विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा में आज उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सैंकड़ों किसानों ने अपनी उपज की तुलाई न होने और बारदाने की कमी से नाराज होकर भोपाल-सागर हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। किसानों का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को सड़क के बीचों-बीच आड़ा खड़ा कर दिया, जिससे देखते ही देखते हाईवे के दोनों ओर करीब 2 किलोमीटर लंबा जाम लग गया।
क्यों सड़कों पर उतरने को मजबूर हुआ 'अन्नदाता'?
खरीद केंद्रों पर पिछले कुछ दिनों से अव्यवस्थाओं का आलम था। किसानों का आरोप है कि मंडी और केंद्रों पर न तो समय पर तुलाई हो रही है और न ही अनाज भरने के लिए बारदाना (बोरे) उपलब्ध है। घंटों इंतजार करने के बाद जब सब्र का बांध टूटा, तो किसानों ने अपनी आवाज बुलंद करने के लिए हाईवे का रास्ता चुना।
तपती धूप में सड़क पर बैठे किसानों के चेहरे पर प्रशासन के खिलाफ साफ नाराजगी देखी गई। किसानों का कहना था कि वे रात-दिन जागकर फसल लेकर आते हैं, लेकिन यहां उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है।
जनप्रतिनिधियों का 'अजीब' जवाब: “हम क्या कर सकते हैं?”
हैरानी की बात तो यह रही कि जब कुछ किसानों ने इस समस्या को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया, तो उन्हें सहानुभूति के बजाय रूखा जवाब मिला। किसानों के अनुसार, नेताओं ने पल्ला झाड़ते हुए कहा— "इसमें हम क्या कर सकते हैं?" इस गैर-जिम्मेदाराना बयान ने जलती आग में घी का काम किया और किसानों का गुस्सा और भड़क गया।
गुस्से में भी दिखाई इंसानियत: एम्बुलेंस के लिए खोला रास्ता
एक तरफ जहां किसान प्रशासन और नेताओं से बेहद नाराज थे, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने अपनी संवेदनशीलता का परिचय भी दिया। जाम के दौरान जब भी कोई एम्बुलेंस या गंभीर मरीज वाली गाड़ी आई, तो किसानों ने तुरंत रास्ता बनाकर उन्हें वहां से सुरक्षित निकाला। हालांकि, सैकड़ों अन्य यात्री इस जाम में घंटों फंसे रहे और उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रशासन की दौड़-भाग, आश्वासन के बाद खुला जाम
हाईवे जाम होने की सूचना मिलते ही पुलिस बल और विदिशा एसडीएम दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने मौके की नजाकत को भांपते हुए तुरंत उच्चाधिकारियों से बात की और किसानों को तत्काल बारदाना उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।
पुलिस टीम और प्रशासनिक अधिकारियों की घंटों चली समझाइश और मौके पर बारदाने की खेप मंगवाने के आश्वासन के बाद किसानों ने अपना आंदोलन खत्म किया और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को रास्ते से हटाया। तब जाकर करीब 3 घंटे बाद हाईवे पर यातायात सुचारू हो सका।
बड़ा सवाल: हर साल तुलाई के समय बारदाने की किल्लत आखिर क्यों आती है? क्या प्रशासन पहले से इसके लिए मुस्तैद नहीं रह सकता ताकि किसानों को सड़कों पर न उतरना पड़े?
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