गुना/बमोरी। गुना जिले की बमोरी तहसील के ग्राम पंचायत बनेह के ग्राम खुरदौन में मुक्तिधाम की व्यवस्था को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई। गांव में अंतिम संस्कार के लिए निर्धारित जगह पर कथित कब्जे और चबूतरा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को शव के अंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं मिली। हालात ऐसे बने कि ग्रामीणों ने सड़क पर ही अंतिम संस्कार करने का फैसला कर लिया।
मामले की जानकारी प्रशासन और पुलिस तक पहुंचते ही बमोरी तहसीलदार तथा धरनावदा थाना पुलिस की झागर चौकी की टीम गांव पहुंची। प्रशासन की मौजूदगी में मुक्तिधाम की जमीन पर लगी तार फेंसिंग हटाई गई और ग्रामीणों को उसी स्थान पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था कराई गई।
शाम 4 बजे अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे ग्रामीण
मामला 19 अगस्त का बताया जा रहा है। गांव में एक युवती की मौत हो गई थी। परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए शाम करीब 4 बजे मुक्तिधाम की ओर पहुंचे। वहां अंतिम संस्कार के लिए उचित स्थान उपलब्ध नहीं होने से समस्या खड़ी हो गई।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में शवों के अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। मुक्तिधाम की जमीन पर भी कथित रूप से लोगों ने पट्टे होने के नाम पर कब्जा कर रखा है। मौके पर अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक चबूतरा भी नहीं बना है।
जगह नहीं मिलने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई। काफी देर तक समाधान नहीं निकलने पर ग्रामीणों ने सड़क पर ही अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया।
सड़क पर शव रखकर किया विरोध
ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रख दिया। इससे गांव में तनाव की स्थिति बन गई। ग्रामीणों का कहना था कि जब अंतिम संस्कार के लिए गांव में जगह उपलब्ध नहीं है तो प्रशासन को इस समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए।
शाम करीब 4 बजे से शव सड़क पर रखा रहा। ग्रामीण अपनी मांग पर डटे रहे। मामले की जानकारी प्रशासन और पुलिस को मिली तो अधिकारियों ने तत्काल गांव पहुंचकर स्थिति को संभाला।
तहसीलदार और पुलिस पहुंची गांव
सूचना मिलते ही बमोरी तहसीलदार और धरनावदा थाना पुलिस की झागर चौकी की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत की और स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया।
ग्रामीणों और प्रशासन के बीच काफी देर तक बातचीत चलती रही। मुक्तिधाम की जमीन को लेकर भी स्थिति देखी गई। इसके बाद प्रशासन ने तार फेंसिंग हटवाने की कार्रवाई कराई।
तार फेंसिंग हटने के बाद मुक्तिधाम की जमीन पर अंतिम संस्कार के लिए जगह उपलब्ध कराई गई। इसके बाद ग्रामीणों ने सड़क से शव हटाकर मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया।
रात 11 बजे हुआ अंतिम संस्कार
अंतिम संस्कार को लेकर करीब 7 घंटे तक स्थिति बनी रही। शाम 4 बजे से सड़क पर रखा शव रात करीब 11 बजे मुक्तिधाम पहुंचाया गया। प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कराया गया।
इस दौरान ग्रामीणों में काफी आक्रोश रहा। ग्रामीणों का कहना था कि अंतिम संस्कार जैसी मूलभूत व्यवस्था के लिए भी उन्हें सड़क पर उतरने की स्थिति का सामना करना पड़ा।
मुक्तिधाम की जमीन पर कब्जे का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मुक्तिधाम के लिए निर्धारित जमीन पर कुछ लोगों ने पट्टे के नाम पर कब्जा कर लिया है। इसके कारण अंतिम संस्कार के लिए उपलब्ध जमीन लगातार कम होती जा रही है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि मुक्तिधाम में शवों के अंतिम संस्कार के लिए जरूरी चबूतरा तक नहीं बनाया गया है। ऐसी स्थिति में गांव में किसी व्यक्ति की मौत होने पर परिवार और ग्रामीणों के सामने परेशानी खड़ी हो जाती है।
हालांकि, जमीन के पट्टे और कथित कब्जे से जुड़े दावों की आधिकारिक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
स्थायी समाधान की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मुक्तिधाम की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने और वहां जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि अंतिम संस्कार के लिए ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बननी चाहिए।
मुक्तिधाम में चबूतरा, रास्ता और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी उठ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त व्यवस्था होना जरूरी है, ताकि किसी परिवार को अपने मृत परिजन के अंतिम संस्कार के लिए सड़क पर शव रखने की मजबूरी न हो।
19 अगस्त की घटना ने गांव की बुनियादी सुविधाओं और मुक्तिधाम की जमीन से जुड़े विवाद को सामने ला दिया है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है। प्रशासन की जांच के बाद जमीन की वास्तविक स्थिति और भविष्य में मुक्तिधाम के विकास को लेकर तस्वीर स्पष्ट होगी।
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