विदिशा भारती डेस्क
पठारी । विदिशा जिले का पठारी अंचल इन दिनों पूरी तरह भक्ति के रंग में सराबोर नजर आ रहा है। आस्था, सेवा और परंपरा के अद्भुत संगम के साथ क्षेत्र में विशाल धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला शुरू होने जा रही है। भारत भ्रमण तीर्थ यात्रियों के तत्वावधान में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में आगामी धार्मिक आयोजनों का खाका खींचा गया, जिसने पूरे इलाके में उत्साह की लहर दौड़ा दी है। निर्णय के अनुसार 20 नवंबर को राम महायज्ञ की ध्वज स्थापना के साथ इस महापर्व का शुभारंभ होगा। अगले ही दिन यानी 21 नवंबर को मां जानकी धाम करीला के लिए ऐतिहासिक पैदल ध्वज यात्रा प्रस्थान करेगी। धार्मिक आयोजनों की यह अविरल धारा यहीं नहीं थमेगी; नए साल में 16 जनवरी से 23 जनवरी तक दिव्य शिव महापुराण कथा और विशाल निःशुल्क कन्या विवाह सम्मेलन का भव्य आयोजन संपन्न होगा।
आस्था का उमड़ा सैलाब, बैठक में बनी रूपरेखा
पठारी में आयोजित धर्मप्रेमियों की इस वृहद बैठक में क्षेत्रभर के गणमान्य नागरिकों और श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी आयोजनों को सुव्यवस्थित और ऐतिहासिक बनाना रहा। भारत भ्रमण तीर्थ यात्री समिति के सदस्यों ने बताया कि पठारी क्षेत्र सदियों से सनातन आस्था और लोकसंस्कृति का मजबूत केंद्र रहा है। इस बार मां जानकी के दरबार में शीश नवाने के लिए निकलने वाली ध्वज यात्रा को अभूतपूर्व रूप देने की तैयारी है। बैठक में तय हुआ कि 20 नवंबर को विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच राम महायज्ञ की धर्म ध्वजा स्थापित की जाएगी। ध्वज स्थापना होते ही पूरे पठारी क्षेत्र में धार्मिक अनुष्ठानों का विधिवत शंखनाद हो जाएगा।
दो डीजे, ढोल-नगाड़े और आस्था का कारवां
21 नवंबर की सुबह पठारी के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह दर्ज होगी। प्रातःकाल प्रभात फेरी के मधुर भजनों के बाद पठार वाले हनुमान मंदिर परिसर से यह पावन ध्वज यात्रा करीला धाम के लिए कूच करेगी। यात्रा की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें दो बड़े डीजे साउंड सिस्टम, पारंपरिक ढोल-नगाड़े और झांकियां शामिल रहेंगी। भक्ति गीतों की धुन पर नाचते-गाते श्रद्धालु हाथों में मां जानकी की लाल-पीली ध्वजा थामे कदम आगे बढ़ाएंगे।
पठारी तहसील मुख्यालय के अलावा आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की तादाद में भक्त इस यात्रा में शामिल होने पहुंचेंगे। कोई नंगे पैर आस्था की डगर नापेगा, तो ग्रामीण इलाकों से किसान और युवा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को आकर्षक रूप से सजाकर काफिले के साथ आगे बढ़ेंगे। रास्ते भर 'जय जानकी मैया' और 'जय हनुमान' के गगनभेदी जयकारों से समूचा विंध्य क्षेत्र गुंजायमान रहेगा। जगह-जगह सामाजिक और धार्मिक संगठनों द्वारा पुष्पवर्षा कर ध्वज यात्रियों का भव्य स्वागत किया जाएगा।
शहरवासा, कुरवाई और सतेरी में सेवा का संकल्प
सैकड़ों किलोमीटर की इस पदयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए आयोजकों ने सेवा और समर्पण का मजबूत ताना-बाना बुना है। यात्रा मार्ग में पड़ने वाले प्रमुख पड़ावों जैसे शहरवासा, कुरवाई और सतेरी में श्रद्धालुओं के लिए स्वादिष्ट और शुद्ध भोजन प्रसादी की व्यापक व्यवस्था की जा रही है। पैदल चल रहे यात्रियों के लिए पूरे मार्ग में स्वच्छ पेयजल, अल्पाहार, चाय और विश्राम शिविर लगाए जाएंगे। यदि किसी यात्री को थकान या स्वास्थ्य संबंधी समस्या आती है, तो उसके लिए प्राथमिक चिकित्सा दल भी यात्रा के साथ मुस्तैद रहेगा। जैसे ही यह विशाल कारवां मां जानकी की पावन तपोभूमि करीला धाम पहुंचेगा, वहां एक विशाल महाभंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु एक साथ बैठकर प्रसादी ग्रहण करेंगे। आयोजक समिति गांव-गांव जाकर पीले चावल देकर ग्रामीणों को इस पुण्य यात्रा का साक्षी बनने का न्योता दे रही है।
जनवरी में बहेगी शिव भक्ति की गंगा, गूंजेगी शहनाई
नवंबर में ध्वज यात्रा के समापन के बाद पठारी की पावन धरा नए साल में एक और बड़े सामाजिक और आध्यात्मिक महाकुंभ की साक्षी बनेगी। 16 जनवरी से 23 जनवरी तक सात दिवसीय शिव महापुराण कथा का अमृतमयी आयोजन किया जाएगा। इस दौरान सुप्रसिद्ध कथा व्यास द्वारा भगवान देवाधिदेव महादेव की लीलाओं और महिमा का रसपान कराया जाएगा।
कथा के पावन अवसर पर निर्धन और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के लिए निःशुल्क सामूहिक कन्या विवाह का पुनीत अनुष्ठान भी संपन्न होगा। इस आयोजन के माध्यम से कई जोड़े परिणय सूत्र में बंधेंगे। विवाह में बेटियों को गृहस्थी का जरूरी सामान और उपहार देकर विदा किया जाएगा। समिति का संकल्प है कि धर्म के प्रचार के साथ-साथ नर सेवा ही नारायण सेवा के मूलमंत्र को चरितार्थ किया जाए।
जन-जन से सहभागिता की अपील
बैठक के समापन पर भारत भ्रमण तीर्थ यात्री समिति ने पठारी, कुरवाई सहित समूचे विदिशा जिले के नागरिकों से धर्म के इस महायज्ञ में तन, मन और धन से सहयोग करने की अपील की। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे विशाल आयोजनों से समाज में समरसता, आपसी भाईचारा और धार्मिक चेतना का विस्तार होता है। बैठक में शामिल सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त कर प्रसाद वितरण किया गया। वर्तमान में पठारी का हर कोना मां जानकी की भक्ति के रंग में रंग चुका है और हर किसी को 21 नवंबर के उस ऐतिहासिक सवेरे का बेसब्री से इंतजार है।
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