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बदनावर में 4 हजार की रिश्वत लेते बिजली विभाग का

23-10-2026  Vidisha Bharti Desk  18 views
बदनावर में 4 हजार की रिश्वत लेते बिजली विभाग का

बदनावर/धार। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए लोकायुक्त पुलिस इंदौर की टीम ने 23 अक्टूबर को बदनावर ग्रामीण क्षेत्र में बिजली विभाग के एक लाइन परिचालक को 4 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ने की कार्रवाई की। आरोपी की पहचान सौरभ कुमार जैन के रूप में हुई है, जो मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में लाइन परिचालक के पद पर कार्यरत बताया गया है।ImgResizer_20261023_1630_22187
मामला अस्थायी बिजली कनेक्शन को स्थायी कराने के बदले कथित रूप से रिश्वत मांगने से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि कनेक्शन स्थायी करने के लिए उससे कुल 20 हजार रुपये मांगे गए थे। लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

स्थायी कनेक्शन के लिए मांगे थे 20 हजार

शिकायतकर्ता राजेश दास, निवासी बालोदा माझी, बदनावर ने लोकायुक्त पुलिस को बताया था कि उसके पिता के नाम पर बिजली का अस्थायी कनेक्शन था, जिसे स्थायी कराना था। आरोप के अनुसार, इस काम के बदले लाइन परिचालक ने 20 हजार रुपये की मांग की थी।

शिकायतकर्ता का दावा था कि वह पहले ही 10 हजार रुपये नकद और 5 हजार रुपये ऑनलाइन दे चुका था। शेष राशि में से 4 हजार रुपये देने के लिए उस पर दबाव बनाया जा रहा था। इसके बाद उसने लोकायुक्त पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत के सत्यापन के बाद ट्रैप

शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने मामले की जांच और आवश्यक प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद 23 अक्टूबर को बदनावर ग्रामीण क्षेत्र में ट्रैप कार्रवाई की गई। लोकायुक्त की टीम ने कथित तौर पर 4 हजार रुपये की रिश्वत लेते समय लाइन परिचालक सौरभ कुमार जैन को पकड़ने की कार्रवाई की।

कार्रवाई महानिदेशक योगेश देशमुख के निर्देश, डीआईजी मनोज सिंह के मार्गदर्शन और एसपी राजेश सहाय के नेतृत्व में की गई। ट्रैप दल में निरीक्षक सचिन पटेरिया की टीम शामिल रही।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस

लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

स्थायी बिजली कनेक्शन जैसी जरूरी सेवा के लिए कथित रिश्वत मांगने का यह मामला एक बार फिर सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को सामने लाता है। हालांकि, आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।


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