भोपाल के लोकभवन स्थित सांदीपनि सभागार में जनजातीय कल्याण और वनाधिकारों के संरक्षण को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। मध्य प्रदेश में वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन को लेकर राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह अधिनियम जनजातीय समाज के विकास, उनके जल-जंगल-जमीन के अधिकारों की सुरक्षा और उनके सशक्तिकरण का सबसे बड़ा और मजबूत माध्यम है, इसलिए इसके क्रियान्वयन में किसी भी तरह की लापरवाही या कोताही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वन अधिकार अधिनियम 2006: जनजातीय सशक्तिकरण का मूल आधार
बैठक की शुरुआत में राज्यपाल मंगुभाई पटेल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी की मौजूदगी में प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रहे वनाधिकार कार्यों की मैदानी स्थिति पर मंथन हुआ। राज्यपाल ने कहा कि इस कानून का मूल उद्देश्य वनांचल में रहने वाले आदिवासियों को उनके पारंपरिक अधिकारों से जोड़ना है। इस महत्वपूर्ण कार्य को और अधिक धारदार बनाने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों और जिम्मेदार नागरिकों का सक्रिय सहयोग लिया जाना चाहिए ताकि जमीनी स्तर पर इसका वास्तविक लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंच सके।
पेसा ग्रामों और वित्तीय पारदर्शिता पर विशेष फोकस
राज्यपाल ने बैठक के दौरान सामुदायिक वन संसाधन, उनके संरक्षण और प्रबंधन के अधिकारों की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि अधिनियम के तय प्रावधानों के मुताबिक ही ग्राम सभाओं की पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया जाना चाहिए। ग्राम सभा का माहौल हमेशा सौहार्दपूर्ण, पारदर्शी और कानून के दायरे में होना चाहिए।
पारदर्शिता का कड़ा पालन: पेसा (PESA) ग्रामों में अधिनियम की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने विशेष निर्देश दिए कि ग्राम सभा के कार्यों और वित्तीय प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता बरती जानी चाहिए।
मैदानी निरीक्षण: वित्तीय प्रबंधन और लेखा-जोखा दुरुस्त रखने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा समय-समय पर औचक और नियमित निरीक्षण भी कराए जाएं।
आगामी 15 अगस्त को वनाधिकार महाअभियान और विशेष ग्राम सभाएं
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी ने आगामी कार्ययोजना का खुलासा करते हुए बताया कि आगामी 15 अगस्त के पावन अवसर पर विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। इन ग्राम सभाओं के माध्यम से 'वन संसाधन अधिकार अभियान' को एक नई गति और विस्तार दिया जाएगा। स्थानीय स्तर पर जनजागृति पैदा करने के लिए विशेष नुक्कड़ नाटक, चौपालें और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए वन विभाग, जनजातीय कार्य विभाग और पंचायत विभाग मिलकर आपसी समन्वय के साथ काम करेंगे।
प्रशासनिक समन्वय और विभागों की संयुक्त भागीदारी
जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा ने पूरे प्रदेश में वनाधिकार कार्यों की अब तक की प्रगति का विस्तृत खाका सामने रखा। उन्होंने अधिनियम के क्रियान्वयन से जुड़ी तमाम प्रक्रियाओं को समझाया और क्षेत्र विशेष की विशिष्ट आवश्यकताओं के आधार पर कार्य करने पर जोर दिया। वहीं, वन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह ने भरोसा दिलाया कि आने वाले दिनों में वन संसाधन अधिकार से जुड़े सभी लंबित और अटके हुए मामलों को तेज गति से और पूरी पारदर्शिता के साथ समयसीमा में पूरा कर लिया जाएगा।
समीक्षा बैठक में मौजूद रहे दिग्गज अधिकारी
इस उच्चस्तरीय बैठक में शासन के कई प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार, जनजाति प्रकोष्ठ की सचिव मीनाक्षी सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) शुभरंजन सेन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक मनोज कुमार अग्रवाल सहित संबंधित विभागों के तमाम उच्चाधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों की रिपोर्ट पेश की और वनाधिकार के क्षेत्र में मध्य प्रदेश को देश में अव्वल बनाने का संकल्प लिया।
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