:: पठारी (विदिशा भारती) ::
शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व के नजदीक आते ही पठारी नगर में आस्था, उल्लास और भक्ति का रंग गहराने लगा है। शक्ति की उपासना के महापर्व को लेकर नगर की प्रमुख धार्मिक और सामाजिक समितियों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में स्थानीय शिव मंदिर फार्म चौराहे पर दशकों से स्थापित होने वाली पारंपरिक एवं प्रतिष्ठित झांकी के सफल संचालन के लिए 'शिव मंदिर नव दुर्गा उत्सव समिति' का पुनर्गठन सर्वसम्मति से किया गया। बैठक में उपस्थित वरिष्ठजनों और युवाओं ने एकराय होकर दीपचंद पवार को समिति का अध्यक्ष तथा लाखन सिंह को संयोजक मनोनीत किया।
बैठक में आगामी नवरात्रि महोत्सव को गरिमामय, अनुशासित और भव्य रूप से संपन्न कराने के लिए विभिन्न पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं। समिति ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष धर्म, संस्कृति और मर्यादा के संगम के साथ माता रानी का दरबार सजेगा।
अनुभवी और युवा कंधों पर उत्सव की बागडोर
शिव मंदिर फार्म चौराहे पर आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में समिति के विस्तार और जिम्मेदारियों के सुचारू बंटवारे पर गहरा मंथन हुआ। सभी उपस्थित सदस्यों की सहमति से पूरी कार्यकारिणी की घोषणा की गई:
* संयोजक: लाखन सिंह
* अध्यक्ष: दीपचंद पवार
* उपाध्यक्ष: बबलू प्रजापति, राकेश कुशवाहा
* सचिव: प्रमेश प्रजापति, सूर्यकांत कुर्मी
* सहसचिव: शिवराज कुर्मी, संजू विश्वकर्मा
* कोषाध्यक्ष: अनिकेत विश्वकर्मा, हिमांशु कुशवाहा
* मंच संचालन: जितेंद्र लोधी
* संगीतमय आरती व्यवस्था: सतीश दीक्षित, जितेंद्र पवार
* पूजन एवं विधि-विधान: कैलाश व्यास, अंकित कुशवाहा
* मीडिया प्रभारी: कृष्ण बागड़ी, गब्बर सेन
* प्रसाद वितरण व्यवस्था: हरि नारायण सेन, शिवा पवार
* विद्युत सज्जा एवं पंडाल व्यवस्था: आकाश एवं सहयोगी दल
कार्यकारिणी गठन के पश्चात नव-नियुक्त पदाधिकारियों का माला पहनाकर स्वागत किया गया। नवनिर्वाचित अध्यक्ष दीपचंद पवार ने कहा कि शिव मंदिर फार्म चौराहे की झांकी पूरे नगर में अपनी श्रद्धा और भव्यता के लिए जानी जाती है, और इस वर्ष भी सभी नगरवासियों के सहयोग से इसे और अधिक दर्शनीय बनाया जाएगा।
पंडाल की मर्यादा पर कड़ा पहरा: नशा करने वालों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित
उत्सव के दौरान भक्तिमय और पारिवारिक वातावरण बनाए रखने के लिए समिति ने कई कड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। समिति ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए स्पष्ट किया कि झांकी परिसर और उसके आसपास किसी भी प्रकार के नशे (शराब, गांजा, गुटखा आदि) का सेवन करने वालों और असामाजिक तत्वों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा।
समिति के पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि पंडाल में माताएं, बहनें और बच्चे बड़ी संख्या में दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में यदि कोई भी व्यक्ति परिसर में हुड़दंग करता या नशे की हालत में पाया गया, तो समिति उसके खिलाफ तुरंत सख्त कदम उठाएगी और आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय पुलिस प्रशासन को सूचित किया जाएगा। सुरक्षा और सुव्यवस्था के लिए समिति के स्वयंसेवक 24 घंटे पंडाल परिसर में मुस्तैद रहेंगे।
ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण: तय समय पर बजेंगे केवल पावन भजन
प्रशासनिक नियमों का पालन करने और नगरवासियों को किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाने के लिए लाउडस्पीकर के उपयोग को लेकर भी समय-सीमा तय की गई है।
* सुबह का समय: प्रातः 5:00 बजे से प्रातः 9:00 बजे तक
* शाम का समय: सायं 6:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक
समिति ने निर्णय लिया है कि लाउडस्पीकर पर डीजे संस्कृति या कानफोड़ू फिल्मी धुनों के बजाय केवल पारंपरिक माता के जगराते, भजन, स्तुति और शास्त्रीय व लोक भक्ति गीत ही बजाए जाएंगे। इससे पूरे क्षेत्र में शुद्ध आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण होगा और विद्यार्थियों व बुजुर्गों को कोई परेशानी नहीं होगी।
9 दिनों तक बहेगी भक्ति और संस्कृति की त्रिवेणी
आगामी शारदीय नवरात्रि के दौरान शिव मंदिर फार्म चौराहे पर भक्ति, संगीत और बुंदेली संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। प्रतिदिन सुबह और शाम को संगीतमय महाआरती होगी, जिसमें नगर के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होंगे।
महोत्सव के दौरान आयोजित होने वाले प्रमुख आकर्षण:
* सुंदरकांड पाठ एवं अखंड संकीर्तन: नवरात्रि के पावन दिनों में विधिवत सुंदरकांड का संगीतमय पाठ किया जाएगा, जिसमें स्थानीय भजन मंडलियां अपनी प्रस्तुतियां देंगी।
* भव्य भजन संध्या: क्षेत्रीय और जाने-माने भजन गायकों द्वारा माता रानी की भेंटें और भक्ति गीतों की सुरम्य संध्या सजाई जाएगी।
* गरबा और डांडिया उत्सव: भारतीय पारंपरिक परिधानों में माता रानी की आराधना करते हुए गरबा और डांडिया रास का आयोजन होगा।
* नौ देवियों की जीवंत झांकी: मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों (शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री) का सुंदर और अलौकिक दर्शन श्रद्धालुओं को कराया जाएगा।
* बुंदेलखंडी लोकगीत एवं संस्कृति: बुंदेलखंड की माटी से जुड़े पारंपरिक देवी जस, लोकगीत और ढोलक की थाप पर माता की महिमा का बखान किया जाएगा।
शिव मंदिर नव दुर्गा उत्सव समिति ने नगर और आसपास के ग्रामीण अंचलों के सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सपरिवार पधारकर माता रानी के दर्शन करें, महाआरती का पुण्य लाभ लें और धर्म लाभ अर्जित करें।
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