विदिशा: सोशल मीडिया और यूट्यूब के दौर में 'व्यूज' और 'क्लिकबेट' (Clickbait) के लिए किसी की प्रतिष्ठा के साथ खिलवाड़ करना कितना घातक हो सकता है, इसका ताजा उदाहरण विदिशा में देखने को मिला है। हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यक्रम के दौरान मंच संचालिका सानिसा हर्णे के बारे में फैलाए गए एक भ्रामक दावे ने स्थानीय स्तर पर आक्रोश पैदा कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के विदिशा दौरे के दौरान 'खेत बचाओ अभियान' का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में सानिसा हर्णे मंच का संचालन कर रही थीं। कार्यक्रम की रूपरेखा और प्रोटोकॉल स्थानीय प्रशासन द्वारा पहले से ही तय किए गए थे।
कार्यक्रम के दौरान जब अतिथियों के स्वागत का समय आया, तो केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक व्यावहारिक और सकारात्मक पहल की। उन्होंने मंच से निर्देश दिया कि “अतिथियों के स्वागत में समय बर्बाद न करें, बल्कि सीधे किसानों की समस्याओं और 'खेत बचाओ अभियान' के मूल उद्देश्यों पर चर्चा करें, ताकि किसानों को इसका सीधा लाभ मिल सके।”
यह निर्देश कार्यक्रम की उत्पादकता बढ़ाने के लिए था, न कि किसी की व्यक्तिगत आलोचना के लिए। मंच संचालिका सानिसा हर्णे केवल उसी प्रशासनिक स्क्रिप्ट का पालन कर रही थीं, जो उन्हें दी गई थी।
'किसान इंडिया' का 'क्लिकबेट' खेल
दिल्ली के एक यूट्यूब चैनल 'किसान इंडिया' ने इस पूरे घटनाक्रम को तोड़-मरोड़ कर पेश किया। चैनल ने अपनी वीडियो टैगलाइन में दावा किया कि "केंद्रीय मंत्री ने मंच संचालिका को मंच पर ही लताड़ लगाई।" यह दावा न केवल तथ्यों से परे है, बल्कि दुर्भावनापूर्ण भी है।
सानिसा हर्णे का पलटवार: “यह पत्रकारिता नहीं, चरित्र हनन है”
मामला तूल पकड़ते ही सानिसा हर्णे ने स्वयं सामने आकर सच्चाई बयां की। उन्होंने कहा, “प्रशासन द्वारा तय रूपरेखा का पालन करना मेरा काम था। मंत्री जी का निर्देश स्वागत की औपचारिकताएं छोड़कर किसानों के हित में समय का सदुपयोग करने के लिए था। इसे मेरी व्यक्तिगत फटकार के रूप में दिखाना पत्रकारिता के सिद्धांतों का घोर उल्लंघन है।”
कानूनी कार्रवाई की तैयारी
एक महिला के रूप में अपनी छवि धूमिल करने के प्रयासों को सानिसा हर्णे ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर की गई इस मानहानि को वे चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेंगी। सानिसा ने 'किसान इंडिया' के खिलाफ मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग और न्यायालय में कानूनी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है।
सोशल मीडिया पर सानिसा को मिला समर्थन
इस घटना के बाद विदिशा के प्रबुद्ध वर्ग और सानिसा के सहयोगियों में भारी रोष है। लोग इसे एक प्रतिभावान मंच संचालिका को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर यूजर्स लगातार 'फेक न्यूज' फैलाने वाले ऐसे चैनल्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
डिजिटल युग में सत्यता की परख करना अनिवार्य है। सानिसा हर्णे का यह संघर्ष न केवल उनके आत्म-सम्मान के लिए है, बल्कि उन सभी के लिए एक मिसाल है जो अक्सर भ्रामक और सनसनीखेज खबरों का शिकार होते हैं। विदिशा के लोग अब सानिसा के समर्थन में खड़े होकर 'डिजिटल नैतिकता' की मांग कर रहे हैं।
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