विदिशा भारती डेस्क
पठारी । पठारी नगर समेत समूचे अंचल में शक्ति उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि पूरी श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। जगह-जगह सजे माता के जगमगाते दरबार, भक्ति संगीत की धुनें, रंग-बिरंगी दूधिया रोशनी और भक्तों की भारी भीड़ से समूचा माहौल भक्ति रस में डूबा हुआ है। पूजा-अर्चना के इस उल्लास के बीच अब झांकी समितियों के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खिंच आई हैं। आस्था के सबसे बड़े पड़ाव यानी माता रानी की प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर इस बार गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
पठारी क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली बघरू नदी में पानी की बेहद कमी है। वजह यह है कि नदी पर बने स्टॉप डैम के लोहे के गेट महीनों पहले चोरी हो चुके हैं और डैम पूरी तरह रीता पड़ा है। पानी न रुकने से विसर्जन कुंड सूखा नजर आ रहा है, जिससे 21 अक्टूबर को होने वाले विसर्जन को लेकर आयोजन समितियों की सांसें अटकी हुई हैं।
महीनों से गायब हैं गेट, जिम्मेदार तंत्र साधे रहा मौन :
मामले की जड़ बघरू नदी पर बने स्टॉप डैम में छिपी है। खड़ाखेड़ी और चंदूली गांव के ग्रामीणों के अनुसार, अप्रैल-मई के भीषण गर्मी के महीनों में अज्ञात चोर स्टॉप डैम के भारी-भरकम लोहे के गेट उखाड़कर ले गए थे। गेट चोरी होने की जानकारी ग्रामीणों ने तत्काल संबंधित जल संसाधन और स्थानीय प्रशासनिक विभाग को दी थी।
विभागीय लापरवाही का आलम यह रहा कि महीनों बीत जाने के बाद भी न तो चोरी गए गेटों का कोई सुराग लग सका और न ही डैम पर नए गेट लगाने की कोई जहमत उठाई गई। बरसात का पूरा मौसम बीत गया, लेकिन डैम में पानी नहीं रोका जा सका। पानी बहता रहा और अब जब धार्मिक पर्व पर नदी के गहरे जलभराव और विसर्जन कुंड की सबसे ज्यादा जरूरत है, तब नदी का तल सूखा पड़ा है।
झांकी समितियों ने बयां किया दर्द:
'आस्था के साथ न हो खिलवाड़'
पठारी नगर में करीब दर्जनभर से अधिक स्थानों पर सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समितियां विशाल और मनोहारी प्रतिमाएं स्थापित कर पूजन कर रही हैं। पंडालों में आकर्षक विद्युत साज-सज्जा की गई है, लेकिन विसर्जन स्थल की बदहाली ने आयोजकों के उत्साह को फीका कर दिया है।
झांकी समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि हर वर्ष विसर्जन स्थल पर प्रशासन की ओर से औपचारिकताएं तो पूरी की जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं झांकी सदस्यों को अपनी जेब और पसीने से ही जुटानी पड़ती थीं। इस बार तो स्थिति और भी भयावह है, क्योंकि कुंड में पानी ही नहीं है।
समितियों के प्रतिनिधियों ने साफ शब्दों में कहा कि अगर समय रहते पानी का प्रबंध नहीं किया गया तो प्रतिमाओं का विधि-विधान और मर्यादा के साथ विसर्जन कर पाना असंभव हो जाएगा। छोटी प्रतिमाओं के साथ-साथ इस बार बड़ी माता की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, जिन्हें गहरे पानी में ही विसर्जित किया जा सकता है।
प्रशासन के सामने रखीं प्रमुख मांगें :
आयोजन समितियों और नगरवासियों ने स्थानीय प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर पुख्ता प्रबंध करने की मांग उठाई है:
डैम में पानी का ठहराव: स्टॉप डैम के खुले मुहाने पर मिट्टी की बोरियां (सैंड बैग्स) अथवा अस्थाई दीवार बनाकर बघरू नदी में पर्याप्त जलस्तर रोका जाए।
हाइड्रा और क्रेन की उपलब्धता: बड़ी और भारी प्रतिमाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक तरीके से जल में विसर्जित करने के लिए विसर्जन घाट पर हाइड्रा/क्रेन की अनिवार्य तैनाती हो।
सुरक्षा एवं गोताखोर दल: किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए विसर्जन कुंड के पास प्रशिक्षित गोताखोर, लाइफ जैकेट और होमगार्ड के जवानों की मौजूदगी रहे।
पर्याप्त रोशनी और संपर्क मार्ग: विसर्जन कुंड की ओर जाने वाले कच्चे रास्तों की मरम्मत कराई जाए और घाटों पर हाईमास्ट अथवा फ्लड लाइटें लगाई जाएं।
एसडीएम का आश्वासन: समय रहते दुरुस्त होंगी व्यवस्थाएं :
समितियों की चिंता और ग्रामीणों की परेशानी को लेकर जब एसडीएम मोतीलाल अहिरवार ने बताया की श्रद्धालुओं को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग के अधिकारियों को मौके का मुआयना करने के निर्देश दिए गए हैं। बघरू नदी के स्टॉप डैम पर पानी रोकने के लिए वैकल्पिक तकनीकी इंतजाम किए जाएंगे, ताकि विसर्जन कुंड में पर्याप्त जल उपलब्ध हो सके। साथ ही बड़ी प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए क्रेन और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी। किसी भी श्रद्धालु या समिति को असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
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