बेगमगंज। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत आज आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। बेगमगंज वन विभाग के रेंजर अरविंद अहिरवार को ईओडब्ल्यू की टीम ने 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। इस कार्रवाई के बाद से पूरे वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
रिश्वत का 'खेल' और रेंजर की ‘जेल’
मिली जानकारी के अनुसार, बेगमगंज वन विभाग में पदस्त रेंजर अरविंद अहिरवार एक मामले के निपटारे या विभागीय काम के एवज में शिकायतकर्ता से पैसों की मांग कर रहे थे। भ्रष्टाचार की इस डिमांड से तंग आकर शिकायतकर्ता शकील अहमद ने इसकी शिकायत सागर ईओडब्ल्यू कार्यालय में की थी।
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए ईओडब्ल्यू की टीम ने जाल बिछाया। गुरुवार को जैसे ही शकील अहमद रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 5,000 रुपये लेकर रेंजर अरविंद अहिरवार के सरकारी निवास पर पहुंचे और रेंजर ने पैसे हाथ में लिए, वैसे ही पहले से घात लगाए बैठी 10 सदस्यीय टीम ने उन्हें धर दबोचा।
DSP पंकज गौतम के नेतृत्व में 10 सदस्यीय टीम का धावा
ईओडब्ल्यू के डीएसपी (DSP) पंकज गौतम ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि:
“शिकायतकर्ता शकील अहमद की शिकायत का पहले सत्यापन किया गया था। सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई। आज रेंजर अरविंद अहिरवार को उनके निवास पर 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।”
सरकारी आवास पर घंटों चली कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद ईओडब्ल्यू की टीम रेंजर को उनके आवास पर ही लेकर गई, जहां नोटों की जब्ती और हाथ धुलवाने की प्रक्रिया (Chemical Test) पूरी की गई। टीम ने रेंजर के पास से रिश्वत के पैसे बरामद कर लिए हैं। इस रेड के दौरान रेंजर अहिरवार पूरी तरह से हतप्रभ रह गए और उन्हें सफाई देने का मौका तक नहीं मिला।
भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार
बेगमगंज जैसे शांत इलाके में वन विभाग के इतने जिम्मेदार अधिकारी का रिश्वत लेते पकड़ा जाना कई सवाल खड़े करता है। ईओडब्ल्यू की इस त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश साफ कर दिया है कि जनता का शोषण करने वाले अधिकारी अब बच नहीं पाएंगे। फिलहाल टीम रेंजर के अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इस भ्रष्टाचार के तार और ऊपर तक तो नहीं जुड़े हैं।
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