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साधु-संतों के खून से कब तक लाल होती रहेंगी सड़कें? मुनि

22-05-2026  Baby jain  47 views
साधु-संतों के खून से कब तक लाल होती रहेंगी सड़कें? मुनि

गिरीडीह/मधुबन:

"सिर्फ शोक संदेश और मोमबत्तियां जलाने से संतों की सुरक्षा नहीं होगी। अब समय आ गया है कि समाज नींद से जागे और सरकार 'संत सुरक्षा प्रोटोकॉल' लागू करे!" यह गर्जना है सुप्रसिद्ध जैन मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज की।

मध्यप्रदेश के रीवा में जैन संतों के साथ हुई हृदयविदारक घटना ने पूरे देश के जैन समाज और अहिंसा प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए मुनि श्री ने दोटूक कहा कि पदविहारी संतों के साथ हो रही ये हिंसा अब बर्दाश्त की सीमा से बाहर है।

25 मई: जब सड़कों पर उतरेगा 'केसरिया और सफेद' सैलाब

मुनि श्री के आह्वान पर आगामी 25 मई, सोमवार को प्रातः 8 बजे देशभर में एक विशाल जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।

ड्रेस कोड: पुरुष सफेद वस्त्रों में और महिलाएं केसरिया वस्त्र धारण कर अपनी एकता का परिचय देंगी।

मौन का शोर: यह कोई शोर-शराबे वाली रैली नहीं, बल्कि एक 'मौन रैली' होगी, जिसकी खामोशी सत्ता के गलियारों तक गूंजेगी।

ज्ञापन का प्रहार: जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, राज्यपाल और मानवाधिकार आयोग को ज्ञापन सौंपकर 'संत सुरक्षा' की मांग की जाएगी।

क्या है 'संत सुरक्षा प्रोटोकॉल'? सरकार से बड़ी मांगें

मुनि श्री ने केवल पीड़ा व्यक्त नहीं की, बल्कि समाधान का रोडमैप भी सरकार के सामने रखा है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

विशेष संवेदनशील अपराध: संतों पर होने वाले हमलों को 'विशेष संवेदनशील' श्रेणी में रखा जाए।

SIT जांच और कठोर धाराएं: रीवा जैसी घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों पर हत्या की कड़ी धाराएं लगें।

हाईवे गाइडलाइन: साधु-संतों के विहार मार्गों पर पुलिस समन्वय, ट्रैफिक नियंत्रण और स्पीड लिमिट के सख्त नियम हों।

डिजिटल सुरक्षा: विहार मार्गों पर सीसीटीवी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

"साधु आत्मरक्षा नहीं करते, वे तो केवल शांति का संदेश देते हैं। अगर अहिंसा के मार्ग पर चलने वाले ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो समाज का पतन निश्चित है।" – मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज

समाज को दी 'सेल्फ डिफेंस' की सीख: बनेंगे सुरक्षा प्रकोष्ठ

मुनि श्री ने समाज को केवल सरकार पर निर्भर रहने के बजाय खुद भी सक्रिय होने को कहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि हर शहर-गांव में “संत सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ” बनाए जाएं।

विहार के समय प्रशिक्षित स्वयंसेवक साथ चलें।

स्वयंसेवक विशेष 'रिफ्लेक्टर जैकेट' पहनें ताकि दूर से पहचान हो सके।

संतों के पीछे सुरक्षा वाहन की व्यवस्था अनिवार्य हो।

एकजुटता का आह्वान: श्वेतांबर-दिगंबर अब एक मंच पर

मुनि श्री ने स्पष्ट किया कि यह संकट किसी एक पंथ का नहीं, बल्कि संपूर्ण श्रमण संस्कृति का है। उन्होंने दिगंबर और श्वेतांबर दोनों समाजों से एकजुट होने की अपील की।

गुणायतन मध्यभारत के प्रवक्ता अविनाश जैन 'विद्यावाणी' ने बताया कि मुनि श्री की प्रेरणा से पूरे देश के साथ-साथ मधुबन जैन समाज भी 25 मई को जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपेगा। सोशल मीडिया पर आक्रोश दिखाने के बजाय अब जमीन पर उतरकर अपनी ताकत दिखाने का समय आ चुका है।


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