इंदौर/भोपाल: मध्यप्रदेश में एक बार फिर 'हनीट्रैप' का वो खौफनाक जिन्न बोतल से बाहर आ गया है, जिसने सियासतदानों से लेकर बड़े अफसरों की नींद उड़ा दी है। इस बार का खुलासा और भी चौंकाने वाला है—यहाँ हसीनाएं अपने चेहरे की चमक (मेकअप) से ज्यादा हिडन कैमरों और जासूसी गैजेट्स की चमक पर पैसा लुटाती थीं। 'रेशू' को सियासत में रसूख चाहिए था, तो 'श्वेता' और 'अलका' की मंडली को बस करोड़ों की माया!
जेल की सलाखों के पीछे रची गई 'हनीट्रैप 2.0' की साजिश
इस पूरी कहानी की पटकथा किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, साल 2019 के कुख्यात हनीट्रैप मामले की मास्टरमाइंड श्वेता जैन और शराब तस्करी की माहिर अलका दीक्षित की मुलाकात जेल में हुई थी। वहीं पर श्वेता ने अलका को 'हनीट्रैप का मास्टरक्लास' दिया। श्वेता ने सिखाया कि कैसे जिस्म के जाल के साथ-साथ तकनीक का इस्तेमाल कर रसूखदारों को घुटनों पर लाया जाता है।
शराब कारोबारी को बनाया निशाना, मांग ली करोड़ों की ‘पार्टनरशिप’
ताजा मामला इंदौर के बाणगंगा क्षेत्र के शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान से जुड़ा है। द्वारकापुरी की अलका दीक्षित ने अपने बेटे जयदीप, लाखन चौधरी, रेशू उर्फ अभिलाषा और एक हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा के साथ मिलकर हितेंद्र को जाल में फंसाया। आरोपी महिला ने कारोबारी पर करोड़ों रुपये देने और व्यापार में पार्टनरशिप का दबाव बनाया। जब पानी सिर से ऊपर गुजर गया, तो हितेंद्र ने पुलिस की शरण ली।
क्राइम ब्रांच का 'सीक्रेट ऑपरेशन': 7 टीमें और 40 जवान
मामले की गंभीरता को देखते हुए इंदौर क्राइम ब्रांच ने एक गुप्त ऑपरेशन प्लान किया। करीब 40 जांबाज जवानों की 7 अलग-अलग टीमें बनाई गईं। पुलिस ने जाल बिछाया और पूरी गैंग को रंगे हाथों दबोच लिया। इनके पास से मोबाइल, लैपटॉप और कई ऐसे गैजेट्स मिले हैं, जिनका इस्तेमाल शिकार की 'आपत्तिजनक वीडियो' बनाने के लिए किया जाता था।
रेशू की 'सियासी अभिलाषा' और श्वेता का ‘करोड़ों का सपना’
इस गैंग में शामिल रेशू उर्फ अभिलाषा की कहानी और भी दिलचस्प है। सागर की रहने वाली रेशू भोपाल में श्वेता जैन के साथ सक्रिय थी। उसका मकसद सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि हनीट्रैप के जरिए रसूखदार नेताओं से सेटिंग कर राजनीति में बड़ा पद हासिल करना था। वहीं, श्वेता जैन का नेटवर्क इतना बड़ा है कि इस बार भी उसके निशाने पर कई बड़े नेता, अधिकारी और दिग्गज कारोबारी थे।
गैजेट्स पर खर्च होते थे लाखों रुपये
जांच में यह बात सामने आई है कि ये 'हसींनाएं' ब्यूटी पार्लर जाने से ज्यादा समय इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानों पर बिताती थीं। चश्मे में फिट कैमरा, बटन कैमरा, पेन कैमरा और हाई-क्वालिटी वॉयस रिकॉर्डर इनके असली हथियार थे। इंदौर ही नहीं, बल्कि उज्जैन और भोपाल में भी इस गैंग की सक्रियता के सुराग मिले हैं।
बड़ा सवाल: आखिर कब तक सफेदपोश लोग और रसूखदार इन हसीनाओं के जाल में फंसकर अपनी और विभाग की किरकिरी कराते रहेंगे? फिलहाल पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर रही है, जिसमें कई 'बड़े नामों' का खुलासा होने की उम्मीद है।
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