मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मृगेंद्र सिंह के WhatsApp अकाउंट ब्लॉक किए जाने के मामले में दायर याचिका का निपटारा कर दिया है। सुनवाई के दौरान WhatsApp की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता के दोनों अकाउंट बहाल कर दिए गए हैं और वे अब सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के बाद जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने कहा कि जब दोनों अकाउंट बहाल हो चुके हैं, तो मामले में आगे किसी निर्देश की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया।
यह मामला डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अकाउंट ब्लॉक किए जाने और शिकायत निवारण व्यवस्था के जरिए समाधान नहीं मिलने से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने अदालत का रुख करते हुए अपने दोनों अकाउंट बहाल कराने की मांग की थी।
एकतरफा अकाउंट ब्लॉक करने के खिलाफ दायर की थी याचिका
याचिका में मृगेंद्र सिंह ने बताया था कि वह कई वर्षों से WhatsApp का इस्तेमाल अपने व्यवसाय और पेशे से जुड़े महत्वपूर्ण संचार माध्यम के रूप में कर रहे हैं। उनके मुताबिक, कंपनी ने उनके अकाउंट को एकतरफा तरीके से ब्लॉक कर दिया था, जिससे उनके कामकाज और संपर्क व्यवस्था पर असर पड़ा।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा था कि उन्होंने कंपनी की शिकायत निवारण व्यवस्था के समक्ष अपनी समस्या रखी, लेकिन वहां से उन्हें अपेक्षित समाधान नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की।
दोनों अकाउंट बहाल होने की दी गई जानकारी
सुनवाई के दौरान WhatsApp की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के दोनों अकाउंट बहाल कर दिए गए हैं और वे काम कर रहे हैं। इस जानकारी के बाद अदालत ने मामले की मौजूदा स्थिति पर विचार किया।
जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने कहा कि जब याचिकाकर्ता के दोनों अकाउंट बहाल हो चुके हैं, तो अब इस मामले में किसी अतिरिक्त निर्देश की आवश्यकता नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया।
पहले केंद्र सरकार से भी मांगे गए थे निर्देश
मामले की इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील को मामले में आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए समय दिया था। अदालत ने याचिकाकर्ता को यह भी निर्देश दिया था कि वह अपनी याचिका की एक प्रति Meta की ओर से पेश होने वाले वकील को उपलब्ध कराए।
Meta, WhatsApp का स्वामित्व और संचालन करने वाली कंपनी है। मामले में केंद्र सरकार और संबंधित कंपनियों की ओर से पक्ष रखा गया था।
दोनों पक्षों के वकीलों ने की पैरवी
याचिकाकर्ता मृगेंद्र सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल और अधिवक्ता घुंचा रसूल पेश हुए। केंद्र सरकार की ओर से सचिन जैन ने पक्ष रखा। WhatsApp की ओर से अधिवक्ता स्वाति अग्रवाल, वारिश के. सावलानी और अभिजीत अवस्थी उपस्थित हुए, जबकि Meta की ओर से सत्यम शुक्ला ने पैरवी की।
अदालत के समक्ष WhatsApp के दोनों अकाउंट बहाल होने की जानकारी रखे जाने के बाद मामला आगे की सुनवाई के बिना निपट गया।
अकाउंट बहाली के बाद खत्म हुई कानूनी कार्यवाही
इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला याचिकाकर्ता के दोनों अकाउंट बहाल किए जाने की जानकारी पर आधारित रहा। अदालत ने अकाउंट ब्लॉक करने की कार्रवाई के सभी पहलुओं पर कोई व्यापक निष्कर्ष दर्ज करने के बजाय यह माना कि बहाली के बाद मामले में अतिरिक्त निर्देश की आवश्यकता नहीं है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अकाउंट ब्लॉक होने से व्यवसाय, पेशेवर संपर्क और दैनिक संवाद प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे मामलों में प्लेटफॉर्म की शिकायत निवारण व्यवस्था और समाधान की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। मृगेंद्र सिंह के मामले में अकाउंट बहाल होने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
Leave a comment
Your email address will not be published. Required fields are marked *