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MP में अब इंसाफ में नहीं होगी देरी! राष्ट्रपति ने दी 'माध्यस्थम

06-05-2026  Editor Shubham Jain  9 views
MP में अब इंसाफ में नहीं होगी देरी! राष्ट्रपति ने दी 'माध्यस्थम

भोपाल: मध्य प्रदेश में अब कानूनी लड़ाइयों और ठेके-विवादों के निपटारे में सालों-साल का इंतजार खत्म होने वाला है। प्रदेश सरकार के 'मप्र माध्यस्थम अधिकरण (संशोधन) विधेयक' को महामहिम राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ ही अब यह विधेयक पूरे प्रदेश में एक सशक्त अधिनियम के रूप में लागू हो गया है।

इस कानून के प्रभावी होने से प्रदेश में सरकारी अनुबंधों और निर्माण कार्यों से जुड़े विवादों के निपटारे में तेजी आएगी, जिससे न केवल समय बचेगा बल्कि भ्रष्टाचार और अनावश्यक लेटलतीफी पर भी लगाम लगेगी।

क्यों पड़ी इस बड़े बदलाव की जरूरत?

इस संशोधन की नींव माननीय सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले में छिपी है। दरअसल, सिविल अपील क्रमांक 4250/2018 (मेसर्स ऐस्सेल इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड बनाम मप्र राज्य) की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कड़ी टिप्पणी की थी। कोर्ट ने पाया था कि माध्यस्थम (Arbitration) की कार्यवाहियों में बहुत अधिक समय लग रहा है, जिससे न्याय की मूल भावना प्रभावित हो रही है।

"राज्य सरकार को समयबद्धता (Time-bound disposal) की अनिवार्य रूप से मॉनिटरिंग करनी चाहिए ताकि कानूनी कार्यवाहियों में बेवजह की देरी न हो।" - सुप्रीम कोर्ट

नए कानून की 3 बड़ी खास बातें

समय सीमा का पालन: अब माध्यस्थम अधिकरण के अध्यक्ष को यह सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा कि किसी भी मामले की सुनवाई में अनुचित देरी न हो।

मुख्य न्यायाधीश की निगरानी: यदि समयबद्धता का पालन नहीं किया जाता है, तो हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को यह अधिकार होगा कि वे मामले में आवश्यक कदम उठा सकें।

पारदर्शिता और जवाबदेही: नए नियमों के आने से अधिकारियों और संबंधित पक्षों की जवाबदेही तय होगी, जिससे फाइलों के धूल फांकने का दौर खत्म होगा।

क्या होगा आम जनता और ठेकेदारों को फायदा?

अक्सर देखा जाता है कि सरकारी प्रोजेक्ट्स में पेमेंट या काम को लेकर विवाद होने पर मामला सालों तक ट्रिब्यूनल में अटका रहता है। इससे विकास कार्य रुक जाते हैं और प्रोजेक्ट की लागत भी बढ़ जाती है। अब इस संशोधन के बाद:

विवादों का निपटारा Fast-track मोड पर होगा।

निवेशकों और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों का भरोसा सरकार पर बढ़ेगा।

न्यायिक प्रणाली में 'पेंडेंसी' (लंबित मामलों) का बोझ कम होगा।

सरकार का मास्टरस्ट्रोक

मध्य प्रदेश विधानसभा ने इस विधेयक को 6 अगस्त 2025 को पारित किया था। तभी से इसे राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार था। अब गजट नोटिफिकेशन के साथ ही प्रशासन ने इसे लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह कदम "Ease of Doing Business" की दिशा में मध्य प्रदेश सरकार का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक साबित होगा।


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