आकाश धाकड़ विदिशा, मध्य प्रदेश: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया पर हमले की खबरें अक्सर सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार मामला कुछ ज्यादा ही गंभीर है। मध्य प्रदेश के विदिशा में पत्रकारों को कानूनी नोटिस मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। अपनी कलम की आजादी को बचाने के लिए जिले के सभी पत्रकार लामबंद हो गए हैं और उन्होंने प्रशांत रघुवंशी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
क्या है पूरा मामला?
घटना की शुरुआत 10 जून को गंजबासौदा से हुई, जब वहां के स्थानीय पुजारियों ने एक पक्ष के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए। पुजारियों ने प्रधानमंत्री के नाम 36 पेज का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा था। इसमें आरोप लगाया गया था कि बांगरोद स्थित शासकीय भूमि (सर्वे क्रमांक 608, 607 और 603) पर अतिक्रमण किया गया है। साथ ही, श्री राधा कृष्ण मंदिर से पुजारी लक्ष्मीनारायण दुबे को हटाने का विरोध भी दर्ज कराया गया था। 
इस घटना की कवरेज जिले के प्रमुख पत्रकारों ने पूरी ईमानदारी और प्रमुखता के साथ की। यही समाचार प्रकाशित करना पत्रकारों के लिए मुसीबत का सबब बन गया।
प्रेस की आजादी दबाने की कोशिश?
आरोप है कि पत्रकारिता से बौखलाकर प्रशांत रघुवंशी ने 11 जून को विदिशा कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। नतीजा यह रहा कि उसी रात जर्नलिस्ट्स यूनियन ऑफ मध्य प्रदेश (गंजबासौदा) के ब्लॉक अध्यक्ष अभिनय श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार सौरभ बबेले, खीलान सिंह प्रजापति और पुजारी के भाई को धारा 179 बीएनएसएस (BNSS) के तहत नोटिस थमा दिए गए।
हैरानी की बात यह थी कि मामला गंजबासौदा का था, लेकिन पत्रकारों को विदिशा कोतवाली तलब किया गया। इस कार्रवाई को पत्रकारों ने 'प्रेस की स्वतंत्रता दबाने का कुत्सित प्रयास' करार दिया है।
सड़कों पर उतरे पत्रकार, कड़ा रुख
जर्नलिस्ट्स यूनियन ऑफ मध्य प्रदेश के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. अरुण सक्सेना के निर्देश पर जिले के पत्रकार एकजुट हुए। विदिशा प्रेस क्लब और जिले भर के पत्रकारों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में पत्रकारों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि खबर लिखने पर इस तरह कानूनी शिकंजे कसे जाएंगे, तो कोई भी व्यक्ति किसी भी समय षड्यंत्र रचकर पत्रकारों को झूठे मामलों में फंसा सकता है या उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। पत्रकारों ने मांग की है कि:
जारी किए गए सभी नोटिस तुरंत निरस्त किए जाएं।
प्रशांत रघुवंशी के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
'आर-पार' की लड़ाई का ऐलान
पत्रकार संगठनों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। जिले के सभी पत्रकार सरकारी कार्यक्रमों का कवरेज बंद कर देंगे और अनिश्चितकालीन धरना-आंदोलन करने को बाध्य होंगे। प्रशासन ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।
यह लड़ाई अब सिर्फ विदिशा के पत्रकारों की नहीं, बल्कि उस लोकतंत्र की है, जहां सच बोलना ही सबसे बड़ा अपराध बनता जा रहा है। देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में पत्रकारों के हक में क्या निर्णय लेता है।
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