डिजिटल इंडिया की राह पर इंदौर शहर ने एक अलग पहचान बनाई है, लेकिन अब यही डिजिटल पेमेंट सिस्टम विवादों के घेरे में है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा यूपीआई मर्चेंट फीस (Merchant Discount Rate - MDR) लागू करने के प्रस्ताव ने इंदौर के व्यापारी वर्ग को सड़कों पर ला खड़ा किया है। चाय की दुकान से लेकर बड़े-बड़े शोरूम तक, हर जगह अब इस बात को लेकर नाराजगी है। इंदौर के 50 से अधिक व्यापारिक संगठनों ने एकजुट होकर इस मर्चेंट फीस का कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।
व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के बाद अब उन पर फीस का बोझ डालना किसी भी सूरत में जायज नहीं है। जब सरकार ने खुद नकदी से दूर हटकर डिजिटल इंडिया को अपनाने पर जोर दिया था, तो अब इस सुविधा को शुल्क के दायरे में लाना छोटे और मध्यम व्यापारियों के कारोबार को प्रभावित करेगा।
23 सितंबर को रहेगा 'नो UPI डे', नहीं होगा कोई ऑनलाइन ट्रांजैक्शन
मर्चेंट फीस के इस फैसले के खिलाफ इंदौर के व्यापारियों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। 50 से ज्यादा व्यापारिक संगठनों की संयुक्त बैठक में एक बड़ा फैसला लिया गया है। 23 सितंबर को इंदौर के व्यापारी 'नो यूपीआई डे' मनाएंगे।
इस दिन शहर का कोई भी व्यापारी यूपीआई के जरिए भुगतान स्वीकार नहीं करेगा। ग्राहकों को केवल नकद या अन्य पारंपरिक तरीकों से ही खरीदारी करनी होगी। व्यापारियों का यह कदम केंद्र सरकार और बैंकिंग तंत्र को सीधा संदेश देने की कोशिश है कि अगर मर्चेंट फीस वापस नहीं ली गई, तो वे पूरी तरह से कैश सिस्टम पर लौटने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
अहिल्या चैम्बर ऑफ कॉमर्स का रुख शाम की बैठक में होगा साफ
इंदौर के सबसे बड़े और प्रभावकारी व्यापारिक संगठन अहिल्या चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने भी इस मुद्दे पर अपनी नजरें जमा रखी हैं। हालांकि, 23 सितंबर के 'नो यूपीआई डे' आंदोलन में शामिल होने पर आधिकारिक फैसला शाम को होने वाली कोर कमेटी की बैठक में लिया जाएगा।
चैम्बर के प्रतिनिधियों का मानना है कि व्यापारिक हितों की रक्षा सबसे ऊपर है। सरकार को पत्र भेजकर इस फीस को तुरंत वापस लेने का आग्रह पहले ही किया चुका है। अगर सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिलता है, तो अहिल्या चैम्बर भी इस आंदोलन में पूरी ताकत से उतर सकता है।
पेट्रोल पंपों पर 16 अक्टूबर से लागू होगा नया नियम, 2,000 रुपये से ज्यादा का यूपीआई बंद
व्यापारियों के साथ-साथ इंदौर पेट्रोल पंप डीलर एसोसिएशन ने भी इस फैसले का खुलकर विरोध किया है। एसोसिएशन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि मर्चेंट फीस का फैसला वापस नहीं लिया गया, तो वे 16 अक्टूबर से बड़ा कदम उठाएंगे।
नये नियम के मुताबिक:
16 अक्टूबर से किसी भी पेट्रोल पंप पर 2,000 रुपये से अधिक का भुगतान यूपीआई से स्वीकार नहीं किया जाएगा।
2,000 रुपये से अधिक के पेट्रोल या डीजल की खरीद पर ग्राहकों को नकद में ही भुगतान करना होगा।
केवल 2,000 रुपये तक के छोटे भुगतानों के लिए ही यूपीआई चालू रहेगा।
पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि उनका मुनाफा पहले से ही बहुत सीमित मार्जिन पर तय होता है। ऐसे में यदि यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वसूला जाएगा, तो उनका बचा हुआ मार्जिन भी खत्म हो जाएगा। इससे उनके व्यवसाय का संचालन मुश्किल हो जाएगा।
क्या है MDR और क्यों हो रहा है इतना भारी विरोध?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR वह शुल्क होता है जो बैंक या पेमेंट सेवा प्रदाता कंपनी व्यापारी से हर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर वसूलती है। अब तक यूपीआई पूरी तरह से मुफ्त था, जिसके कारण छोटे व्यापारी भी इसे बिना किसी हिचकिचाहट के अपना रहे थे।
व्यापारियों के विरोध के प्रमुख कारण:
मार्केट मार्जिन पर असर: छोटे खुदरा विक्रेताओं का मुनाफा 2 से 5 प्रतिशत होता है। ऐसे में MDR लगने से उनका मुनाफा आधा रह जाएगा।
ग्राहकों के साथ विवाद की आशंका: व्यापारी यदि यह चार्ज ग्राहकों पर डालेंगे, तो दुकान पर ग्राहकों के साथ बहस बढ़ेगी।
कैश इकोनॉमी की वापसी: अगर यूपीआई महंगा होगा, तो व्यापारी फिर से नकद लेन-देन को प्राथमिकता देंगे, जिससे डिजिटल इंडिया के मिशन को धक्का लगेगा।
इंदौर की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है बड़ा असर
इंदौर मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी है। यहां रोजाना करोड़ों रुपये का डिजिटल लेन-देन होता है। सब्जी मंडी से लेकर क्लॉथ मार्केट, सराफा बाजार और सियागंज जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों में यूपीआई का उपयोग सबसे ज्यादा होता है।
यदि 23 सितंबर को 'नो यूपीआई डे' पूरी तरह सफल रहता है, तो इससे शहर के दैनिक कारोबार पर बड़ा असर पड़ेगा। बैंक सर्वरों और ऑटोमैटिक टेलर मशीनों (ATM) पर भी अचानक कैश निकालने का दबाव बढ़ सकता है। आम जनता को सलाह दी जा रही है कि वे 23 सितंबर के लिए अपने पास पर्याप्त नकद राशि रखें ताकि दैनिक खरीदारी में कोई परेशानी न हो।
व्यापारी संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि दिल्ली पत्र भेजने का दौर अब खत्म हो चुका है। अब अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो यह आंदोलन केवल इंदौर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है।
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