भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मंत्रालय (वल्लभ भवन) में तबादलों के नाम पर चल रहे 'खेले' का पर्दाफाश हो गया है। कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना के कार्यालय में हुई रिश्वतखोरी की शिकायत के बाद सरकार ने कड़ा एक्शन लेते हुए तीन बड़े अधिकारियों-कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मध्यप्रदेश में 1 जून से 16 जून 2026 तक तबादलों से प्रतिबंध हटाया गया था। इस दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों के ट्रांसफर की प्रक्रिया चल रही थी। लेकिन इसी बीच, मंत्रालय से ऐसी खबरें छनकर बाहर आईं कि तबादलों के बदले मोटी रकम की मांग की जा रही है। इन शिकायतों के बाद शासन स्तर पर हड़कंप मच गया और आनन-फानन में जांच शुरू की गई। जांच के बाद जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले थे, जिसके बाद सरकार ने सीधे मंत्री के कार्यालय पर ही सर्जिकल स्ट्राइक कर दी।
इन पर गिरी गाज: कौन-कौन हुआ सस्पेंड?
सरकार द्वारा जारी आदेशों में तीन नाम प्रमुख हैं, जो सीधे तौर पर कृषि मंत्री के कामकाज से जुड़े थे:
अशोक कुमार बाथम (OSD): कृषि मंत्री के OSD पद पर तैनात बाथम पर गंभीर आरोप लगे थे। विभाग ने 'मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966' के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया है। अब उनका मुख्यालय सीधी जिला तय किया गया है, यानी उन्हें भोपाल से काफी दूर अपनी हाजिरी लगानी होगी।
दिनेश भकोरिया (PA): मंत्री के पर्सनल असिस्टेंट दिनेश भकोरिया पर भी तबादले के बदले रिश्वत मांगने के पुख्ता आरोप हैं। उन्हें सस्पेंड कर उनका मुख्यालय सामान्य प्रशासन विभाग (GAD पूल), मंत्रालय भोपाल तय किया गया है।
अंकित अवधिया (स्टेनो टाइपिस्ट): इस तिकड़ी के तीसरे सदस्य अंकित अवधिया को भी सस्पेंड कर दिया गया है। उन पर भी यही गंभीर आरोप लगे हैं। इन्हें भी GAD पूल में अटैच किया गया है।
मंत्रालय में 'जीरो टॉलरेंस' का संदेश
सरकार का यह एक्शन साफ संकेत देता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जा रही है। ट्रांसफर-पोस्टिंग का काम सुचिता के साथ हो, इसके लिए मंत्रालय ने एक कड़ा संदेश दिया है। सूत्रों की मानें तो रिश्वतखोरी से जुड़ी अन्य शिकायतों की भी फाइलें खंगाली जा रही हैं और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नाम इस सूची में शामिल हो सकते हैं।
विपक्ष का हमला, सरकार सतर्क
इस पूरी कार्रवाई ने प्रदेश की सियासत को भी गरमा दिया है। एक तरफ जहां भ्रष्टाचार के आरोपों ने सरकार की किरकिरी कराई है, वहीं सस्पेंशन की त्वरित कार्रवाई कर सरकार डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। फिलहाल मंत्रालय के अन्य विभागों में भी इस कार्रवाई के बाद दहशत का माहौल है।
तबादलों के इस 'रिश्वत कांड' ने यह साफ कर दिया है कि मंत्रालय की फाइलों के बीच अब भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है। देखना यह होगा कि इस कार्रवाई के बाद आगे क्या बड़े कदम उठाए जाते हैं।
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