भोपाल। राजधानी भोपाल में मां दुर्गा की भक्ति, आस्था और उत्साह का भव्य नजारा देखने को मिला। श्री महाराणा प्रताप मंच भोपाल एवं करणी सेना परिवार, टीम जीवन सिंह शेरपुर के तत्वावधान में आयोजित प्रथम वर्ष का दुर्गा प्रतिमा विसर्जन चल समारोह श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। चल समारोह में सैकड़ों दुर्गा उत्सव समितियों की सहभागिता रही। ढोल-ताशों की गूंज, आकर्षक विद्युत सज्जा, चलित झांकियों और मां दुर्गा के जयकारों से राजधानी का माहौल भक्तिमय हो गया।
आयोजकों के अनुसार, समारोह के दौरान एक ही रात में पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के दर्शन किए। आयोजन में 200 से अधिक दुर्गा प्रतिमाएं, 30 आकर्षक चलित झांकियां और 170 डीजे शामिल रहे। देर रात तक सड़कों पर श्रद्धालुओं की भीड़ और उत्सव समितियों का उत्साह देखने को मिला।
200 से अधिक प्रतिमाओं ने बढ़ाई समारोह की भव्यता
दुर्गा विसर्जन चल समारोह में शामिल प्रतिमाएं आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहीं। विभिन्न दुर्गा उत्सव समितियों ने अपनी प्रतिमाओं को आकर्षक रूप से सजाया। विद्युत रोशनी, साज-सज्जा और धार्मिक प्रतीकों से सुसज्जित प्रतिमाओं के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे।
चल समारोह में शामिल 30 चलित झांकियों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। धार्मिक प्रसंगों और आकर्षक प्रस्तुतियों से सजी झांकियों के साथ डीजे और ढोल-ताशों की धुनों ने उत्सव के माहौल को और जीवंत बनाया। जगह-जगह श्रद्धालु मां दुर्गा के जयकारे लगाते नजर आए।
सुंदर प्रतिमाओं को शील्ड, मेडल और प्रमाणपत्र
इस आयोजन की खास पहल उत्कृष्ट दुर्गा प्रतिमाओं को सम्मानित करना रही। श्री महाराणा प्रताप मंच की ओर से सुंदर और आकर्षक प्रतिमाओं के लिए शील्ड, मेडल और प्रमाणपत्र वितरित किए गए। आयोजकों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य दुर्गा उत्सव समितियों की मेहनत, रचनात्मकता और धार्मिक समर्पण को प्रोत्साहित करना है।
प्रतिमाओं के सम्मान की इस पहल ने आयोजन को अलग पहचान दी। दुर्गा उत्सव समितियां हर वर्ष अपनी प्रतिमाओं की साज-सज्जा और धार्मिक प्रस्तुतियों में विशेष मेहनत करती हैं। ऐसे में सम्मान समारोह को उनके प्रयासों की सराहना के रूप में देखा गया।
सेंट्रल लाइब्रेरी से शुरू हुआ चल समारोह
आयोजकों के मुताबिक, दुर्गा प्रतिमा विसर्जन चल समारोह शाम 7:30 बजे भोपाल के ऐतिहासिक सेंट्रल लाइब्रेरी परिसर, भारत टॉकीज चौराहे से शुरू हुआ। यहां से चल समारोह इतवारा, मंगलवारा, हनुमानगंज, जनकपुरी, भवानी चौक और सोमवारा सहित पारंपरिक मार्गों से आगे बढ़ा।
पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। जगह-जगह लोगों ने चल समारोह में शामिल प्रतिमाओं और झांकियों के दर्शन किए। धार्मिक उत्साह के बीच देर रात तक कार्यक्रम जारी रहा।
रानी कमलापति घाट पर हुआ विसर्जन
रातभर चले चल समारोह का समापन सुबह किलोल पार्क स्थित रानी कमलापति घाट पर हुआ। यहां विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा को विदाई देते हुए अगले वर्ष फिर आने की कामना की।
धार्मिक आयोजनों में विसर्जन का विशेष महत्व होता है। नवरात्र के दौरान पूजा-अर्चना के बाद प्रतिमाओं का विसर्जन श्रद्धा और परंपरा के साथ किया जाता है। भोपाल में आयोजित इस चल समारोह में भी इसी धार्मिक परंपरा के अनुरूप कार्यक्रम संपन्न हुआ।
आयोजकों ने जताया आभार
समारोह के सफल आयोजन पर श्री महाराणा प्रताप मंच भोपाल एवं करणी सेना परिवार, टीम जीवन सिंह शेरपुर की ओर से दुर्गा उत्सव समितियों, मंच के पदाधिकारियों, पुलिस प्रशासन, प्रशासनिक अमले और भोपाल की धर्मप्रेमी जनता के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
आयोजकों ने आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। बड़ी संख्या में प्रतिमाओं, झांकियों और श्रद्धालुओं की भागीदारी के बीच कार्यक्रम का संपन्न होना आयोजन से जुड़े लोगों के लिए उत्साह का विषय रहा।
आस्था, सहभागिता और सम्मान का संगम
भोपाल का यह दुर्गा विसर्जन चल समारोह धार्मिक आस्था, जनसहभागिता और उत्सव की भव्यता का प्रमुख आकर्षण बना। प्रतिमाओं और झांकियों के साथ श्रद्धालुओं की भागीदारी ने आयोजन को यादगार बनाया। वहीं, उत्कृष्ट दुर्गा प्रतिमाओं को सम्मानित करने की पहल ने उत्सव समितियों के प्रयासों को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया।
विदिशा भारती के लिए रिपोर्ट।
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