राजगढ़/पचोर (विदिशा भारती): मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पुलिस प्रशासन के 'नशामुक्ति अभियान 2.0' के दावों की हवा निकाल दी है। एक तरफ जहां खाकी स्मैक, गांजे और अन्य मादक पदार्थों के खिलाफ दिन-रात एक करने का दम भर रही है, वहीं दूसरी तरफ पचोर थाना क्षेत्र के पदमपुरा गांव में नेशनल हाईवे किनारे सरेआम अवैध शराब की नदी बह रही थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इस अवैध धंधे को किसी और ने नहीं, बल्कि आबकारी विभाग के चहेते लाइसेंसी शराब ठेकेदारों ने ही संरक्षण दे रखा था।
'ब्रेकफास्ट होटल' की आड़ में शराब का कॉकटेल
मामला पदमपुरा गांव का है, जहां मुख्य सड़क के किनारे कालूराम सोंधिया नाम का व्यक्ति 'ब्रेकफास्ट होटल' संचालित करता है। नाम तो नाश्ते का था, लेकिन शाम ढलते ही यहां का नजारा पूरी तरह बदल जाता था। सुबह जहां चाय की चुस्कियां ली जाती थीं, वहीं शाम होते ही यहां देशी-विदेशी ब्रांड के जाम छलकने लगते थे।
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, इस होटल के बड़े-बड़े फ्रीज और गुप्त रैक में हर समय अंग्रेजी और देशी शराब की बोतलें ठूंस-ठूंस कर भरी रहती थीं। लंबे समय से यहां बिना किसी डर और बिना किसी वैध लाइसेंस के धड़ल्ले से शराब बेची और पिलाई जा रही थी, जिससे आसपास का माहौल भी खराब हो रहा था।
ठेकेदारों की आपसी रंजिश में फूटा 'अवैध अहाते' का भंडाफोड़
इस पूरे घालमेल में सबसे चटकीला मोड़ तब आया, जब यह मामला पुलिस की मुस्तैदी से नहीं, बल्कि शराब माफियाओं की आपसी 'व्यापारिक जंग' की वजह से बाहर आ गया। पचोर के ही एक लाइसेंसी शराब ठेकेदार ने दूसरे ठेकेदार की पोल खोलते हुए पुलिस में गंभीर आरोप लगाए।
शिकायतकर्ता का सीधा आरोप: “पहले इस होटल में किसी और दुकान से माल सप्लाई होता था। लेकिन हाल ही में, आबकारी विभाग के कुछ कथित मेहरबान अफसरों की शह पर, दूसरे लाइसेंसी ठेकेदार ने यहां एंट्री मार ली। नया ठेकेदार अपनी दुकान से आधी कीमत पर (डिस्काउंट रेट पर) शराब पहुंचाने लगा, जिसके बाद यहां बाकायदा एक अवैध अहाता शुरू कर दिया गया।”
हालाँकि, इन गंभीर आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
मुख्य बिंदु: खबर पर एक नजर
स्थान: पदमपुरा गांव, पचोर थाना क्षेत्र, जिला राजगढ़ (म.प्र.)
आरोपी ठिकाना: कालूराम सोंधिया का ‘ब्रेकफास्ट होटल’
मुख्य आरोप: लाइसेंसी शराब ठेकेदारों द्वारा आधी कीमत पर अवैध शराब की सप्लाई करना।
हाई वोल्टेज ड्रामा: पुलिस के आते ही दुकान में ताला जड़कर फरार हुआ संचालक।
पुलिस एक्शन: थाना प्रभारी शकुंतला बामनिया के निर्देश पर जांच शुरू, दो दुकानें रडार पर।
खाकी की एंट्री और 'नौ दो ग्यारह' हुआ संचालक
जब ठेकेदारों की यह आपसी लड़ाई पचोर थाना प्रभारी (TI) शकुंतला बामनिया के कानों तक पहुंची, तो उन्होंने बिना वक्त गंवाए पुलिस टीम को तुरंत एक्शन के लिए रवाना कर दिया। विवेचना अधिकारी लाव-लश्कर के साथ जैसे ही पदमपुरा में होटल के करीब पहुंचे, इसकी भनक भनक संचालक कालूराम को लग गई। खाकी की गाड़ी देखते ही कालूराम सोंधिया ने गजब की फुर्ती दिखाई और दुकान में बड़ा सा ताला लटकाकर मौके से रफूचक्कर हो गया। पुलिस मौके पर हाथ मलती रह गई, लेकिन वहां से अवैध धंधे के कई पुख्ता सुराग हाथ लगे हैं।
आबकारी विभाग पर उठे सवाल, दो दुकानों पर लटकी तलवार
पचोर पुलिस की प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती तफ्तीश में क्षेत्र की दो लाइसेंसी शराब दुकानों के नाम सामने आए हैं, जहां से इस अवैध ठिकाने को फीड किया जा रहा था। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि यह पूरा तमाशा दो ठेकेदारों के आपसी मुनाफे की लड़ाई के कारण सड़क पर आया है। अब पुलिस आबकारी विभाग के साथ मिलकर इन दोनों लाइसेंसी दुकानों के स्टॉक और संलिप्तता की बारीकी से जांच कर रही है।
थाना प्रभारी शकुंतला बामनिया ने साफ कर दिया है कि यदि जांच में इन लाइसेंसी दुकानों की संलिप्तता और अवैध शराब की बिक्री की पुष्टि होती है, तो किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की सख्त धाराओं के तहत केस दर्ज कर जेल भेजा जाएगा। बहरहाल, इस पूरे मामले ने राजगढ़ में चल रहे नशामुक्ति अभियान के दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान जरूर लगा दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन रसूखदार शराब ठेकेदारों पर क्या हंटर चलाता है!
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