प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) का सपना हर गरीब का अपना पक्का घर देखने का होता है। केंद्र और राज्य सरकारें गरीबों को मकान बनाने के लिए आर्थिक सहायता देती हैं, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें। लेकिन, धरातल पर कई बार लालफीताशाही और भ्रष्टाचार इस नेक इरादे पर पानी फेरने की कोशिश करते हैं। जब जमीनी स्तर के सरकारी नुमाइंदे ही योजनाओं को अपनी तिजोरी भरने का जरिया बना लें, तो आम आदमी की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। ऐसा ही एक शर्मनाक मामला ग्वालियर जिले से सामने आया है, जहां आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ग्राम रोजगार सहायक को 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों धर दबोचा है।
क्या है पूरा मामला?
ग्वालियर अंचल में भ्रष्टाचार के खिलाफ EOW (Economic Offences Wing) की टीम लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। ताजा मामला डबरा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम सागरपुरा (बाबूपुर) का है। यहाँ के निवासी अजय कुशवाह ने 31 जुलाई 2026 को EOW कार्यालय में एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनके वृद्ध पिता कैलाश कुशवाह को सरकार की महत्वाकांक्षी 'प्रधानमंत्री आवास योजना' के तहत एक पक्का मकान (कुटीर) आवंटित हुआ था।
नियमों के अनुसार मकान का निर्माण कार्य चल रहा था और बैंक से तीसरी तथा अंतिम किस्त के रूप में 80 हजार रुपये जारी होने थे। लेकिन इस जरूरी राशि को रिलीज करने की प्रक्रिया में जानबूझकर अड़ंगा लगाकर ग्राम लिधौरा के रोजगार सहायक सोनू शर्मा ने अवैध रूप से पैसों की मांग शुरू कर दी।
5 हजार रुपये में तय हुआ था सौदा
गरीब किसान परिवार के लिए 80 हजार रुपये की आखिरी किस्त बेहद मायने रखती है, ताकि वे अपने अधूरे मकान की छत डलवा सकें और सिर पर पक्की छत का सुकून पा सकें। लेकिन भ्रष्ट रोजगार सहायक सोनू शर्मा ने इस काम के एवज में सीधे तौर पर 5 हजार रुपये की रिश्वत मांग ली। पीड़ित परिवार इस नाजायज मांग से बेहद परेशान था। उन्होंने भ्रष्टाचार के आगे घुटने टेकने के बजाय कानून का दरवाजा खटखटाने का साहसिक फैसला किया और सीधे EOW ग्वालियर के अधिकारियों से संपर्क किया।
EOW ने बिछाया ऐसा जाल, रंगे हाथों धरा गया आरोपी
शिकायत मिलने के बाद EOW की तकनीकी टीम ने पूरी गंभीरता और गोपनीयता के साथ मामले का सत्यापन (Verification) कराया। जांच में शिकायत सौ फीसदी सही पाई गई, जिसके बाद आरोपी रोजगार सहायक सोनू शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 7 के तहत औपचारिक मामला दर्ज किया गया।
कार्रवाई को अंजाम देने के लिए EOW ने एक अचूक योजना बनाई। तय रणनीति के तहत मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को ग्राम लिधौरा के ग्राम पंचायत भवन में ही EOW की एक विशेष टीम ने जाल बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता अजय कुशवाह ने आरोपी सोनू शर्मा को 5 हजार रुपये की रिश्वत थमाई, वैसे ही आसपास मुस्तैद EOW के अधिकारियों ने उसे मौके पर ही दबोच लिया।
रासायनिक घोल से गुलाबी हुए हाथ और फिर हुई गिरफ्तारी
पकड़े जाते ही आरोपी के पैरों तले जमीन खिसक गई। EOW टीम ने औपचारिकता पूरी करते हुए आरोपी के हाथों को विशेष रासायनिक (केमिकल) घोल से धुलवाया। जैसे ही आरोपी के हाथ उस घोल में डाले गए, उसका रंग तुरंत गुलाबी हो गया, जो इस बात का अकाट्य और वैज्ञानिक प्रमाण था कि आरोपी ने अपने हाथों से रिश्वत की रकम ली है। टीम ने मौके से रिश्वत के पूरे 5000 रुपये बरामद कर लिए और आरोपी को हिरासत में ले लिया। हालांकि, कानूनी प्रावधानों के तहत औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया।
किसके नेतृत्व में हुआ बड़ा एक्शन?
यह सनसनीखेज और ताबड़तोड़ कार्रवाई पुलिस अधीक्षक (SP), आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ग्वालियर के कुशल निर्देशन और उप पुलिस अधीक्षक (DSP) शैलेन्द्र सिंह कुशवाह के नेतृत्व में गठित विशेष टीम द्वारा सफलतापूर्वक पूरी की गई। EOW की इस सख्त कार्रवाई से ग्वालियर जिले के तमाम भ्रष्ट कर्मचारियों और अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ इस तरह के ठोस एक्शन से आम जनता का प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है।
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