नया दौर शुरू होने जा रहा है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आगामी तीन दिन बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। भोपाल, विदिशा, रायसेन, सागर और नर्मदापुरम संभाग के जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। हवाओं का रुख बदलने से वातावरण में नमी की मात्रा तेजी से बढ़ रही है। यह नमी बादलों का घनत्व बढ़ा रही है। अगले बहत्तर घंटों में तेज बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है। यह बदलाव लंबे समय से सूखे की मार झेल रहे ग्रामीण इलाकों को बड़ी राहत प्रदान करेगा।
इस मानसून सीजन के दौरान प्रदेशभर में बारिश का आंकड़ा संतोषजनक नहीं रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार सामान्य स्तर से सोलह प्रतिशत कम पानी बरसा है। पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश दोनों हिस्से इस मानसूनी कमी का सामना कर रहे हैं। रीवा, शहडोल, सागर और जबलपुर संभाग में स्थिति सबसे अधिक गंभीर बनी हुई है। इन क्षेत्रों में सामान्य से बीस प्रतिशत तक कम वर्षा दर्ज की गई है। भोपाल और विदिशा संभाग में भी ग्यारह प्रतिशत पानी का अंतर आ चुका है। किसान बादलों की आवाजाही पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। खेतों की मिट्टी सूखने से फसलों की बढ़वार रुक गई थी।
नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस इस सूखे की स्थिति को पलटने में मददगार साबित होगा। हवा का यह चक्रवाती सिस्टम पर्याप्त मात्रा में नमी खींच रहा है। नमी मिलने से बादलों का विस्तार हो रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक छह अगस्त से बारिश की गतिविधियां व्यापक रूप से तेज हो चुकी हैं। कई जिलों में मूसलाधार बारिश दर्ज की जा रही है। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं।
विदिशा और आसपास के ग्रामीण अंचलों में इस मानसूनी बारिश की सख्त आवश्यकता थी। सोयाबीन, धान और मक्का जैसी खरीफ फसलों को इस पानी से नया जीवन मिलेगा। सूखे जैसे संकट से जूझ रहे अन्नदाताओं को इससे बड़ा संबल प्राप्त होगा। क्षेत्र के कुओं, तालाबों और छोटे बांधों का जलस्तर भी इस बारिश से ऊपर उठेगा। भूजल स्तर सुधरने से गर्मियों के दिनों में पेयजल संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। स्थानीय प्रशासन ने जल संरक्षण संरचनाओं की साफ-सफाई का कार्य तेज कर दिया है।
आम नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे खराब मौसम के दौरान पूरी तरह सतर्क रहें। आकाशीय बिजली गिरने की संभावना के समय सुरक्षित इमारतों के भीतर शरण लें। कच्चे पेड़ों और कमजोर निर्माणों के नजदीक खड़े होने से बचें। वाहन चलाते समय सड़कों पर जलभराव को देखकर गति नियंत्रित रखें। मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन पर लगातार ध्यान देते रहें। अगले तीन दिनों तक तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी। उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिलेगी। यह बारिश कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नया प्रोत्साहन देगी।
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