नैनपुर। मंडला जिले के नैनपुर थाना क्षेत्र की पिंडरई चौकी अंतर्गत खिरसारू गांव में युवक-युवती के साथ मारपीट और करंट लगाने के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। घटना में गंभीर रूप से घायल युवक की नागपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने मामले की जांच के बाद तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
पुलिस के अनुसार, 25 अगस्त की रात खिरसारू गांव में एक युवती और दूसरे गांव का युवक सुनसान स्थान पर बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने दोनों को देख लिया। पुलिस का कहना है कि युवक-युवती के आपस में बातचीत करने को लेकर आरोपियों ने आपत्ति जताई और दोनों के साथ मारपीट की।
घायल हालत में अलग-अलग मिले थे युवक-युवती
घटना के अगले दिन 26 अगस्त की सुबह ग्रामीणों ने युवक और युवती को अलग-अलग स्थानों पर घायल हालत में देखा। ग्रामीणों की सूचना पर पिंडरई चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को उपचार के लिए सिविल अस्पताल भेजा गया।
युवक की हालत गंभीर होने के कारण उसे आगे के उपचार के लिए नागपुर ले जाया गया। लंबे उपचार के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हो सका और 16 सितंबर को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
युवती का भी उपचार कराया गया। पुलिस जांच में युवती के बयान को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में लिया गया।
जांच के बाद हत्या का मामला दर्ज
युवक की मौत के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच आगे बढ़ाई। पुलिस के अनुसार, 19 सितंबर को हत्या का मामला दर्ज कर घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की पड़ताल शुरू की गई।
जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से मिली जानकारी, बयानों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कुछ लोगों को संदिग्ध मानकर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में चमरा लाल मरावी, लाल सिंह मरावी और सुनील कुमार मरावी की कथित संलिप्तता सामने आई।
इसके बाद पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया।
कोर्ट ने तीनों आरोपियों को जेल भेजा
पुलिस कार्रवाई के बाद तीनों आरोपियों को सोमवार दोपहर न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय के आदेश के बाद तीनों को जेल भेज दिया गया।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच में उपलब्ध साक्ष्यों और बयानों के आधार पर कार्रवाई की गई है। घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
यह मामला युवक-युवती के आपस में बातचीत करने को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद हुई कथित हिंसा से जुड़ा है। पुलिस की जांच और न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही मामले के सभी तथ्य पूरी तरह स्पष्ट होंगे।
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