विदिशा भारती
पठारी। नगर के व्यस्त और घनी आबादी वाले फार्म चौराहा पर लोहे की भारी-भरकम चोट और मशीनों का कानफोड़ू शोर भारी पड़ रहा है। हालात यह हैं कि यहां दिनभर चलने वाली हैमर मशीनों की धमक से आसपास के पक्के मकान थरथरा रहे हैं। सुबह से लेकर देर शाम तक लगातार होने वाली ठोक-पीट, तेज आवाज और कंपकंपी से परेशान मोहल्लेवासियों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। पीड़ित रहवासियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विदिशा कलेक्टर के समक्ष शिकायती आवेदन प्रस्तुत कर तत्काल स्थलीय जांच और सख्त वैधानिक कार्रवाई की गुहार लगाई है।
रिहायशी इलाके में औद्योगिक स्तर की ठोक-पीट, हिल रहीं दीवारें
खुरई मार्ग स्थित फार्म चौराहा पर स्थित यह पूरा इलाका घनी आबादी वाला आवासीय क्षेत्र है। यहां रहने वाले सुंदरलाल कुर्मी, बृजेंद्र सिंह ठाकुर, सीताराम साहू, शिवराज कुर्मी और देवेंद्र ठाकुर सहित कई नागरिकों ने कलेक्टर को भेजे पत्र में अपनी आपबीती कही है। रहवासियों के मुताबिक, उनके घरों से बिल्कुल सटकर दुकानदारों के द्वारा लोहे को आकार देने और भारी फेब्रिकेशन व पिटाई का कार्य किया जा रहा है। इस काम में सामान्य औजारों की जगह अत्यधिक वजनी और शक्तिशाली इलेक्ट्रॉनिक हैमर मशीनों का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है।

जैसे ही यह मशीन लोहे के बड़े टुकड़ों पर प्रहार करना शुरू करती है, जमीन के भीतर से उठने वाला कंपन सीधे पास के मकानों की दीवारों और छतों तक पहुंच जाता है। शिकायतकर्ताओं का कहना है की पूरा मकान हिलने जैसा अहसास होता है। लगातार इस कंपन के कारण भविष्य में मकानों में दरारें पड़ने और गंभीर संरचनात्मक क्षति होने की आशंका गहराने लगी है।
कन्या स्कूल के द्वार पर कानफोड़ू शोर, छात्राओं की पढ़ाई पर संकट
इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक और गंभीर पहलू यह है कि यह कार्य शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय के मुख्य द्वार के ठीक सामने और पास संचालित हो रहा है। हर रोज स्कूल आने-जाने वाली छात्राओं, शिक्षकों और राहगीरों को इस असहनीय ध्वनि प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है। जब कक्षाएं संचालित होती हैं, उस वक्त मशीनों की तीखी आवाज सीधे कमरों तक गूंजती है, जिससे छात्राओं की पढ़ाई, एकाग्रता और मानसिक शांति पूरी तरह भंग हो जाती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि एक तरफ शासन-प्रशासन शैक्षणिक संस्थानों के आसपास शांत माहौल बनाए रखने के कड़े नियम बनाता है, वहीं दूसरी तरफ स्कूल के मुहाने पर ही यह शोरगुल खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है।

न नींद बची, न सुकून; बीमार बुजुर्ग और नौनिहाल सबसे ज्यादा हलकान
रिहायशी बस्तियों में औद्योगिक कार्य संचालित करने के लिए पर्यावरण संरक्षण और ध्वनि नियंत्रण के जो नियम तय हैं, उनकी यहां खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
★ ध्वनि और कंपन नियंत्रण के कोई साधन नहीं: कार्यस्थल पर तेज आवाज रोकने के लिए कोई साउंडप्रूफिंग या कंपन थामने वाले शॉक-एब्जॉर्बर पैड तक नहीं लगाए गए हैं।
★ बुजुर्गों और मरीजों की बढ़ी बेचैनी: दिल के मरीजों, वृद्धजनों और छोटे बच्चों के लिए यह लगातार गूंजता शोर सिरदर्द और घबराहट की वजह बन चुका है।
★ परीक्षा की तैयारियों पर ग्रहण: घर के बच्चे न तो दिन में सुकून से पढ़ पाते हैं और न ही रात में परिवार चैन की नींद सो पा रहा है।
स्थल निरीक्षण कर उचित वैधानिक कार्रवाई की मांग
फार्म चौराहा और खुरई मार्ग के रहवासियों ने साफ किया है कि किसी के वैध रोजगार से उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन रिहायशी बस्ती और स्कूल के पास बिना सुरक्षा मानकों के मशीनी कंपन और ध्वनि प्रदूषण फैलाना सीधे-सीधे नागरिकों के जीने के अधिकार पर कुठाराघात है।
मोहल्लेवासियों ने कलेक्टर से मांग की है कि:
● राजस्व और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम भेजकर मौके का तुरंत स्थलीय निरीक्षण कराया जाए।
● मशीनों के कारण मकानों में पैदा हो रहे कंपन और डेसिबल स्तर की तकनीकी जांच की जाए।
● घनी बस्ती और कन्या विद्यालय के पास चल रहे इस भारी काम को तत्काल प्रभाव से किसी उपयुक्त गैर-रिहायशी क्षेत्र में स्थानांतरित कराया जाए।
अब देखना यह होगा कि इस शिकायत के बाद विदिशा जिला प्रशासन कितनी तेजी से हरकत में आता है और फार्म चौराहा के रहवासियों को इस अनचाहे कंपन और शोर से कब तक निजात मिल पाती है।
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