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MP Farmers News: भारतीय किसान संघ ने CM को सौंपा 33 मांगों का ज्ञापन,MSP और बिजली पर उठाए मुद्दे

03-11-2026  Vidisha Bharti Desk  19 views
MP Farmers News: भारतीय किसान संघ ने CM को सौंपा 33 मांगों का ज्ञापन,MSP और बिजली पर उठाए मुद्दे

भोपाल। मध्यप्रदेश के किसानों की समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ ने मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित किसान मंच की बैठक में व्यापक मांग-पत्र सौंपा। 3 नवंबर 2026 को हुई इस बैठक में कृषि, सिंचाई, बिजली, राजस्व, मंडी व्यवस्था और भूमि अधिग्रहण से जुड़े 33 प्रमुख मुद्दे उठाए गए। मुख्यमंत्री ने किसानों की समस्याओं पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए उनके समाधान का आश्वासन दिया।

भारतीय किसान संघ ने मांग की कि प्रदेश में किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने और खेती की लागत कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। संगठन ने फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी, आवारा पशुओं से फसल सुरक्षा, बिजली व्यवस्था में सुधार, अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने और राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।

गेहूं, चना, सरसों और मक्का की MSP पर खरीदी की मांग

भारतीय किसान संघ ने मांग-पत्र में फसल खरीदी को प्रमुखता से उठाया। संगठन ने कहा कि गेहूं, चना, सरसों और मक्का सहित प्रदेश की सभी प्रमुख फसलों की समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी की तैयारी पहले से शुरू की जाए।

इसके साथ ही सिंघाड़े की खेती करने वाले किसानों के हित में भी उचित मूल्य निर्धारण की व्यवस्था करने की मांग रखी गई।

संगठन का कहना है कि किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए और खरीदी व्यवस्था में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

जंगली जानवरों से फसल बचाने और मुआवजे की मांग

किसान संघ ने खेतों में घोड़ा रोज, जंगली सुअर, हिरण और वानर सहित अन्य जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान का मुद्दा उठाया।

संगठन ने मांग की कि जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान का उचित मुआवजा किसानों को दिया जाए। साथ ही इन जानवरों को सुरक्षित जंगलों में छोड़ने की व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों की फसलें सुरक्षित रह सकें।

गाय पालने वाले किसानों को भी मिले आर्थिक अनुदान

भारतीय किसान संघ ने गौवंश पालन को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष आर्थिक सहायता की मांग की। संगठन का कहना है कि जिस तरह गौशालाओं को अनुदान दिया जाता है, उसी तरह घरों और निजी स्तर पर गाय पालने वाले गोपालकों को भी आर्थिक अनुदान मिलना चाहिए।

इससे गौपालन को प्रोत्साहन मिलने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहायता मिलेगी।

मंडियों में टेस्टिंग मशीन और 10 टन के तौल कांटे लगाने की मांग

किसान संघ ने प्रदेश की कृषि मंडियों की व्यवस्था में सुधार का मुद्दा भी उठाया। संगठन ने मंडी अधिनियम का सख्ती से पालन कराने की मांग की।

इसके अलावा मंडियों में डॉकोज (Dokoz) टेस्टिंग मशीनें लगाने और 10 टन क्षमता वाले तौल कांटे स्थापित करने की मांग रखी गई, ताकि किसानों की उपज की गुणवत्ता और वजन की जांच बेहतर तरीके से हो सके।

नामांतरण और बंटवारे के मामलों में तय हो समय-सीमा

किसानों को राजस्व विभाग से जुड़े कामों में होने वाली परेशानियों का मुद्दा भी बैठक में प्रमुखता से उठा।

भारतीय किसान संघ ने अविवादित नामांतरण, बंटवारे और सीमांकन के मामलों के निराकरण के लिए निश्चित समय-सीमा तय करने की मांग की। संगठन ने कहा कि अधिकारियों की जवाबदेही भी निर्धारित होनी चाहिए।

इसके साथ ही नामांतरण के लिए 5 से 6 साल पुराने रिकॉर्ड मांगने की प्रक्रिया बंद करने और राजस्थान की तर्ज पर अविवादित मामलों में 1,000 रुपये के स्टांप पर हक त्याग मान्य करने की मांग रखी गई।

बिजली कटौती और खराब ट्रांसफार्मर से मिले राहत

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की समस्या को लेकर भी किसान संघ ने सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

- ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती की समस्या का समाधान किया जाए।

- ओवरलोड ट्रांसफार्मरों का भार कम किया जाए।

- पुराने और खराब बिजली तार बदले जाएं।

- मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि ट्रांसफार्मर योजना तत्काल शुरू की जाए।

संगठन ने कहा कि खेती के लिए समय पर बिजली मिलना जरूरी है। बिजली व्यवस्था में सुधार से किसानों को सिंचाई के दौरान होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी।

अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने की मांग

बैठक में प्रदेश की कई सिंचाई परियोजनाओं का मुद्दा भी उठाया गया। भारतीय किसान संघ ने मांग की कि अधूरी परियोजनाओं और नहरों का काम तेजी से पूरा किया जाए।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

- बिजलवाड़ा सिंचाई परियोजना, बड़वानी-खरगोन।

- ओंकारेश्वर सिंचाई परियोजना का चतुर्थ चरण।

- कुंडालिया सिंचाई परियोजना, आगर।

- मोरंड जंजाल सिंचाई परियोजना।

- अन्य अधूरी नहरों के अंतिम छोर यानी टेल तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था।

संगठन ने कहा कि सिंचाई परियोजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब नहरों के अंतिम छोर तक किसानों को पानी उपलब्ध हो।

भूमि अधिग्रहण में किसानों की सहमति और बाजार दर की मांग

भारतीय किसान संघ ने विकास प्राधिकरणों और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। संगठन ने विकास प्राधिकरणों को भंग करने की मांग रखी।

इसके साथ ही लैंड पुलिंग के बजाय केवल राष्ट्रीय हित से जुड़े कार्यों के लिए किसानों की सहमति से बाजार दर पर भूमि अधिग्रहण करने की मांग की गई।

कृषि उपकरणों से GST हटाने सहित कई अन्य मांगें

किसान संघ ने खेती की लागत कम करने और किसानों को राहत देने के लिए अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी मुख्यमंत्री के सामने रखीं।

इनमें कृषि उपकरणों पर GST समाप्त करना, पराली प्रबंधन की उचित व्यवस्था, खाद की पर्याप्त उपलब्धता, खेत सड़क योजना दोबारा शुरू करना और डिफाल्टर किसानों को नियमित करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

इसके अलावा मध्यप्रदेश में पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नोलॉजी एवं मैनेजमेंट का शिक्षण संस्थान स्थापित करने की मांग भी रखी गई।

किसान मंच की बैठक में प्रदेशभर के पदाधिकारी रहे मौजूद

मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित बैठक में भारतीय एग्रो इकोनॉमिक रिसर्च सेंटर के अखिल भारतीय अध्यक्ष प्रमोद चौधरी, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेन्द्र सिंह पटेल, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य गिरिजा ठाकुर, मध्य क्षेत्र संगठन मंत्री महेश चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना उपस्थित रहे।

इसके अलावा प्रदेश महामंत्री चंद्रकांत गौर, मध्यभारत प्रांत संगठन मंत्री भरत पटेल, महाकौशल प्रांत संगठन मंत्री तुलाराम, प्रांत महामंत्री प्रहलाद पटेल, मालवा प्रांत संगठन मंत्री अतुल माहेश्वरी, दिनेश शर्मा, लक्ष्मीनारायण पटेल, रमेश दांगी, राजेंद्र, शिवनंदन रघुवंशी, जगराम यादव, सर्वज्ञ दीवान, नमो नारायण दीक्षित, नवनीत रघुवंशी, आरसी पटेल और ओम नारायण पचौरी सहित अन्य प्रदेश पदाधिकारी मौजूद रहे।

अब 33 मांगों पर सरकार के फैसले का इंतजार

भारतीय किसान संघ की ओर से सौंपे गए मांग-पत्र में किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने बैठक में समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया है।

अब किसानों की नजर सरकार की आगामी कार्रवाई पर रहेगी। खासतौर पर MSP पर खरीदी, बिजली व्यवस्था, खाद की उपलब्धता, सिंचाई परियोजनाओं और राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं में सुधार को लेकर सरकार क्या निर्णय लेती है, यह महत्वपूर्ण होगा।

किसान संघ को उम्मीद है कि बैठक में उठाए गए 33 बिंदुओं पर शासन स्तर से ठोस कदम उठाए जाएंगे और किसानों को उनकी समस्याओं से राहत मिलेगी।


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