भोपाल। डिजिटल दौर में टैक्स जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। अब आयकर विभाग डिजिटल साक्ष्यों की जांच के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल और मजबूत करने जा रहा है। इसके तहत देश के अलग-अलग शहरों में 22 Digital Intelligence and Analytics Labs (DIAL Labs) स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इनमें मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल भी शामिल है।
नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) की आधिकारिक टेंडर सूची में 17 सितंबर 2026 को आयकर विभाग के लिए 22 DIAL Labs की Supply, Installation, Testing and Commissioning से संबंधित टेंडर दर्ज किया गया है। टेंडर की अनुमानित लागत करीब ₹73.46 करोड़ बताई गई है।
डिजिटल साक्ष्यों की होगी फॉरेंसिक जांच
इन डिजिटल लैब का उद्देश्य टैक्स चोरी, अघोषित संपत्ति और वित्तीय मामलों से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच को अधिक तकनीकी और व्यवस्थित बनाना है। जांच के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और हार्ड डिस्क जैसे उपकरणों के साथ-साथ ईमेल, सर्वर, क्लाउड स्टोरेज और वित्तीय सॉफ्टवेयर से संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड की भी फॉरेंसिक जांच की जा सकेगी।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, डिजिटल साक्ष्यों में डिलीट किए गए डेटा की रिकवरी और उसके विश्लेषण की क्षमता भी इन प्रयोगशालाओं की जांच प्रक्रिया का हिस्सा होगी। इसका मतलब यह नहीं है कि हर डिलीट किया गया डेटा हर स्थिति में वापस मिल जाएगा, बल्कि उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य और फॉरेंसिक तकनीकों के आधार पर डेटा की जांच और रिकवरी की कोशिश की जाएगी।
भोपाल समेत 22 शहरों में होंगी लैब
टेंडर विवरण के मुताबिक प्रस्तावित DIAL Labs के लिए भोपाल, दिल्ली, अहमदाबाद, सूरत, जयपुर, चंडीगढ़, लुधियाना, पटना, रायपुर, मुंबई, पुणे, नागपुर, हैदराबाद, कोलकाता, बेंगलुरु, चेन्नई, कोच्चि, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, पणजी, कानपुर और लखनऊ को शामिल किया गया है।
इस परियोजना के लिए NFSU के माध्यम से टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उपलब्ध टेंडर विवरण के अनुसार बोली जमा करने की अंतिम तारीख 7 अक्टूबर 2026 निर्धारित है।
जांच में बढ़ेगा डिजिटल फॉरेंसिक का महत्व
आज वित्तीय लेनदेन, कारोबारी रिकॉर्ड और संचार का बड़ा हिस्सा डिजिटल माध्यमों पर निर्भर है। ऐसे में टैक्स संबंधी जांच में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का महत्व भी बढ़ रहा है। आयकर जांच में डिजिटल उपकरणों और रिकॉर्ड से प्राप्त जानकारी का फॉरेंसिक विश्लेषण जांच एजेंसियों को वित्तीय गतिविधियों की कड़ियां समझने में मदद कर सकता है।
नई लैब व्यवस्था के जरिए डिजिटल साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से जांचने, सुरक्षित रखने और उनका विश्लेषण करने की क्षमता को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे जांच प्रक्रिया में विशेषज्ञ डिजिटल फॉरेंसिक तकनीकों का इस्तेमाल अधिक व्यापक स्तर पर किया जा सकेगा।
डाटा डिलीट करना जांच से बचने की गारंटी नहीं
डिजिटल रिकॉर्ड डिलीट कर देने मात्र से किसी जांच से बचना सुनिश्चित नहीं होता। हालांकि किसी डिलीट किए गए डेटा की रिकवरी उसकी प्रकृति, डिवाइस, स्टोरेज और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों सहित कई तकनीकी परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
नई DIAL Labs इसी तरह के डिजिटल साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच के लिए तकनीकी आधार मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। आयकर विभाग की जांच में डिजिटल फॉरेंसिक क्षमता बढ़ने से मोबाइल, कंप्यूटर, सर्वर और अन्य डिजिटल माध्यमों से जुड़े रिकॉर्ड का विश्लेषण अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।
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