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प्रदेश के पटवारी: 12 से अधिक ऑनलाइन सेवाएं होंगी प्रभावित,सरकार पर बढ़ा दबाव

03-08-2026  Editor Shubham Jain  39 views
प्रदेश के पटवारी: 12 से अधिक ऑनलाइन सेवाएं होंगी प्रभावित,सरकार पर बढ़ा दबाव

भोपाल / विदिशा | दिनांक: 3 अगस्त 2026 

मध्यप्रदेश में आज यानी 3 अगस्त से राजस्व विभाग की रीढ़ कहे जाने वाले पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर प्रदेश के सभी जिलों के साथ-साथ विदिशा जिले में भी पटवारियों ने अपने दफ्तरों से दूरी बना ली है और कामकाज पूरी तरह ठप कर दिया है। संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक शासन उनकी वर्षों से लंबित एवं न्यायोचित मांगों पर कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लेता, तब तक यह आंदोलन अनवरत जारी रहेगा। इस बेमियादी हड़ताल के चलते आम जनता और किसानों के राजस्व से जुड़े तमाम जरूरी काम अधर में लटक गए हैं।

चरणबद्ध आंदोलन के बाद उठाया कड़ा कदम

मध्यप्रदेश पटवारी संघ की प्रांताध्यक्ष उपेन्द्र बघेल ने जानकारी देते हुए बताया कि पटवारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में इससे पहले चरणबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन किया था। सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए पहले चरण में पटवारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया, शासकीय व्हाट्सएप समूहों का पूरी तरह से बहिष्कार किया तथा तमाम ऑनलाइन कार्यों से भी दूरी बनाई। हालांकि, शासन स्तर पर कोई भी सार्थक पहल या ठोस आश्वासन नहीं मिलने के कारण मजबूरन संघ को इस प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल का कड़ा कदम उठाना पड़ा है।

मुख्य प्रभाव: हड़ताल के पहले दिन ही राजस्व विभाग के 12 से अधिक महत्वपूर्ण ऑनलाइन पोर्टल और मैदानी कामकाज पूरी तरह ठप हो गए हैं, जिससे शासन और आमजन दोनों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

इन 12 से अधिक ऑनलाइन सेवाओं पर पड़ेगा सीधा असर

पटवारियों की इस बेमियादी हड़ताल से राजस्व विभाग की रीढ़ माने जाने वाली एक दर्जन से अधिक डिजिटल सेवाएं और पोर्टल पूरी तरह प्रभावित हो चुके हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

ई-टेकन और वेब जीआईएस सेवाएं

सारा पोर्टल और सारा एप्लिकेशन (डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन)

आरसीएमएस (राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली) और सीएम हेल्पलाइन निराकरण

लघु सिंचाई गणना तथा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से जुड़े रिकॉर्ड सत्यापन

रिकॉर्ड स्कैनिंग, राजस्व वसूली और फार्मर रजिस्ट्रेशन (किसान पंजीयन)

इसके साथ ही नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, खसरा-खतौनी वितरण, गिरदावरी, अतिक्रमण संबंधी कार्रवाई, कब्जा दिलाने के कार्य, कानून-व्यवस्था से जुड़े राजस्व दायित्व तथा अन्य मैदानी व कार्यालयीन कार्य भी पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं। इसका सीधा और गंभीर असर अन्नदाता किसानों और आम नागरिकों पर पड़ रहा है, जिन्हें अपने छोटे-छोटे कामों के लिए चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

संघ का गंभीर आरोप: लगातार बढ़ रहा काम, मांगें अब भी लंबित

पटवारी संघ का कहना है कि वर्तमान समय में शासन द्वारा पटवारियों पर लगातार नए-नए ऑनलाइन और मैदानी कार्यों का भारी दबाव बनाया जा रहा है, जबकि उनकी वर्षों पुरानी और जायज मांगों पर आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। संघ का कड़ा आरोप है कि राजस्व प्रशासन की धुरी माने जाने वाले पटवारियों के साथ वेतनमान और पदोन्नति के मामलों में लगातार उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है।

ये हैं पटवारी संघ की प्रमुख मांगें

शासन के समक्ष संघ ने अपनी कई न्यायसंगत मांगें रखी हैं, जिन पर तत्काल निर्णय की मांग की जा रही है:

पटवारियों पर जल्द से जल्द कैडर रिव्यू लागू किया जाए।

लंबित पड़ी नायब तहसीलदार विभागीय परीक्षा का शीघ्र आयोजन हो।

पुलिसकर्मियों की तर्ज पर पटवारियों को भी जज प्रोटेक्शन एक्ट का विधिक संरक्षण प्रदान किया जाए।

अतिरिक्त कार्यों का उचित युक्तिकरण (रेशनलाइजेशन) कर उसके एवज में उचित पारिश्रमिक दिया जाए।

कर्मचारियों के पारिवारिक और मैदानी हितों के अनुरूप पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू की जाए।

वेतन विसंगति बना आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा

पटवारी संघ का मुख्य और सबसे बड़ा दर्द वेतन विसंगति को लेकर है। संघ का तर्क है कि पूरे राजस्व विभाग में केवल पटवारियों के वेतनमान में गंभीर दोहरी विसंगति बनी हुई है। वर्तमान व्यवस्था के तहत पटवारियों की नियुक्ति ₹2100 ग्रेड पे पर होती है, जबकि संघ की मांग है कि नियुक्ति के समय ही उन्हें ₹2400 ग्रेड पे मिलना चाहिए। इसी प्रकार, 10 वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद मिलने वाले प्रथम समयमान वेतनमान को ₹2400 के स्थान पर ₹2800 (जो कि राजस्व निरीक्षक के समकक्ष है) किए जाने की पुरजोर मांग की जा रही है।

संघ के नेताओं का कहना है कि राजस्व निरीक्षक, नायब तहसीलदार और तहसीलदार के पदों पर ऐसी वेतन विसंगति देखने को नहीं मिलती है, जबकि मैदानी स्तर पर सबसे अधिक कठिन जिम्मेदारियां, जोखिम और कार्यभार पटवारियों पर होता है। इसके बावजूद उनका वेतनमान और सम्मान दोनों ही कम हैं। संघ का साफ संदेश है कि "कार्यभार, जिम्मेदारी और जोखिम सबसे अधिक, लेकिन सम्मान और वेतन सबसे कम" की यह अन्यायपूर्ण स्थिति अब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सरकार से शीघ्र समाधान की अपील

समाचार लिखे जाने तक विदिशा सहित पूरे प्रदेश में पटवारियों की हड़ताल पूरी तरह असरदार नजर आ रही है। पटवारी संघ ने एक बार फिर शासन से अपील की है कि जनहित और किसानों की परेशानियों को गंभीरता से समझते हुए उनकी लंबित मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लिया जाए, ताकि राजस्व सेवाएं पुनः सुचारू हो सकें। वहीं, संघ ने दो टूक कह दिया है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।


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