भोपाल। राजधानी भोपाल के एयरोसिटी क्षेत्र में बनने वाले ग्रिड कंट्रोल सेंटर कॉम्प्लेक्स ऑफ वेस्ट रीजन के निर्माण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा ने परियोजना से संबंधित सभी शासकीय अनुमतियां 20 नवंबर तक पूरी करने और निर्धारित समय-सीमा में निर्माण कार्य शुरू कराने को कहा है। इस परियोजना पर लगभग 305 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और निर्माण करीब दो वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह कॉम्प्लेक्स ग्रिड कंट्रोल ऑफ इंडिया लिमिटेड (ग्रिड-इंडिया) के लिए बनाया जा रहा है, जो केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय का सार्वजनिक उपक्रम है। प्रस्तावित केंद्र से देश के पश्चिमी क्षेत्र के बिजली ग्रिड का नियंत्रण किया जाएगा।
कमिश्नर कार्यालय में हुई परियोजना की समीक्षा
परियोजना की प्रगति को लेकर मंगलवार को कमिश्नर कार्यालय में संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें ग्रिड-इंडिया के कार्यकारी निदेशक एम.के. रमेश, भोपाल विकास प्राधिकरण के सीईओ श्याम वीर सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में परियोजना की वर्तमान स्थिति, निर्माण की तैयारियों और जरूरी सरकारी अनुमतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। संभागायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी प्रक्रियाएं तय समय-सीमा में पूरी की जाएं, ताकि परियोजना का काम निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शुरू हो सके।
भोपाल विकास प्राधिकरण करा रहा निर्माण
बैठक में बताया गया कि कंट्रोल सेंटर कॉम्प्लेक्स का निर्माण भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) द्वारा कराया जा रहा है। इस संबंध में बीडीए और ग्रिड-इंडिया के बीच ‘कॉन्सेप्ट टू कम्प्लीशन’ समझौता ज्ञापन (एमओयू) हो चुका है। परियोजना के लिए भूमि का आवंटन भी किया जा चुका है।
निर्माण पर लगभग 305 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। परियोजना को करीब दो वर्ष में पूरा करने की योजना है। इसके लिए अलग-अलग विभागों से आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करना और निर्माण से पहले की प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करना महत्वपूर्ण है।
20 नवंबर तक पूरी करनी होंगी जरूरी प्रक्रियाएं
समीक्षा बैठक में भवन अनुज्ञा, पर्यावरणीय स्वीकृति, भूमि उपयोग परिवर्तन और ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन जैसे विषयों पर चर्चा की गई। इसके अलावा निर्माण कार्य के लिए निविदा आमंत्रित करने और पोल शिफ्टिंग से जुड़े कामों की भी समीक्षा हुई।
संभागायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि भवन निर्माण की अनुमति, पर्यावरणीय स्वीकृति, भूमि उपयोग परिवर्तन, ग्रीन बिल्डिंग प्रमाणन और बिजली के खंभों को स्थानांतरित करने संबंधी प्रक्रियाएं निर्धारित समय-सीमा में पूरी की जाएं।
इन अनुमतियों और प्रक्रियाओं के पूरा होने से निर्माण कार्य शुरू करने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। प्रशासन का जोर सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाकर परियोजना को तय समय पर आगे बढ़ाने पर है।
पश्चिमी क्षेत्र के बिजली ग्रिड का होगा नियंत्रण
एयरोसिटी में प्रस्तावित कंट्रोल सेंटर कॉम्प्लेक्स की प्रमुख विशेषता यह है कि यहां से देश के पश्चिमी क्षेत्र के बिजली ग्रिड को नियंत्रित किया जाएगा। यह परियोजना ग्रिड संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण अवसंरचना के रूप में विकसित की जा रही है।
बिजली ग्रिड के संचालन में विभिन्न क्षेत्रों के बीच विद्युत आपूर्ति और मांग के संतुलन की निगरानी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में आधुनिक सुविधाओं से युक्त कंट्रोल सेंटर बिजली व्यवस्था के संचालन में अहम भूमिका निभा सकता है।
परियोजना को देश में अपनी तरह का पहला कंट्रोल सेंटर कॉम्प्लेक्स बताया गया है। हालांकि, इसकी तकनीकी क्षमताओं और संचालन व्यवस्था का विस्तृत विवरण बैठक के उपलब्ध ब्योरे में नहीं दिया गया है।
अब निर्माण की समय-सीमा पर नजर
भोपाल के एयरोसिटी क्षेत्र में प्रस्तावित यह परियोजना लगभग 305 करोड़ रुपये के निवेश से तैयार होगी। भूमि आवंटन और एमओयू की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब शासकीय अनुमतियों तथा निर्माण की तैयारियों पर ध्यान दिया जा रहा है।
संभागायुक्त ने 20 नवंबर तक जरूरी अनुमतियां पूरी करने और निर्माण कार्य तय समय पर शुरू कराने के निर्देश दिए हैं। अब संबंधित विभागों की प्रगति और निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रक्रियाएं पूरी होने पर परियोजना के अगले चरण की गति निर्भर करेगी।
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