भोपाल। मध्यप्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग और उत्पादन में आई कमी के बीच राज्य सरकार ने विद्युत उपलब्धता बढ़ाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के अनुसार, प्रदेश में कृषि कार्यों, धान की सिंचाई और पलेवा के कारण बिजली की मांग में तेजी से इजाफा हुआ है। सरकार बंद विद्युत इकाइयों को दोबारा चालू करने और दूसरे राज्यों सहित बिजली एक्सचेंज से बिजली जुटाने के प्रयास कर रही है।
ऊर्जा मंत्री ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस साल बिजली की अधिकतम मांग में करीब 5,000 मेगावाट की वृद्धि हुई है। हालांकि, सरकार का दावा है कि आगामी सप्ताह तक अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होने से मौजूदा कमी दूर करने में मदद मिलेगी।
11,874 से बढ़कर 17,124 मेगावाट पहुंची बिजली की मांग
ऊर्जा मंत्री के मुताबिक, 14 अक्टूबर 2025 को प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 11,874 मेगावाट दर्ज की गई थी। इस वर्ष 14 अक्टूबर 2026 को यह बढ़कर 17,124 मेगावाट हो गई। इस तरह बिजली की अधिकतम मांग में लगभग 5,250 मेगावाट की वृद्धि हुई है।
कृषि क्षेत्र में भी बिजली की मांग बढ़ी है। पिछले वर्ष 1 अक्टूबर को कृषि कार्यों के लिए बिजली की मांग 1,752 मेगावाट थी, जबकि इस वर्ष 1 अक्टूबर को यह बढ़कर 3,701 मेगावाट हो गई।
कम बारिश वाले क्षेत्रों में सिंचाई की जरूरत बढ़ने और धान की फसल के लिए पानी उपलब्ध कराने के चलते बिजली की खपत पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
पिछले साल से 38.6 प्रतिशत अधिक बिजली की आपूर्ति
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि 14 अक्टूबर 2026 को प्रदेश में 3,310 लाख यूनिट बिजली की आपूर्ति की गई, जबकि पिछले वर्ष इसी तारीख को 2,423 लाख यूनिट बिजली उपलब्ध कराई गई थी।
इस प्रकार पिछले वर्ष के मुकाबले विद्युत आपूर्ति में लगभग 38.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके बावजूद मांग में तेज उछाल के कारण बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करना चुनौती बना हुआ है।
जल विद्युत उत्पादन में करीब 1,500 मेगावाट की कमी
प्रदेश में कम वर्षा का असर जल विद्युत उत्पादन पर भी पड़ा है। ऊर्जा मंत्री के अनुसार, गांधीसागर, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, राजघाट और सरदार सरोवर परियोजनाओं से होने वाले जल विद्युत उत्पादन में लगभग 1,500 मेगावाट की कमी आई है।
इसके अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में कोयले की कमी और तकनीकी समस्याओं के कारण ताप विद्युत इकाइयों के उत्पादन पर भी असर पड़ा है। प्रदेश के ताप विद्युत गृहों में तकनीकी समस्याओं से करीब 1,000 मेगावाट उत्पादन प्रभावित होने की जानकारी दी गई है।
उत्तर प्रदेश और बिजली एक्सचेंज से बिजली जुटाने की कोशिश
बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश से पीक आवर्स में 500 मेगावाट बिजली ले रही है। इसके साथ ही इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से भी बिजली खरीदने के प्रयास किए जा रहे हैं।
ऊर्जा मंत्री के मुताबिक, 13 अक्टूबर 2026 को पीक आवर्स के दौरान बिजली एक्सचेंज में मांग और उपलब्ध आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर था। ऐसे में बाजार से पर्याप्त बिजली खरीदना भी आसान नहीं हो रहा है।
बंद विद्युत इकाइयां दोबारा शुरू, उत्पादन बढ़ने की उम्मीद
सरकार बंद पड़ी विद्युत इकाइयों को जल्द चालू करने पर जोर दे रही है। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि खंडवा और बीरसिंहपुर की इकाइयों में रखरखाव के बाद बिजली उत्पादन दोबारा शुरू हो गया है। इससे लगभग 1,000 मेगावाट की अतिरिक्त उपलब्धता बढ़ी है।
इसके अलावा 20 अक्टूबर 2026 तक लैंको पावर और एनटीपीसी गाडरवारा की इकाइयों से करीब 600 मेगावाट बिजली उपलब्ध होने की उम्मीद जताई गई है।
तकनीकी कारणों से बंद हुई लगभग 1,200 मेगावाट क्षमता वाली इकाइयों को भी एक से दो दिन में चालू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
16 अक्टूबर से मिलेगी 500 मेगावाट बैंकिंग बिजली
ऊर्जा मंत्री के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 से प्रदेश को 500 मेगावाट बैंकिंग बिजली भी उपलब्ध होने लगेगी। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप आगामी सप्ताह तक लगभग 3,000 से 4,000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होने की संभावना जताई गई है।
सरकार को उम्मीद है कि इससे प्रदेश में मौजूदा बिजली की कमी दूर करने और बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।
रबी सीजन के लिए भी बिजली की व्यवस्था
आगामी रबी सीजन में किसानों को बिजली उपलब्ध कराने के लिए भी अग्रिम व्यवस्था की जा रही है। ऊर्जा मंत्री के अनुसार, पिछले वर्ष 3,600 मिलियन यूनिट की तुलना में इस बार लगभग 225 मिलियन यूनिट अतिरिक्त अग्रिम बैंकिंग की गई है।
योजना के तहत 1 नवंबर 2026 से 10 मार्च 2027 तक बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से बिजली प्राप्त की जाएगी। इससे रबी फसलों की सिंचाई के दौरान बिजली की जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद
मध्यप्रदेश में बिजली की मांग बढ़ने के बीच सरकार का ध्यान उत्पादन बढ़ाने, दूसरे राज्यों से बिजली लेने और बंद इकाइयों को फिर से शुरू करने पर है। यदि निर्धारित समयसीमा के अनुसार अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होती है, तो कृषि कार्यों और अन्य उपभोक्ताओं की मांग को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल बिजली आपूर्ति की स्थिति आगामी दिनों में शुरू होने वाली इकाइयों और अतिरिक्त बिजली की वास्तविक उपलब्धता पर निर्भर करेगी।
विदिशा भारती | मध्यप्रदेश की प्रमुख खबरें, आपके साथ।
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