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शासकीय शिक्षक सूची से बाहर, मोटी सैलरी के बावजूद BPL सूची में नाम! कुरवाई से शुरू हुई जांच, अन्य तहसीलों पर नजर

06-10-2026  Editor Shubham Jain  19 views
शासकीय शिक्षक सूची से बाहर, मोटी सैलरी के बावजूद BPL सूची में नाम! कुरवाई से शुरू हुई जांच, अन्य तहसीलों पर नजर

विदिशा। गरीबी रेखा यानी बीपीएल सूची में अपात्र लोगों के नाम शामिल होने के मामले में विदिशा जिले में प्रशासन ने जांच का दायरा बढ़ाना शुरू कर दिया है। कलेक्टर अंशुल गुप्ता के निर्देश पर कुरवाई अनुभाग में बीपीएल सूची का गहन परीक्षण और सत्यापन कराया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार जांच के दौरान आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों से जुड़े कुछ नाम सामने आए हैं, जिन्हें बीपीएल सूची के लिए अपात्र पाया गया है।

कुरवाई से शुरू हुई इस कार्रवाई के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या इसी तरह की जांच जिले की अन्य तहसीलों की बीपीएल सूचियों में भी की जाएगी? फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से अन्य तहसीलों में जांच के संबंध में कोई अलग जानकारी जारी नहीं की गई है।

कुरवाई में बीपीएल सूची की जांच तेज

जिला जनसंपर्क कार्यालय से जारी जानकारी के अनुसार कलेक्टर अंशुल गुप्ता के निर्देश पर पात्र हितग्राहियों को शासकीय योजनाओं का वास्तविक लाभ सुनिश्चित करने और अपात्र व्यक्तियों को बीपीएल सूची से हटाने की कार्रवाई की जा रही है।

इसी क्रम में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कुरवाई मोतीलाल अहिरवार के निर्देशन में अनुभाग की बीपीएल सूची का गहन परीक्षण एवं सत्यापन कराया जा रहा है।

प्रशासन का कहना है कि जांच के दौरान ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें आर्थिक रूप से संपन्न व्यक्तियों के नाम गरीबी रेखा की सूची में दर्ज पाए गए। ऐसे नामों को सूची से पृथक करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

वेयरहाउस संचालक से शिक्षक और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तक के नाम

प्रशासन द्वारा जारी जानकारी में कुरवाई तहसील के अलग-अलग गांवों के कुछ लोगों के नाम सामने आए हैं।

ग्राम पैरोखेड़ी निवासी प्राण सिंह, जो वेयरहाउस संचालक बताए गए हैं, को जांच में बीपीएल सूची के लिए अपात्र पाया गया है।

इसी गांव के पृथ्वी सिंह दांगी, जो प्राथमिक शिक्षक हैं, और उनकी पत्नी मीना दांगी, जो आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं, के नाम भी जांच में अपात्र पाए जाने की जानकारी प्रशासन ने दी है।

इसी तरह ग्राम करमेड़ी निवासी जयपाल यादव, जो सिरोंज क्षेत्र के पथरिया में नवांकर स्कूल संचालित करते हैं, तथा ग्राम माला निवासी राजमल पुत्र रघुवीर को भी बीपीएल सूची के लिए अपात्र पाए जाने की बात प्रशासन ने कही है।

इन सभी नामों को बीपीएल सूची से पृथक करने की कार्रवाई की जा रही है।

सिर्फ नाम हटेंगे या पुराने लाभ की भी होगी वसूली?

इस कार्रवाई का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सरकारी योजनाओं से मिले पूर्व लाभ से जुड़ा है। एसडीएम कुरवाई मोतीलाल अहिरवार ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में कोई व्यक्ति निर्धारित मापदंडों के अनुसार बीपीएल के लिए अपात्र पाया जाता है, तो उसका नाम सूची से हटाने के साथ-साथ पूर्व में लिए गए शासकीय आर्थिक लाभ की नियमानुसार वसूली भी की जा सकती है।

यानी जांच केवल सूची में नाम हटाने तक सीमित नहीं रहने वाली है। पात्रता के विपरीत सरकारी योजनाओं का लाभ लिए जाने की स्थिति में संबंधित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई भी संभव है।

प्रशासन ने संपन्न लोगों से की स्वेच्छा से नाम हटाने की अपील

एसडीएम ने आर्थिक रूप से संपन्न ऐसे लोगों से अपील की है जिनका नाम अभी भी गरीबी रेखा की सूची में दर्ज है कि यदि वे निर्धारित मापदंडों के अनुसार पात्र नहीं हैं, तो स्वेच्छा से अपना नाम बीपीएल सूची से पृथक कराने के लिए आवेदन करें।

प्रशासन का कहना है कि बीपीएल सूची का उद्देश्य वास्तविक रूप से जरूरतमंद परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना है। अपात्र व्यक्ति यदि सूची में बने रहते हैं और योजनाओं का लाभ लेते हैं तो इससे वास्तविक जरूरतमंद हितग्राहियों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

अब अन्य तहसीलों की बारी?

कुरवाई में बीपीएल सूची के सत्यापन से सामने आए मामलों ने जिले की अन्य तहसीलों की सूचियों को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। सवाल यह है कि क्या विदिशा, सिरोंज, गंजबासौदा, नटेरन, लटेरी, त्योंदा और अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह बीपीएल सूची का सत्यापन कराया जाएगा?

फिलहाल उपलब्ध प्रशासनिक सूचना कुरवाई अनुभाग की जांच और वहां मिले अपात्र नामों तक सीमित है। इसलिए अन्य तहसीलों में भी अपात्र नाम होने का दावा करना अभी उचित नहीं होगा। हालांकि कुरवाई की कार्रवाई के बाद जिले में बीपीएल सूची के सत्यापन को लेकर निगाहें अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

पात्र परिवारों तक पहुंचे योजनाओं का लाभ

बीपीएल सूची में पात्रता का सत्यापन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए शासन की विभिन्न योजनाओं में पात्रता तय करने में ऐसी सूचियों की भूमिका होती है।

कुरवाई में चल रही जांच का उद्देश्य प्रशासन के अनुसार यही है कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे और अपात्र लोगों के नाम सूची से हटाए जाएं। अब देखना होगा कि यह सत्यापन अभियान आगे चलकर जिले के अन्य क्षेत्रों तक कितना विस्तार पाता है।


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