रतलाम/शिवगढ़। जंगलों के संरक्षण, पौधरोपण और हरियाली विस्तार के लिए खर्च की जाने वाली CAMPA राशि को लेकर शिवगढ़ वन विभाग के दक्षिण क्षेत्र में गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ता चौकीदार ईश्वर मुनिया ने वर्ष 2021 से 2026 के बीच कराए गए विभिन्न कार्यों में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है।
शिकायत में बासिंद्रा दक्षिण बीट/P58 क्षेत्र में हुए कार्यों को लेकर विशेष सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि रिकॉर्ड में हजारों गड्ढे खोदे जाने और अन्य कार्य पूर्ण होना दर्शाया गया, लेकिन मौके पर वास्तविक स्थिति अलग दिखाई देती है। इसी आधार पर शिकायतकर्ता ने कार्यों के भौतिक सत्यापन के साथ-साथ संबंधित दस्तावेजों और भुगतान रिकॉर्ड की जांच की मांग की है।
कागजों में 50 हजार गड्ढे, मौके पर सत्यापन की मांग
शिकायत में कथित तौर पर करीब 50 हजार गड्ढों के कार्य का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि जिन स्थानों पर गड्ढे और पौधरोपण के कार्य दर्ज किए गए हैं, वहां मौके पर जाकर वास्तविक संख्या और स्थिति का सत्यापन किया जाना जरूरी है।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जांच टीम रिकॉर्ड में दर्ज कार्यों के आधार पर नहीं, बल्कि जियो-टैगिंग, मस्टर रोल, माप पुस्तिका, कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र और मौके के भौतिक सत्यापन के जरिए स्थिति स्पष्ट करे। इससे यह पता चल सकेगा कि रिकॉर्ड में दर्ज कार्य वास्तव में कितने हुए।
जांच से पहले रात में जेसीबी चलने का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि शिकायत और जांच की प्रक्रिया शुरू होने के बीच कथित तौर पर रात के समय जेसीबी मशीन चलाकर गड्ढे तैयार किए गए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यदि ऐसा हुआ है तो इसकी स्वतंत्र जांच की जानी चाहिए।
इस आरोप की पुष्टि के लिए जेसीबी की आवाजाही, मशीन के उपयोग, संबंधित कार्यस्थल की तस्वीरों तथा मौके पर मौजूद कर्मचारियों और ग्रामीणों के बयान महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जांच में यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि संबंधित कार्य कब स्वीकृत हुए और रिकॉर्ड में उनकी पूर्णता की तारीख क्या दर्ज है।
फेंसिंग और अन्य CAMPA कार्य भी जांच के घेरे में
शिकायत केवल गड्ढों तक सीमित नहीं है। फेंसिंग, पौधरोपण और अन्य CAMPA कार्यों में भी कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने संबंधित कार्यों में इस्तेमाल सामग्री, स्वीकृत लागत, वास्तविक निर्माण और भुगतान की स्थिति का मिलान कराने की मांग की है।
ऐसे मामलों में माप पुस्तिका, तकनीकी स्वीकृति, प्रशासनिक स्वीकृति, सामग्री की खरीद, भुगतान वाउचर और मस्टर रोल जैसे दस्तावेज यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होते हैं कि सरकारी राशि के बदले वास्तविक कार्य कितना हुआ।
ग्राम नाल में ₹40 हजार कथित वसूली का आरोप
शिकायत में ग्राम नाल में ₹40 हजार की कथित वसूली का आरोप भी सामने आया है। शिकायतकर्ता ने इस रकम और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है।
हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बिना नहीं की जा सकती। इसलिए यह आवश्यक होगा कि जांच अधिकारी संबंधित ग्रामीणों के बयान दर्ज करें, किसी भुगतान या लेनदेन का दस्तावेजी रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं, इसकी जांच करें और आरोप में नामित कर्मचारियों का पक्ष भी दर्ज करें।
वनरक्षक और रेंजर की भूमिका की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ईश्वर मुनिया ने वनरक्षक देवेंद्र सिंह देवड़ा और रेंजर विष्णु पाटीदार की भूमिका की जांच की मांग की है। ये आरोप फिलहाल शिकायत में लगाए गए हैं और इनकी सत्यता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मामले की विभागीय जांच सैलाना रेंजर राधेश्याम जोशी द्वारा किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच अधिकारी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का निष्पक्ष मिलान करना होगी।
जांच में किन बिंदुओं पर हो सकता है फोकस?
पूरे मामले में यदि विभाग निष्पक्ष और दस्तावेज आधारित जांच करता है तो निम्न बिंदुओं का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा—
- वर्ष 2021 से 2026 तक स्वीकृत CAMPA कार्यों की सूची।
- प्रत्येक कार्य की प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति।
- रिकॉर्ड में दर्ज गड्ढों और वास्तविक गड्ढों की संख्या।
- पौधरोपण की वास्तविक स्थिति और पौधों की जीवितता।
- फेंसिंग की लंबाई और मौके पर उसकी मौजूदगी।
- मस्टर रोल में दर्ज श्रमिक और वास्तविक कार्यस्थल।
- माप पुस्तिका एवं कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र।
- भुगतान वाउचर और संबंधित बिल।
- जेसीबी अथवा मशीनरी के उपयोग का रिकॉर्ड।
- शिकायत में लगाए गए ₹40 हजार के कथित वसूली आरोप की जांच।
निष्कर्ष जांच के बाद ही
CAMPA जैसी योजनाओं में सरकारी धन का उपयोग वन संरक्षण और पर्यावरण सुधार के लिए किया जाता है। ऐसे में रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में यदि अंतर मिलता है तो उसकी जिम्मेदारी तय करना विभागीय जांच का विषय होगा।
फिलहाल सामने आए आरोप शिकायतकर्ता के दावों पर आधारित हैं। वन विभाग के संबंधित अधिकारियों का पक्ष और विभागीय जांच की अंतिम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में कितने कार्य हुए, कितनी राशि खर्च हुई और किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता हुई या नहीं।
विदिशा भारती मामले में विभागीय जांच की प्रगति, मौके के सत्यापन और संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।
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