खातेगांव/देवास।
कहते हैं न कि "नींव अगर कमजोर हो, तो इमारत ज्यादा दिन नहीं टिकती!" कुछ ऐसा ही हाल देवास जिले की खातेगांव तहसील के अंतर्गत आने वाले हरणगांव का है। यहाँ के मुख्य मार्ग पर लाखों रुपये की लागत से बनी एक सीसी सड़क को देखकर अब ग्रामीण यही कह रहे हैं—‘यह तो बनने से पहले ही उखड़ने की तैयारी में है!’
विकास के नाम पर बनी इस सड़क में घटिया सामग्री और नियमों की अनदेखी के ऐसे आरोप लग रहे हैं, जिसने प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है।
115 मीटर की सड़क, 5.45 लाख का बजट... फिर भी घटिया काम?
मिले आंकड़ों और जानकारी के अनुसार, हरणगांव के मुख्य मार्ग पर 12 मीटर चौड़ी और 115 मीटर लंबी सीमेंट-कंक्रीट (सीसी) सड़क का निर्माण हाल ही में कराया गया है। इस निर्माण कार्य की स्वीकृत लागत 5 लाख 45 हजार रुपये बताई जा रही है।
कागजों में तो बजट पूरा पास हो गया और सड़क भी चमकती हुई दिखाई दे रही है, लेकिन धरातल पर कहानी बिल्कुल उल्टी है। ग्रामीणों की मानें तो इस सड़क में निर्धारित मापदंडों को ताक पर रख दिया गया है।
ग्रामीणों की जुबानी:
“सड़क बनने के दौरान ही घटिया गिट्टी, घटिया सीमेंट और बालू-रेत के नाम पर खानापूर्ति की गई। कंक्रीट के अनुपात में जो मजबूती होनी चाहिए थी, वह दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही। ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से लाखों रुपये के बजट पर पानी फेर दिया गया है।”
क्या हैं ग्रामीणों के आरोप और सवाल?
हरणगांव के मुख्य मार्ग से रोजाना सैकड़ों राहगीर और गाड़ियां गुजरती हैं। ऐसे में कमजोर सड़क का बनना न सिर्फ जनता के पैसे की बर्बादी है, बल्कि आने वाले समय में एक बड़े हादसे की आहट भी है।
ग्रामीणों ने खुलकर मोर्चा खोलते हुए निम्नलिखित सवाल उठाए हैं:
मानकों की अनदेखी: सड़क निर्माण के समय न तो पर्याप्त ढलाई की गई और न ही पानी की सही तराई (क्योरींग) हुई।
तकनीकी खामियां: 12 मीटर चौड़ी सड़क पर जिस तरह की मजबूती चाहिए थी, उसे पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
बजट की बंदरबांट: 5.45 लाख रुपये की राशि स्वीकृत होने के बावजूद घटिया सामग्री का इस्तेमाल क्यों किया गया?
“निष्पक्ष जांच हो, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा!”
गांव के आक्रोशित लोगों का कहना है कि अगर इस सड़क की तकनीकी जांच (Technical Audit) निष्पक्ष रूप से कराई जाए, तो निर्माण कार्य में हुई भारी अनियमितताओं का सच सामने आ जाएगा।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से पुरजोर मांग की है कि:
इस निर्माण कार्य की तत्काल प्रभाव से गुणवत्ता जांच कराई जाए।
निर्माण में धांधली करने वाले ठेकेदार और अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
सड़क को मानकों के अनुसार दोबारा सही कराया जाए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि ग्रामीणों की इस जायज आवाज पर प्रशासन का हंटर कब चलता है या फिर यह फाइल भी अन्य फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में दबा दी जाएगी!
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