वसीम कुरेशी रायसेन/सांची: दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों और शांति के संदेश को मानने वालों के लिए आज का दिन बेहद खास और भावुक रहा। भगवान बुद्ध के दो सबसे प्रिय शिष्यों—सारिपुत्त और महामोग्गलान—के पवित्र अस्थि कलश अपनी गौरवशाली यात्रा पूरी कर वापस अपनी कर्मभूमि, सांची के चेतियागिर विहार में सुरक्षित पुनर्स्थापित कर दिए गए हैं। यह क्षण केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक कूटनीति की एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
भोपाल एयरपोर्ट पर हुआ भव्य स्वागत
मंगोलिया से वापस लाए गए इन पवित्र अस्थि अवशेषों को आज भोपाल एयरपोर्ट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ प्राप्त किया गया। इस भावुक अवसर पर मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार और संस्कृति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री शिव शेखर शुक्ल विशेष रूप से उपस्थित रहे।
जैसे ही अस्थि कलश एयरपोर्ट पहुंचे, वातावरण भक्तिमय हो गया। सभी गणमान्य अतिथियों ने पूरी श्रद्धा के साथ इन अवशेषों के दर्शन किए। इसके बाद, श्रीलंका महाबोधि सोसायटी के अध्यक्ष वेनेगल उपतिस्स नायक थेरो के नेतृत्व में पूरी सुरक्षा और सादगी के साथ कलश को सांची के लिए रवाना किया गया। सांची पहुँचते ही विधि-विधान और विशेष पूजा-अर्चना के बाद इन्हें चेतियागिर विहार के गर्भगृह में पुनर्स्थापित कर दिया गया।
शांति का दूत है बौद्ध धर्म: मंत्री इंदर सिंह परमार
इस मौके पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा, "भगवान बुद्ध की शिक्षाएं और उनका अहिंसा का मार्ग ही वह शक्ति है जिसने भारत को विश्व गुरु बनाया। बुद्ध का संदेश न केवल भारत, बल्कि चीन सहित पूरे दक्षिण-पूर्वी एशिया में शांति का आधार बना है।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज के तनावपूर्ण वैश्विक दौर में बुद्ध के शांति के संदेश की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है।
पीएम मोदी का जताया आभार
श्रीलंका महाबोधि सोसायटी के अध्यक्ष वेनेगल उपतिस्स नायक थेरो ने इस पूरी यात्रा के सफल संचालन के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "मंगोलिया जैसे दूरस्थ देशों में भी बुद्ध के शिष्यों के इन अवशेषों को पहुँचाना और लाखों लोगों को उनके दर्शन कराना एक ऐतिहासिक कार्य है। भारत सरकार और विशेषकर मध्य प्रदेश सरकार का प्रबंधन अत्यंत सराहनीय रहा है।" उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले समय में इन अस्थि कलशों को अन्य बौद्ध देशों में भी दर्शन के लिए ले जाया जाएगा, ताकि अनुयायी अपनी श्रद्धा प्रकट कर सकें।
एक कठिन और गौरवशाली यात्रा का पड़ाव
यह अस्थि कलश भारतीय वायुसेना के एक विशेष विमान से पहले दिल्ली पहुंचे थे, जहाँ राष्ट्रीय संग्रहालय में इन्हें आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा गया था। इस लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा को अंजाम देने में इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (IBC) के डायरेक्टर कर्नल यश सक्सेना और राष्ट्रीय संग्रहालय के डायरेक्टर श्री विमल कुमार की भूमिका महत्वपूर्ण रही। गुवाहाटी से लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना भी इस विशेष विमान का हिस्सा बने।
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से संस्कृति विभाग के उप सचिव श्री राजेश गुप्ता ने पूरी यात्रा के दौरान कलश की सुरक्षा और गरिमा का विशेष ध्यान रखा। वहीं, भोपाल में संस्कृति विभाग के निदेशक श्री एन.पी. नामदेव और सांची विश्वविद्यालय के नोडल अफसर श्री रविंद्र सिंह ठाकुर ने सांची में पुनर्स्थापना की समस्त व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखा।
अब सांची का चेतियागिर विहार एक बार फिर अपनी इस अमूल्य धरोहर के साथ दुनिया भर के पर्यटकों और बौद्ध अनुयायियों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए तैयार है।
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