भोपाल/बेंगलुरु। करीब 4,600 करोड़ रुपये के कथित अवैध वित्तीय लेन-देन को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की टीमों ने मध्यप्रदेश से लेकर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु तक एक साथ छापेमारी की है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, मध्यप्रदेश में एक और बेंगलुरु में दो स्थानों पर जांच एजेंसी ने दबिश दी। यह कार्रवाई आरपीएफएस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मिली शिकायतों के आधार पर की गई है।
जांच का दायरा विदेशी कंपनियों, फर्जी कारोबारी संस्थाओं, अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और डिजिटल करेंसी के माध्यम से हुए कथित लेन-देन तक फैला हुआ है। शुरुआती जानकारी में करीब 4,600 करोड़ रुपये की रकम विदेश भेजे जाने और वित्तीय लेन-देन में कथित गड़बड़ियों की बात सामने आई है। इस मामले में सिंगापुर और दुबई के बीच हुए कथित वित्तीय लेन-देन के सुराग मिलने की जानकारी भी सामने आई है।
मध्यप्रदेश और बेंगलुरु में एक साथ ED की रेड
प्रवर्तन निदेशालय की इस कार्रवाई ने मध्यप्रदेश से लेकर बेंगलुरु तक हलचल पैदा कर दी है। जानकारी के अनुसार, ईडी की अलग-अलग टीमों ने तीन स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इनमें मध्यप्रदेश का एक स्थान और बेंगलुरु के दो स्थान शामिल बताए जा रहे हैं।
आरपीएफएस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मिली शिकायतों के बाद जांच एजेंसी ने यह कार्रवाई की है। ईडी इस पूरे वित्तीय नेटवर्क और उससे जुड़े कथित लेन-देन की पड़ताल कर रही है।
फिलहाल मध्यप्रदेश में छापेमारी वाले स्थान की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। इसी तरह जांच के दौरान किन-किन लोगों से पूछताछ की गई और कौन से दस्तावेज बरामद हुए, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी भी सामने आना बाकी है।
विदेशी कंपनियों के नाम पर भारत से संचालन का आरोप
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस मामले में विदेशों में पंजीकृत कंपनियों का संचालन भारत से किए जाने की आशंका जताई गई है। आरोप है कि फर्जी कंपनियों और विदेशी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन किया गया।
जांच का मुख्य पहलू यह है कि कथित तौर पर विदेशी कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के नेटवर्क के माध्यम से करीब 4,600 करोड़ रुपये का हेर-फेर विदेशों में किया गया।
ईडी इस पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली, कंपनियों के बीच वित्तीय संबंधों और सीमापार लेन-देन से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।
Metress और Saver Money प्लेटफॉर्म भी जांच के दायरे में
मिली जानकारी के अनुसार, आरपीएफएस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड पर Metress और Saver Money नामक प्लेटफॉर्म के माध्यम से कथित वित्तीय गतिविधियां संचालित करने के आरोप हैं।
इन प्लेटफॉर्म के जरिए सीमापार ट्रेडिंग और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन किए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी इन प्लेटफॉर्म की भूमिका और इनके माध्यम से हुए ट्रांजेक्शन की पड़ताल कर रही है।
इस पूरे मामले में यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि संबंधित प्लेटफॉर्म का संचालन किस प्रकार किया जा रहा था और इनके माध्यम से किन कंपनियों तथा खातों के बीच रकम का लेन-देन हुआ।
USDT और USDC डिजिटल करेंसी के जरिए ट्रांजेक्शन का आरोप
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू डिजिटल करेंसी भी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, कथित वित्तीय लेन-देन में USDT और USDC का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
USDT और USDC डिजिटल करेंसी यानी स्टेबलकॉइन की श्रेणी में आते हैं। इनका मूल्य अमेरिकी डॉलर से जुड़ा होता है। अंतरराष्ट्रीय डिजिटल लेन-देन में इनका इस्तेमाल किया जाता है।
जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन डिजिटल करेंसी के माध्यम से कितनी रकम का लेन-देन हुआ, किन डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल किया गया और रकम किन देशों तक पहुंची।
यदि इन माध्यमों से अवैध वित्तीय गतिविधियों की पुष्टि होती है, तो जांच का दायरा संबंधित डिजिटल वॉलेट, कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तक बढ़ सकता है।
सिंगापुर और दुबई के बीच लेन-देन के सुराग मिलने की चर्चा
शुरुआती खबरों में सिंगापुर और दुबई के बीच भी कथित वित्तीय लेन-देन के सबूत मिलने की जानकारी सामने आई है। इससे इस पूरे मामले के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका को लेकर जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
ईडी अब कंपनियों, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और डिजिटल करेंसी के जरिए हुए लेन-देन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच एजेंसी का मुख्य फोकस कथित 4,600 करोड़ रुपये के वित्तीय नेटवर्क की वास्तविक प्रकृति और रकम के स्रोत तथा गंतव्य का पता लगाने पर है।
4600 करोड़ के मामले में आगे क्या?
मध्यप्रदेश से बेंगलुरु तक हुई इस छापेमारी के बाद अब जांच एजेंसी की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी। जांच के दौरान दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े तथ्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल मामला जांच के शुरुआती चरण में है। छापेमारी में क्या-क्या मिला, कितने लोगों की भूमिका सामने आई और कथित 4,600 करोड़ रुपये के लेन-देन का पूरा नेटवर्क किन देशों तक फैला है, इन सवालों के जवाब विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएंगे।
विदिशा भारती अपडेट: आरपीएफएस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी शिकायतों के आधार पर ईडी की कार्रवाई और कथित अंतरराष्ट्रीय डिजिटल करेंसी नेटवर्क की जांच जारी है। मामले में आधिकारिक जानकारी सामने आने पर आगे के घटनाक्रम पर नजर रहेगी।
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