आगर मालवा/महिदपुर: क्या हमारा समाज और प्रशासन आज इतने असहाय हो चुका है कि घर की दहलीज पर खेल रहे बच्चे भी अब सुरक्षित नहीं? यह सवाल उस दर्दनाक घटना के बाद खड़ा हुआ है, जिसने आगर-महिदपुर क्षेत्र को हिलाकर रख दिया है। उज्जैन जिले की महिदपुर तहसील के देलवाडी गांव में एक तीन साल के मासूम पर आवारा कुत्ते ने जो जानलेवा हमला किया, उसने न केवल एक परिवार की खुशियां छीन ली हैं, बल्कि सिस्टम की खोखली कार्यप्रणाली की पोल भी खोल दी है।
खेल-खेल में काल बन गया कुत्ता
घटना उस समय की है जब मासूम बच्चा अपने घर के बाहर बेफिक्र होकर खेल रहा था। परिवार के लोग पास ही अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे, तभी अचानक कहीं से आए एक आवारा कुत्ते ने बच्चे को अपना निशाना बना लिया। यह हमला इतना भयावह था कि कुत्ते ने बच्चे के चेहरे को बुरी तरह नोच डाला। पलक झपकते ही मासूम का चेहरा खून से लहूलुहान हो गया। बच्चे की चीखें सुनकर जब परिजन दौड़े, तो मंजर देखकर उनकी रूह कांप गई।
तीन डॉक्टरों की मशक्कत, फिर भी जख्म गहरे
खून का बहाव इतना तेज था कि प्राथमिक उपचार के दौरान भी स्थिति नियंत्रण में नहीं आ रही थी। बच्चे को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों की टीम ने तत्परता दिखाई। अस्पताल में मौजूद तीन डॉक्टरों ने मिलकर घंटो सर्जरी की, तब जाकर कहीं रक्तस्राव रुका। घावों की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मासूम के चेहरे पर 55 टांके लगाने पड़े। चेहरे पर आए गंभीर जख्मों और बिगड़ती हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तुरंत इंदौर के बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर दिया, जहाँ उसका इलाज जारी है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश ठंडे बस्ते में, जिम्मेदार कब जागेंगे?
डॉग बाइट (Dog Bite) की यह कोई पहली घटना नहीं है, लेकिन इसने प्रशासन के कान फिर से खड़े कर दिए हैं। हाल ही में देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और उनके नियंत्रण को लेकर सख्त टिप्पणी की थी। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। बावजूद इसके, जमीनी हकीकत यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कागजी घोड़े दौड़ाने में व्यस्त हैं और आम जनता, विशेषकर बच्चे, आवारा श्वानों के आतंक के साये में जी रहे हैं।
क्या अब भी नहीं जागेगा प्रशासन?
देलवाडी गांव की यह घटना प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता सबूत है। नगर पालिका और पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी क्या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं? सड़कों पर आवारा कुत्तों की बढ़ती फौज न केवल राहगीरों के लिए खतरा बनी हुई है, बल्कि अब बच्चों को अपना निवाला बना रही है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि बार-बार शिकायतें करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
अभिभावकों के लिए सतर्क रहने की अपील
यह घटना हर माता-पिता के लिए एक चेतावनी है। वर्तमान में आवारा कुत्तों की आक्रामकता बढ़ रही है। प्रशासन की तरफ से कोई भी ठोस कदम उठाए जाने तक, अभिभावकों को अपने बच्चों के प्रति अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। घर के बाहर खेलते समय बच्चों को अकेला न छोड़ें और किसी भी संदिग्ध कुत्ते को देखकर सावधानी बरतें।
फिलहाल, पूरा इलाका मासूम के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है और हर कोई ईश्वर से उसके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहा है। वहीं, प्रशासन के लिए यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा कर गई है—आखिर कब सुरक्षित होंगी हमारी गलियां?
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