पठारी। पर्युषण पर्व के समापन के बाद पठारी में जैन समाज द्वारा क्षमा वाणी पर्व श्रद्धा, भक्ति और आत्मीयता के साथ मनाया गया। गड़रमल मंदिर परिसर में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान वर्षभर में जाने-अनजाने हुई भूलों और गलतियों के लिए एक-दूसरे से क्षमा याचना की गई। क्षमा वाणी पर्व ने आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश दिया।
जैन धर्म में पर्युषण पर्व आत्मशुद्धि, संयम, तप और आत्मचिंतन का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इसके समापन के बाद मनाया जाने वाला क्षमा वाणी पर्व इसी भावना को आगे बढ़ाता है। इसी क्रम में गड़रमल मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में समाजजनों ने एक-दूसरे से क्षमा मांगते हुए पुराने मनमुटाव भुलाकर प्रेम और सौहार्द के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया। 
प्रवचन में बताया क्षमा का महत्व
कार्यक्रम में पर्युषण पर्व को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली ब्रह्मचारिणी नीलम दीदी एवं ज्योति दीदी ने प्रवचन दिए। उन्होंने धर्म, संयम और क्षमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्षमा केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और मन की शांति का माध्यम है। उन्होंने समाजजनों को अपने जीवन में धार्मिक मूल्यों को अपनाने और आपसी व्यवहार में प्रेम, विनम्रता तथा सहनशीलता बनाए रखने का संदेश दिया।
प्रवचन के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने धार्मिक विचारों को ध्यानपूर्वक सुना। मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय बना रहा और समाजजनों ने धार्मिक आयोजनों में इसी तरह एकजुट होकर भागीदारी करने का संकल्प लिया।
इंदौर शिविर में जाने वाले समाजजनों का सम्मान
बढ़ोह जैन समाज के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इंदौर शिविर में जाने वाले समाजजनों का सम्मान भी किया गया। इस अवसर पर विजय जैन, सर्वेश जैन, पारस जैन, छोटू जैन एवं सेतु सहेले का सम्मान किया गया। समाजजनों ने सम्मानित किए गए लोगों को शुभकामनाएं दीं और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता के लिए उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठजनों के साथ युवा और अन्य सदस्य भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। धार्मिक आयोजन के दौरान समाज की एकता और आपसी सहयोग की भावना देखने को मिली।
बड़ी संख्या में समाजजन रहे मौजूद
क्षमा वाणी पर्व के इस आयोजन में विमल जैन, अजय कठरया, राजेंद्र सिंघई, डिंपल सिंघई, शैलेंद्र चौधरी, सोनू बड़कुल, अनिल जैन, रितेश जैन, सुधीर कठरया, मनीष मसुरयाई, अंशुल सिंघई और दीपेश सहेले सहित बड़ी संख्या में जैन समाजजन मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में समाजजनों ने परस्पर क्षमा याचना करते हुए आपसी प्रेम और सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया। धार्मिक आयोजन ने समाज के लोगों को आत्मचिंतन के साथ रिश्तों में मधुरता और सहयोग की भावना मजबूत करने का अवसर दिया। श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुए क्षमा वाणी पर्व ने जैन समाज में क्षमा, करुणा और भाईचारे की भावना को और मजबूत किया।
Leave a comment
Your email address will not be published. Required fields are marked *