इटारसी: मध्य प्रदेश के इटारसी से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे प्रशासनिक अमले और समाज में हड़कंप मचा दिया है। एक भाजपा नेता द्वारा संचालित बालिका गृह से पिछले तीन वर्षों में 5 नाबालिग बालिकाओं के रहस्यमय ढंग से लापता होने का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि इन घटनाओं के काफी समय बाद अब जाकर पुलिस ने अपहरण की धाराओं में मामला दर्ज किया है। आखिर इतने लंबे समय तक इन बालिकाओं का क्या हुआ? और प्रशासन खामोश क्यों था? ये सवाल अब हर किसी की जुबां पर हैं।
3 साल, 5 बेटियाँ और खामोश सिस्टम
मामला इटारसी के एक बालिका गृह का है, जिसका संचालन भाजपा नेता मनीष ठाकुर करते हैं। मनीष ठाकुर नगर पालिका सभापति के पति भी हैं। संस्था की ओर से केयरटेकर रानी सिंह राजपूत ने पुलिस को जो आवेदन दिया है, उसने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। आवेदन के अनुसार, बीते तीन वर्षों में अलग-अलग समय पर यहाँ से 5 नाबालिग बच्चियाँ लापता हुईं, जिनका पता अब तक नहीं चल सका है।
कब और कैसे गायब हुईं नाबालिग?
बालिका गृह से हुई इन घटनाओं का विवरण चौंकाने वाला है:
साल 2024: एक नाबालिग बालिका अचानक लापता हो गई।
25 दिसंबर 2025: यह दिन सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है, जब एक साथ तीन किशोरियाँ (दो 16 वर्ष और एक 17 वर्ष) गायब हो गईं।
14 जून 2026: अभी हाल ही में एक 13 वर्षीय मासूम भी लापता हो गई।
सवालिया घेरे में सिस्टम और एफआईआर में देरी
कानून के जानकारों का कहना है कि किसी भी नाबालिग के लापता होने पर 'पॉक्सो एक्ट' और किशोर न्याय अधिनियम के तहत तुरंत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन, यहाँ एक से दो साल तक एफआईआर दर्ज न होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या ये केवल 'गुमशुदगी' थी, या कोई बड़ा सुनियोजित जाल?
क्या बोले जिम्मेदार?
इस गंभीर मुद्दे पर संस्था संचालक मनीष ठाकुर का अपना तर्क है। उनका दावा है कि उन्होंने हर घटना की सूचना पुलिस को समय पर दी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। हाल ही में कलेक्टर, एसपी और बाल कल्याण समिति की बैठक में दबाव बनने के बाद अब जाकर पुलिस ने इन मामलों को संज्ञान में लिया है।
वहीं, इटारसी थाना प्रभारी सौरभ पांडे ने बताया कि आवेदन मिलते ही पांचों प्रकरणों में अपहरण की एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब इन बालिकाओं की तलाश में जुट गई है और साथ ही इस बात की भी जांच की जा रही है कि इतने लंबे समय तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई?
क्या मिलेगा बेटियों को न्याय?
अब सवाल यह है कि क्या पुलिस इन 5 मासूमों को सकुशल ढूंढ पाएगी? इतनी लंबी देरी के कारण सुराग मिलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह मामला न केवल बालिका गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि उन सिस्टम की कमियों को भी उजागर करता है जो नाबालिगों की सुरक्षा के लिए बनाए गए थे।
विदिशा भारती इस खबर पर लगातार नजर बनाए रखेगा। क्या सच सामने आएगा? क्या प्रशासन इन लापता बेटियों के परिजनों को जवाब दे पाएगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
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