नई दिल्ली। खेती को आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने के साथ किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें नई कृषि तकनीकों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि रोडमैप कार्यक्रम 2026 के तहत कृषक शैक्षणिक भ्रमण दल के सदस्यों से संवाद किया। उन्होंने किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आय के नए विकल्प अपनाने और वैज्ञानिक पद्धतियों के जरिए कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रेरित किया।
26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में हुए संवाद के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खेती को आधुनिक और टिकाऊ बनाना तथा किसानों की आय बढ़ाना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। उन्होंने छोटे किसानों को फसल उत्पादन के साथ बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियां अपनाकर आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने की सलाह दी।
एक फसल पर निर्भरता कम करने की जरूरत
कृषि क्षेत्र में बदलती परिस्थितियों के बीच किसानों के लिए आय के विविध स्रोत विकसित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खेती में लागत, मौसम की अनिश्चितता और बाजार के उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों के बीच एक ही फसल पर निर्भरता कम करने से किसानों को अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को कृषि के साथ अन्य गतिविधियां जोड़ने के लिए प्रेरित किया। बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियां स्थानीय संसाधनों और बाजार की मांग के अनुरूप अपनाई जाएं, तो किसान अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर सकते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों तक पहुंचेगी तकनीक
कृषि रोडमैप कार्यक्रम के तहत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) और कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थानों (ATARIs) के नेतृत्व में किसानों को नई तकनीकों और कृषि नवाचारों से परिचित कराया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य अनुसंधान संस्थानों में विकसित तकनीकों को खेतों तक पहुंचाना और किसानों को उनके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी देना है। कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विज्ञान केंद्रों और किसानों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए ऐसी पद्धतियों को बढ़ावा देने पर जोर है, जिन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपनाया जा सके।
कार्यक्रम के तहत किसानों को केवल तकनीकी जानकारी ही नहीं दी जा रही, बल्कि उन्हें सफल कृषि मॉडल देखने और उनसे सीखने का अवसर भी मिल रहा है। उम्मीद है कि भ्रमण से प्राप्त अनुभवों के आधार पर किसान अपने गांवों में नई तकनीकों का इस्तेमाल कर दूसरे किसानों को भी प्रेरित कर सकेंगे।
मध्यप्रदेश के 25 किसानों ने किया शैक्षणिक भ्रमण
इस पहल के तहत मध्यप्रदेश के 25 किसानों के एक दल ने हरियाणा, पंजाब और दिल्ली स्थित विभिन्न अनुसंधान संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों का भ्रमण किया। इस दौरान किसानों ने वहां विकसित वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
दल ने ऐसे प्रगतिशील किसानों के खेतों का भी दौरा किया, जो उन्नत तकनीकों को अपनाकर पर्यावरण-अनुकूल खेती कर रहे हैं। किसानों से बातचीत के दौरान उन्हें खेती के व्यावहारिक अनुभवों, तकनीकों के उपयोग और कृषि कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के तरीकों को समझने का अवसर मिला।
शैक्षणिक भ्रमण का प्रमुख उद्देश्य किसानों को ऐसे मॉडल से परिचित कराना है, जिनसे वे अपनी खेती की जरूरतों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपयोगी तकनीकों का चयन कर सकें।
संरक्षित खेती से पराली प्रबंधन तक की तकनीकें सीखीं
भ्रमण के दौरान किसानों ने कई आधुनिक कृषि तकनीकों के व्यावहारिक प्रदर्शन देखे। इनमें संरक्षित खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली, मशीन बैंक, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, डायरेक्ट सीडिंग और पराली प्रबंधन जैसी तकनीकें शामिल रहीं।
संरक्षित खेती: इस पद्धति के जरिए फसलों को नियंत्रित या अपेक्षाकृत सुरक्षित वातावरण में उगाने की तकनीक समझाई जाती है। फसल और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इसका उपयोग उत्पादन की गुणवत्ता और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में मददगार हो सकता है।
एकीकृत कृषि प्रणाली: इसमें फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, बागवानी या अन्य उपयुक्त कृषि गतिविधियों को जोड़ने पर जोर दिया जाता है। इसका उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और आय के कई स्रोत विकसित करना है।
मशीन बैंक: इसके माध्यम से किसानों को कृषि मशीनें उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इससे विशेषकर छोटे किसानों को महंगी मशीनें खरीदने के बजाय साझा उपयोग का विकल्प मिल सकता है।
हैप्पी सीडर और सुपर सीडर: ये मशीनें फसल अवशेषों के प्रबंधन और बुवाई की प्रक्रियाओं में उपयोगी हो सकती हैं। इनका उचित उपयोग पराली जलाने की जरूरत कम करने तथा खेत की तैयारी को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है।
डायरेक्ट सीडिंग: इस तकनीक में धान जैसी फसलों की रोपाई के बजाय सीधे बीज बोने की पद्धति अपनाई जाती है। उपयुक्त परिस्थितियों में इससे पानी, श्रम और समय के प्रबंधन में मदद मिल सकती है।
पराली प्रबंधन: फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उपयोग या उचित निपटान करने की तकनीकों पर जोर दिया गया। इससे पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है।
सीखी गई तकनीकें दूसरे किसानों तक पहुंचाने की तैयारी
भ्रमण दल के किसान नई तकनीकों को अपनाने और अपने अनुभव आसपास के किसानों के साथ साझा करने के लिए उत्साहित हैं। इस पहल की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि किसान अपने खेतों की मिट्टी, पानी, जलवायु, उपलब्ध संसाधनों और आर्थिक क्षमता के अनुरूप कौन-सी तकनीक अपनाते हैं।
कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और कृषि विज्ञान केंद्रों के सहयोग से नई पद्धतियों का स्थानीय स्तर पर परीक्षण किया जा सकता है। इससे किसानों को तकनीक अपनाने से पहले उसकी उपयोगिता, लागत और संभावित लाभ समझने में मदद मिलेगी।
कृषि रोडमैप कार्यक्रम 2026 के तहत किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की यह पहल वैज्ञानिक खेती, विविध आय स्रोतों और पर्यावरण-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब इस भ्रमण से प्राप्त ज्ञान का खेतों में कितना उपयोग होता है और किसानों को इससे कितना लाभ मिलता है, यह उसके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
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